Maharashtra Fishing Harbour Development: महाराष्ट्र सरकार ने उरण के करंजा स्थित मछली पकड़ने के बंदरगाह के जीर्णोद्धार और विकास के लिए 136.76 करोड़ रुपये मंजूर किए है। मछुआरों के लिए आवागमन और डॉकिंग सुविधाओं को आधुनिक बनाया जाएगा। पिछले दो वर्षों से बंदरगाह पर गाद (Silt) जमा होने की भारी समस्या से परेशान हजारों मछुआरों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है।
महाराष्ट्र के मछली पालन एवं बंदरगाह विकास विभाग ने मंत्री नितेश राणे के मार्गदर्शन में करंजा फिशिंग हार्बर में कुल 21 विकास कार्यों के लिए यह राशि मंजूर की है। इन कार्यों को नवंबर से शुरू किए जाने की संभावना है।
हार्बर के प्रवेश मार्ग की होगी ड्रेजिंग
प्रस्तावित कामों में हार्बर के प्रवेश चैनल से गाद निकालना यानी ड्रेजिंग और उसे चौड़ा करना प्रमुख है। इसके अलावा हार्बर में करीब 370 मीटर लंबी अतिरिक्त वॉर्फ वॉल का निर्माण भी किया जाएगा।
पिछले दो वर्षों से हार्बर में लगातार गाद जमा होने के कारण मछुआरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। भाटा (Low Tide) के समय स्थिति इतनी खराब हो जाती थी कि मछुआरों को अपनी पकड़ी हुई मछलियों को उतारने और बंदरगाह से बाहर निकलने के लिए 4 से 6 घंटे तक इंतजार करना पड़ता था।
सैकड़ों नावें गाद में फंस रही थीं
हाल के वर्षों से अत्यधिक गाद जमा हो जाने के कारण मछुआरों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। इसके कारण हार्बर के भीतर और बाहर अक्सर सैकड़ों नावें फंस जाती थीं। इससे मछुआरों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहा था और मछली पकड़ने का काम भी प्रभावित हो रहा था।
करंजा फिशिंग हार्बर मछली कारोबार के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। मछली पकड़ने के मौसम के दौरान इस हार्बर से करीब 550 करोड़ रुपये की मछलियों का कारोबार होता है।
मछुआरों की लंबे समय से थी ड्रेजिंग की मांग
करंजा फिशरमेन एसोसिएशन और स्थानीय मछुआरे लंबे समय से हार्बर की ड्रेजिंग कराने की मांग कर रहे थे। गाद की वजह से होने वाली परेशानियों को लेकर मछुआरों ने कई बार संबंधित विभाग के सामने अपनी मांग रखी थी।
अब 21 विकास कार्यों के लिए राशि मंजूर होने के बाद हार्बर की बुनियादी सुविधाओं में सुधार का रास्ता साफ हुआ है। इन कार्यों के पूरा होने के बाद हार्बर में नावों की आवाजाही और मछली उतारने की प्रक्रिया में आने वाली दिक्कतें दूर होंगी।

