फर्रुखाबाद शहर में गुरुवार देर शाम करीब 9 बजे 11वीं शरीफ के मौके पर जज्बा और अकीदत का सैलाब उमड़ पड़ा। हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी (बड़े पीर साहब) की याद में मनाए जा रहे जश्न-ए-गौस में पूरा शहर आस्था में डूबा नजर आया। बृहस्पतिवार तड़के से ही पूरा मुस्लिम समुदाय बड़े पीर साहब की याद में डूब गया। सज्जादा नशीन शाह फांसीह मुजीबी की सरपरस्ती में दरगाह हुसैनिया मुजीबिया से पारंपरिक गागर जुलूस निकाला गया। जुलूस में प्रेम और मोहब्बत की गागर सिर पर रखे मुरीदों और अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
मोहल्ला सूफी खां से जुलूस आगे बढ़ा तो अकीदतमंदों की संख्या बढ़ती गई। कटरा बख्शी से लेकर मोहल्ला सखावत हुसैन तक पूरा रास्ता सजाया गया था। जगह-जगह जुलूस का स्वागत हुआ और सज्जादा नशीन को फूलमालाएं पहनाई गईं। छतों से फूलों की बारिश हुई और गलियां इत्र व गुलाबजल की खुशबू से महकती रहीं। रास्ते भर अकीदतमंदों में चाय, खीर और मिठाई का लंगर चलता रहा। कव्वाल सूफियाना कलाम से अकीदत बिखेरते रहे।
रिवायती अंदाज में जुलूस का समापन मोहल्ला सखावत हुसैन स्थित दरगाह झंडा शरीफ में हुआ। यहां सज्जादा नशीन की मौजूदगी में बड़े पीर साहब के कुनबा फातिहा का आयोजन हुआ। इस दौरान मुल्क की खुशहाली, अमन-चैन और सभी के लिए खैर व बरकत की दुआ मांगी गई। दरगाह पर झंडा शरीफ इंतजामिया कमेटी की ओर से कव्वाल की महफिल सजाई गई। यहां आस्था से सराबोर महिलाएं मन्नत के चांदी के चिराग चढ़ाने पहुंचीं। यह मंजर देर रात तक बना रहा। जुलूस के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। थाना मऊदरवाजा प्रभारी अजब सिंह और बजरिया उपनिरीक्षक यतेंद्र सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। उन्होंने पूरी व्यवस्था पर नजर रखी। इस अवसर पर दरगाह सेक्रेटरी नदीम खान, एडवोकेट आशु खां, हाजी मुजफ्फर हुसैन रहमानी, मोहम्मद इकबाल, असलम, मतीन खां, हाफिज हसीन, शमीम, गुलजार और लईक खां सहित सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे।

