Bacillary Dysentery Hindi: पेट खराब होना या दस्त लगना एक सामान्य बात लग सकती है, लेकिन जब दस्त के साथ तेज ऐंठन और मरोड़ महसूस हो, और मल (Stool) में खून या म्यूकस (आंव) आने लगे, तो यह किसी सामान्य पाचन की गड़बड़ी का मामला नहीं होता। डॉक्टरी भाषा में इस गंभीर स्थिति को बेसिलरी डिसेंट्री (Bacillary Dysentery) कहा जाता है। यह आंतों से जुड़ा एक ऐसा इन्फेक्शन है जो बैक्टीरिया के कारण फैलता है। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) की रिपोर्ट के अनुसार, इसे आमतौर पर शिगेलोसिस (Shigellosis) भी कहा जाता है, क्योंकि यह मुख्य रूप से शिगेला (Shigella) नाम के बैक्टीरिया की वजह से होता है। आइए समझते हैं कि यह बीमारी क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।
बेसिलरी डिसेंट्री क्या है?
बेसिलरी डिसेंट्री आंतों का एक बैक्टीरियल संक्रमण (Infection) है। जब यह बैक्टीरिया हमारे शरीर के अंदर पहुंचता है, तो यह बड़ी आंत (Large Intestine) की अंदरूनी परत में सूजन और घाव पैदा कर देता है। इस सूजन की वजह से आंतों में पानी और तरल पदार्थों को सोखने की क्षमता खत्म हो जाती है, जिससे व्यक्ति को बार-बार दस्त आने लगते हैं। आंतों की अंदरूनी परत में छालों या घाव की वजह से ही दस्त के साथ खून और चिपचिपा पदार्थ (म्यूकस) बाहर निकलने लगता है।
यह इन्फेक्शन कैसे फैलता है?
हांगकांग के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बेसिलरी डिसेंट्री एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेजी से फैलती है। इसके फैलने की मुख्य वजह अस्वच्छता और दूषित खान-पान है:
- दूषित पानी और भोजन।
- गंदे हाथ।
- संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना।
बेसिलरी डिसेंट्री के मुख्य लक्षण
बैक्टीरिया के शरीर में प्रवेश करने के 1 से 3 दिनों के भीतर इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, इसके प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं;
- खूनी दस्त (Bloody Diarrhea)।
- पेट में तेज मरोड़ और ऐंठन।
- तेज बुखार और ठंड लगना।
- बार-बार शौच जाने की तीव्र इच्छा (Tenesmus)।
- जी मिचलाना और उल्टी।
- कमजोरी और डिहाइड्रेशन।
इसका इलाज और राहत के उपाय
बेसिलरी डिसेंट्री के लक्षण दिखने पर खुद से कोई भी एंटीबायोटिक या दस्त रोकने की दवा (Anti-diarrheal medicine) लेने की भूल न करें, क्योंकि दस्त रोकने वाली दवाएं बैक्टीरिया को आंतों के अंदर ही रोक सकती हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। सबसे जरूरी है शरीर में पानी की कमी न होने देना। इसके लिए ओआरएस का घोल, नारियल पानी, हल्का सूप और उबला हुआ पानी पीते रहें। डॉक्टर आपके मल (Stool Test) की जांच कराकर यह तय करते हैं कि कौन सी एंटीबायोटिक दवा देनी है। गंभीर मामलों में एंटीबायोटिक कोर्स बहुत जरूरी होता है। पेट को आराम देने के लिए खिचड़ी, दलिया, केला और दही जैसा हल्का भोजन ही लें।
बीमारी से बचाव के तरीके
- खाना खाने से पहले और शौच के बाद हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
- हमेशा साफ, उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।
- बाहर का खुला, बासी या अस्वच्छ जगहों पर बना खाना खाने से बचें।
- फल और सब्जियों को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धोएं।
डॉक्टर के पास कब जाएं?
यदि दस्त में खून दिखाई दे, बुखार 101°F से ज्यादा हो, या लगातार उल्टी के कारण शरीर में पानी की सख्त कमी लगने लगे, तो बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल में संपर्क करें। समय पर मिला सही इलाज आपको कुछ ही दिनों में पूरी तरह स्वस्थ कर सकता है।

