Jaw Cancer Cause: हमारे शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव कई बार किसी बड़ी बीमारी की तरफ इशारा कर रहे होते हैं, लेकिन सही जानकारी न होने के कारण हम अक्सर इन्हें मामूली मानकर अनदेखा कर देते हैं। मुंह में बार-बार छाले होना, दांतों में हल्का दर्द या जबड़े में खिंचाव महसूस होना ये ऐसी आम समस्याएं हैं जो किसी को भी हो सकती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर ये समस्याएं लंबे समय तक ठीक न हों, तो यह सिर्फ दांतों की आम बीमारी नहीं, बल्कि एक गंभीर संकेत हो सकती हैं? आइए जानते हैं कि जॉ कैंसर क्या होता है, यह क्यों पनपता है, इसके शुरुआती संकेत क्या हैं और आप इससे अपना बचाव कैसे कर सकते हैं।
जबड़े का कैंसर (Jaw Cancer) क्या होता है?
जॉन हॉपकिंस मेडिसिन के मुताबिक, जबड़े का कैंसर एक ऐसी स्थिति है जिसमें ऊपरी या निचले जबड़े की हड्डियों, दांतों की जड़ों या जबड़े के आसपास की मांसपेशियों और टिश्यूज में असामान्य कोशिकाएं (cells) तेजी से बढ़ने लगती हैं। ज्यादातर मामलों में, कैंसर मुंह के किसी अन्य हिस्से (जैसे जीभ, मसूड़े या गाल के अंदर) में शुरू होता है और धीरे-धीरे फैलकर जबड़े की हड्डी तक पहुंच जाता है। कुछ दुर्लभ मामलों में यह सीधे जबड़े की हड्डी से भी शुरू हो सकता है।
जॉ कैंसर के प्रमुख संकेत और लक्षण
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, शुरुआती दौर में इसके लक्षण सामान्य छाले या दांत के दर्द जैसे लग सकते हैं। लेकिन अगर नीचे दिए गए लक्षण 2 से 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से संपर्क करना बहुत जरूरी हो जाता है;
- मुंह में ऐसा घाव जो ठीक न हो रहा हो।
- जबड़े या चेहरे पर सूजन और गांठ।
- दांतों का बिना वजह ढीला होना।
- मुंह खोलने या खाना चबाने में तकलीफ।
- जबड़े या कान में दर्द।
- चेहरे पर सुन्नपन (Numbness) होना।
यह कैंसर क्यों होता है?
Johns Hopkins और Cleveland Clinic की रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉ कैंसर के मुख्य कारण इस प्रकार हैं;
- तंबाकू का सेवन।
- शराब का अत्यधिक सेवन।
- सुपारी और पान मसाला चबाना।
- तंबाकू और शराब दोनों का साथ में सेवन।
- एचपीवी (HPV) इंफेक्शन।
जांच और इलाज कैसे होता है?
डॉक्टर या डेंटिस्ट आपके मुंह, गले और जबड़े की अच्छे से जांच करते हैं। एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई (Imaging) यह देखने के लिए कि समस्या हड्डी तक कितनी गहराई में फैली है। प्रभावित हिस्से से छोटा सा सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है, जिससे कैंसर होने या न होने का पक्का पता चलता है।कैंसर किस स्टेज पर है, उसी आधार पर इलाज तय किया जाता है। मुख्य रूप से सर्जरी करके प्रभावित हिस्से या ट्यूमर को हटाया जाता है। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी दी जाती है। सर्जरी के बाद चेहरे और जबड़े के आकार को पहले जैसा बनाने के लिए रीकन्स्ट्रक्टिव सर्जरी (Reconstructive Surgery) की मदद भी ली जाती है।
बचाव और सावधानियां
- तंबाकू, गुटखा, सिगरेट और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं।
- मुंह की साफ-सफाई का ध्यान रखें।
- हर 6 महीने में अपने डेंटिस्ट (दांतों के डॉक्टर) से नियमित चेकअप करवाएं।
- मुंह में किसी भी बदलाव या छाले को 2 हफ्ते से ज्यादा नजरअंदाज न करें।

