सरकारी दफ्तरों में आम जनता की समस्याओं का समाधान कितनी धीमी गति से होता है, इसका एक उदाहरण कुदरा के अंचल कार्यालय में देखने को मिला है। तुर्की गांव के जमुना राम पिछले दो साल से अपने काम के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। 5 से 7 बार ब्लॉक के चक्कर लगा चुके जमुना राम का कहना है कि वे अपनी जमीन के मोटेशन (दाखिल-खारिज) के लिए लगातार कुदरा अंचल कार्यालय आ रहे हैं। उनका पहला आवेदन खारिज हो गया था, जिसके बाद उन्होंने डीसीएलआर कोर्ट में अपील की। कोर्ट ने दाखिल-खारिज के पक्ष में साफ आदेश दिया था। इस आदेश को आए करीब 15-20 दिन हो गए हैं, लेकिन अंचल कार्यालय ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। ढिलाई से ग्रामीणों में नाराजगी करीब 13 किलोमीटर दूर से आने वाले जमुना राम बताते हैं कि वे अब तक 5 से 7 बार ब्लॉक के चक्कर लगा चुके हैं। जब भी वे कार्यालय आते हैं, तो अधिकारी मिलते नहीं या फिर कागजों की मांग कर टालमटोल कर देते हैं। उच्च अधिकारियों के साफ निर्देशों के बाद भी इस तरह की लापरवाही से सवाल उठता है कि आम जनता को न्याय कब मिलेगा। प्रशासन की इस ढिलाई से ग्रामीणों में नाराजगी और निराशा बढ़ रही है। सरकारी दफ्तरों में आम जनता की समस्याओं का समाधान कितनी धीमी गति से होता है, इसका एक उदाहरण कुदरा के अंचल कार्यालय में देखने को मिला है। तुर्की गांव के जमुना राम पिछले दो साल से अपने काम के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। 5 से 7 बार ब्लॉक के चक्कर लगा चुके जमुना राम का कहना है कि वे अपनी जमीन के मोटेशन (दाखिल-खारिज) के लिए लगातार कुदरा अंचल कार्यालय आ रहे हैं। उनका पहला आवेदन खारिज हो गया था, जिसके बाद उन्होंने डीसीएलआर कोर्ट में अपील की। कोर्ट ने दाखिल-खारिज के पक्ष में साफ आदेश दिया था। इस आदेश को आए करीब 15-20 दिन हो गए हैं, लेकिन अंचल कार्यालय ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। ढिलाई से ग्रामीणों में नाराजगी करीब 13 किलोमीटर दूर से आने वाले जमुना राम बताते हैं कि वे अब तक 5 से 7 बार ब्लॉक के चक्कर लगा चुके हैं। जब भी वे कार्यालय आते हैं, तो अधिकारी मिलते नहीं या फिर कागजों की मांग कर टालमटोल कर देते हैं। उच्च अधिकारियों के साफ निर्देशों के बाद भी इस तरह की लापरवाही से सवाल उठता है कि आम जनता को न्याय कब मिलेगा। प्रशासन की इस ढिलाई से ग्रामीणों में नाराजगी और निराशा बढ़ रही है।

