सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को फिर से तय करने की मांग वाली एक नई याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों राज्य पहले से ही इस विवाद को लेकर कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि वे ऐसे अंतर-राज्यीय जल विवाद में सोसायटियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करेंगे, जिस पर पहले से ही सुनवाई चल रही है। बेंच ने कहा अगर हम दो राज्यों के बीच चल रहे विवाद में सोसायटियों की याचिकाओं पर सुनवाई करने लगेंगे, तो इसका कोई अंत नहीं होगा। इस याचिका में, दूसरी मांगों के अलावा, तमिलनाडु के हिस्से में से 70 TMC कावेरी का पानी कर्नाटक को फिर से आवंटित करने की मांग की गई थी। यह घटनाक्रम तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़ने के निर्देशों का कर्नाटक द्वारा पालन करने को लेकर चल रहे विवाद के बीच हुआ है।
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सुप्रीम कोर्ट अलग से तमिलनाडु की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें कावेरी के पानी में उसके हिस्से को तुरंत छोड़ने की मांग की गई है। 17 अगस्त को, सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के पानी छोड़ने के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया था। तमिलनाडु का कहना है कि बारिश की कमी वाले इस साल में उसे पानी का अपना उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। 3 अगस्त को, राज्य ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और तर्क दिया कि कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) द्वारा अनुशंसित पानी का आवंटन और उसके बाद कर्नाटक द्वारा छोड़ा गया पानी, दोनों ही अपर्याप्त थे। कर्नाटक ने शीर्ष अदालत को बताया था कि उसने 31 अगस्त तक तमिलनाडु को ज़रूरत से ज़्यादा पानी छोड़ा है और वह 9,000 क्यूसेक का प्रवाह बनाए रखने के CWMA के निर्देश का पालन कर रहा है।

