एशियन गेम्स में भारत को 2 मिनट में गोल्ड-सिल्वर:दोनों मेडल शूटिंग में; स्क्वॉश, कबड्डी और टेबल टेनिस में भी पदक पक्के

एशियन गेम्स में भारत को 2 मिनट में गोल्ड-सिल्वर:दोनों मेडल शूटिंग में; स्क्वॉश, कबड्डी और टेबल टेनिस में भी पदक पक्के

भारत ने एशियन गेम्स में शुक्रवार को 2 मिनट के अंदर 2 मेडल जीते। सुरुचि और कमलजीत की जोड़ी ने सुबह 9 बजे 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड इवेंट में गोल्ड दिलाया। इसके तुरंत बाद 9:02 बजे 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन इवेंट में भारतीय को सिल्वर मिला। जापान के नागोया में चल रहे गेम्स में भारत को दूसरा गोल्ड मिला है। इससे पहले महिला क्रिकेट टीम ने गेम्स का पहला गोल्ड मेडल दिलाया था। इसके अलावा, स्क्वॉश, कबड्‌डी और टेबल टेनिस जैसे खेलों में भी भारतीय खिलाड़ी मेडल पक्के कर चुके हैं। फिलहाल, मेडल टैली में भारत 2 स्वर्ण सहित 19 मेडल लेकर 12वें स्थान पर है। शूटिंग में अब तक 10 मेडल, पहला गोल्ड भारत को 2026 एशियन गेम्स में शूटिंग में पहला गोल्ड मिला है। भारतीय निशानेबाज अब तक 10 मेडल दिला चुके हैं। इनमें 5 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज भी शामिल हैं। भारतीय जोड़ी साउथ कोरिया से 6.6 मीटर आगे रही 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम फाइनल में सुरुचि और कमलजीत की भारतीय जोड़ी साउथ कोरिया से 6.6 अंक आगे रही। इंडिया ने 484.6 अंक हासिल किए। जबकि, साउथ कोरिया को 478.0 अंक मिले। ईरान ने 415.8 अंक के साथ ब्रॉन्ज जीता। 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन टीम में नंबर-2 पर रहा भारत भारतीय टीम 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन टीम इवेंट में 1762 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। इसमें चीन (1766 अंक) को गोल्ड और साउथ कोरिया (1751 अंक) को ब्रॉन्ज मिला। आज के गोल्ड मेडलिस्ट के बारे में जानिए… कमलजीत : इंजरी के बाद एथलेटिक्स छोड़ना पड़ा, शूटिंग में करियर बनाया कमलजीत हरियाणा के रेवाड़ी के सुलखा गांव के हैं। कमलजीत एथलेटिक्स में हिस्सा लेते थे। लेकिन, वे 2019 में चोट के कारण उन्हें एथलेटिक्स छोड़ना पड़ा। ऐसे में उन्होंने शूटिंग में करियर बनाया। स्ट्रगल के दौरान कमलजीत के मन में कई बार शूटिंग छोड़ने का विचार आया, लेकिन माता-पिता ने लगातार उनका साथ दिया। 2-3 साल की मेहनत के बाद उन्होंने खुद को एक अच्छे शूटर के रूप में स्थापित किया। सुरुचि : परिवार पहलवान बनाना चाहता था, शूटर बन गईं सुरुचि इंदर सिंह हरियाणा के झज्जर की 20 साल की शूटर हैं। उन्होंने 13 साल की उम्र में शूटिंग की शुरुआत की। वे भिवानी की गुरु द्रोणाचार्य शूटिंग एकेडमी में कोच सुरेश सिंह से ट्रेनिंग लेती हैं। उन्हें परिवार पहलवान बनाना चाहता था।

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