सीवान के स्कूल में बेंच तोड़कर चूल्हे में जलाई:बच्चों का मिड-डे मील पकाया, वीडियो वायरल, रसोइया बोली- लकड़ी नहीं थी

सीवान के स्कूल में बेंच तोड़कर चूल्हे में जलाई:बच्चों का मिड-डे मील पकाया, वीडियो वायरल, रसोइया बोली- लकड़ी नहीं थी

सीवान के दरौंदा प्रखंड के बैदापुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय का एक वीडियो सामने आया है। इसमें बच्चों के बैठने के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की बेंच जैसी सामग्री को तोड़कर चूल्हे में जलाते हुए मध्याह्न भोजन पकाया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी है। वीडियो में एक महिला रसोइया चूल्हे में लकड़ी डालकर खाना पकाती दिखाई दे रही है। चूल्हे में जल रही लकड़ी को देखने पर वह बेंच का हिस्सा प्रतीत होती है। रसोइया वीडियो में लकड़ी उपलब्ध नहीं होने की बात भी कहती नजर आ रही है। ऐसे में सवाल है कि बच्चों के बैठने के लिए विद्यालय को उपलब्ध कराई गई बेंच आखिर चूल्हे तक कैसे पहुंच गई। बेंच जलाकर खाना पकाना व्यवस्था पर सवाल विद्यालय में बच्चों के लिए फर्नीचर उपलब्ध कराना उनकी बुनियादी शैक्षणिक जरूरतों का हिस्सा है। अगर वास्तव में बैठने वाली बेंच को तोड़कर मध्याह्न भोजन पकाने में इस्तेमाल किया गया है, तो यह सिर्फ एक बेंच के जलने का मामला नहीं है। इससे विद्यालय में मूलभूत संसाधनों और मध्याह्न भोजन व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल उठते हैं। बच्चों के लिए उपलब्ध कराई गई सामग्री को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करना सामान्य व्यवस्था नहीं मानी जा सकती। ग्रामीण बोले- लकड़ी नहीं थी तो अधिकारियों को बताना चाहिए था ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर माहौल देने के लिए सरकार की ओर से फर्नीचर समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अगर भोजन पकाने के लिए ईंधन की व्यवस्था नहीं थी तो इसकी जानकारी विद्यालय स्तर से संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए थी। इसके बावजूद बेंच जलाकर खाना पकाने की स्थिति क्यों बनी, इसकी जांच की मांग की जा रही है। ईंधन की व्यवस्था किसकी जिम्मेदारी, जांच से होगा साफ मामले में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन के लिए ईंधन की निर्धारित व्यवस्था क्या थी और उसे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी थी। स्कूल में मौजूद फर्नीचर को जलाने की अनुमति किस स्तर से मिली, यह भी जांच का विषय है। अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए। BEO ने फोन रिसीव नहीं किया इस संबंध में दरौंदा के प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सौरभ सुमन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। अब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि विद्यालय में बच्चों के बैठने वाली बेंच को चूल्हे में जलाने की नौबत क्यों आई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। सीवान के दरौंदा प्रखंड के बैदापुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय का एक वीडियो सामने आया है। इसमें बच्चों के बैठने के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की बेंच जैसी सामग्री को तोड़कर चूल्हे में जलाते हुए मध्याह्न भोजन पकाया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी है। वीडियो में एक महिला रसोइया चूल्हे में लकड़ी डालकर खाना पकाती दिखाई दे रही है। चूल्हे में जल रही लकड़ी को देखने पर वह बेंच का हिस्सा प्रतीत होती है। रसोइया वीडियो में लकड़ी उपलब्ध नहीं होने की बात भी कहती नजर आ रही है। ऐसे में सवाल है कि बच्चों के बैठने के लिए विद्यालय को उपलब्ध कराई गई बेंच आखिर चूल्हे तक कैसे पहुंच गई। बेंच जलाकर खाना पकाना व्यवस्था पर सवाल विद्यालय में बच्चों के लिए फर्नीचर उपलब्ध कराना उनकी बुनियादी शैक्षणिक जरूरतों का हिस्सा है। अगर वास्तव में बैठने वाली बेंच को तोड़कर मध्याह्न भोजन पकाने में इस्तेमाल किया गया है, तो यह सिर्फ एक बेंच के जलने का मामला नहीं है। इससे विद्यालय में मूलभूत संसाधनों और मध्याह्न भोजन व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल उठते हैं। बच्चों के लिए उपलब्ध कराई गई सामग्री को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करना सामान्य व्यवस्था नहीं मानी जा सकती। ग्रामीण बोले- लकड़ी नहीं थी तो अधिकारियों को बताना चाहिए था ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर माहौल देने के लिए सरकार की ओर से फर्नीचर समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अगर भोजन पकाने के लिए ईंधन की व्यवस्था नहीं थी तो इसकी जानकारी विद्यालय स्तर से संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए थी। इसके बावजूद बेंच जलाकर खाना पकाने की स्थिति क्यों बनी, इसकी जांच की मांग की जा रही है। ईंधन की व्यवस्था किसकी जिम्मेदारी, जांच से होगा साफ मामले में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन के लिए ईंधन की निर्धारित व्यवस्था क्या थी और उसे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी थी। स्कूल में मौजूद फर्नीचर को जलाने की अनुमति किस स्तर से मिली, यह भी जांच का विषय है। अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए। BEO ने फोन रिसीव नहीं किया इस संबंध में दरौंदा के प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सौरभ सुमन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। अब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि विद्यालय में बच्चों के बैठने वाली बेंच को चूल्हे में जलाने की नौबत क्यों आई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।  

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