72वें नेशनल फिल्म अवार्ड में बिहार के चार लोगों को सम्मानित किया जाएगा। इसमें अभिनेता संजय मिश्रा, फिल्म निर्देशक कमलेश कुमार मिश्रा, निर्माता मिंटी मिश्रा और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव का नाम शामिल है। गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सभी को आज यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। 3 बजे से कार्यक्रम की शुरुआत होगी। संजय मिश्रा को फिल्म ‘भक्षक’ के लिए रजत कमल संजय मिश्रा को फिल्म ‘भक्षक’ में अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया जाएगा। इस श्रेणी में उन्हें रजत कमल से सम्मानित किया जाएगा। वहीं, गोपालगंज से जुड़े कमलेश कुमार मिश्रा और मीनती मिश्रा की फिल्म ‘काकोरी’ को ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्म की श्रेणी में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए चुना गया है। मुजफ्फरपुर के रहने वाले संजीव श्रीवास्तव को सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया जाएगा। फिल्म में संजय मिश्रा ने जमीनी पत्रकार की भूमिका निभाई फिल्म ‘भक्षक’ में संजय मिश्रा ने ‘भास्कर सिन्हा’ नाम के एक संवेदनशील, साहसी और जमीनी पत्रकार की भूमिका निभाई। संजय मिश्रा ने अपनी भावनाओं, संवादों और अभिनय के जरिए इस भूमिका में जान डाल दी। सामाजिक सरोकार और सच को सामने लाने की उनकी इस भूमिका को समीक्षकों ने खूब सराहा, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला। पटना में हुई संजय मिश्रा की शुरुआती शिक्षा संजय मिश्रा का पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद समृद्ध रही है। उनके पिता स्व. शंभुनाथ मिश्रा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत थे और पत्रकारिता जगत से भी जुड़े रहे। संजय मिश्रा का बचपन पटना, बनारस और दिल्ली में गुजरा। उनकी शुरुआती शिक्षा पटना के सेंट जेवियर्स हाई स्कूल से हुई। बचपन में वे किताबों से ज्यादा आसपास के लोगों को देखने और उनकी नकल उतारने में मग्न रहते थे। पिता के तबादले के बाद उनका बचपन बनारस के घाटों और गलियों में बीता। गोपालगंज के कमलेश और मीनती को ‘काकोरी’ के लिए पुरस्कार गोपालगंज के हथुआ प्रखंड के सिंगहा गांव से जुड़े निर्देशक कमलेश कुमार मिश्रा और निर्माता मीनती मिश्रा की फिल्म ‘काकोरी’ को सर्वश्रेष्ठ जीवनी/ ऐतिहासिक पुनर्निर्माण/ संकलन फिल्म की श्रेणी में चुना गया है। दोनों को रजत कमल और निर्धारित नकद पुरस्कार मिलेगा। ‘काकोरी’ 1925 के काकोरी रेल एक्शन की ऐतिहासिक घटना पर आधारित है। फिल्म के निर्माण के दौरान ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुरानी किताबों और अखबारों के साथ-साथ इतिहासकारों से भी जानकारी जुटाई गई। मुजफ्फरपुर से जुड़े संजीव श्रीवास्तव को सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक पुरस्कार संजीव श्रीवास्तव को सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक (हिंदी) का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलेगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की आधिकारिक सूची में उन्हें इस श्रेणी का एकमात्र विजेता घोषित किया गया है। इस पुरस्कार के साथ स्वर्ण कमल और नकद पुरस्कार दिया जाएगा। संजीव श्रीवास्तव लंबे समय से पत्रकारिता और फिल्म लेखन से जुड़े हैं। उनका पैतृक गांव-घर बिहार के सीतामढ़ी में है और वे करीब ढाई दशक से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। 72वें नेशनल फिल्म अवार्ड में बिहार के चार लोगों को सम्मानित किया जाएगा। इसमें अभिनेता संजय मिश्रा, फिल्म निर्देशक कमलेश कुमार मिश्रा, निर्माता मिंटी मिश्रा और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव का नाम शामिल है। गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सभी को आज यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। 3 बजे से कार्यक्रम की शुरुआत होगी। संजय मिश्रा को फिल्म ‘भक्षक’ के लिए रजत कमल संजय मिश्रा को फिल्म ‘भक्षक’ में अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया जाएगा। इस श्रेणी में उन्हें रजत कमल से सम्मानित किया जाएगा। वहीं, गोपालगंज से जुड़े कमलेश कुमार मिश्रा और मीनती मिश्रा की फिल्म ‘काकोरी’ को ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्म की श्रेणी में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए चुना गया है। मुजफ्फरपुर के रहने वाले संजीव श्रीवास्तव को सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया जाएगा। फिल्म में संजय मिश्रा ने जमीनी पत्रकार की भूमिका निभाई फिल्म ‘भक्षक’ में संजय मिश्रा ने ‘भास्कर सिन्हा’ नाम के एक संवेदनशील, साहसी और जमीनी पत्रकार की भूमिका निभाई। संजय मिश्रा ने अपनी भावनाओं, संवादों और अभिनय के जरिए इस भूमिका में जान डाल दी। सामाजिक सरोकार और सच को सामने लाने की उनकी इस भूमिका को समीक्षकों ने खूब सराहा, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला। पटना में हुई संजय मिश्रा की शुरुआती शिक्षा संजय मिश्रा का पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद समृद्ध रही है। उनके पिता स्व. शंभुनाथ मिश्रा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत थे और पत्रकारिता जगत से भी जुड़े रहे। संजय मिश्रा का बचपन पटना, बनारस और दिल्ली में गुजरा। उनकी शुरुआती शिक्षा पटना के सेंट जेवियर्स हाई स्कूल से हुई। बचपन में वे किताबों से ज्यादा आसपास के लोगों को देखने और उनकी नकल उतारने में मग्न रहते थे। पिता के तबादले के बाद उनका बचपन बनारस के घाटों और गलियों में बीता। गोपालगंज के कमलेश और मीनती को ‘काकोरी’ के लिए पुरस्कार गोपालगंज के हथुआ प्रखंड के सिंगहा गांव से जुड़े निर्देशक कमलेश कुमार मिश्रा और निर्माता मीनती मिश्रा की फिल्म ‘काकोरी’ को सर्वश्रेष्ठ जीवनी/ ऐतिहासिक पुनर्निर्माण/ संकलन फिल्म की श्रेणी में चुना गया है। दोनों को रजत कमल और निर्धारित नकद पुरस्कार मिलेगा। ‘काकोरी’ 1925 के काकोरी रेल एक्शन की ऐतिहासिक घटना पर आधारित है। फिल्म के निर्माण के दौरान ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुरानी किताबों और अखबारों के साथ-साथ इतिहासकारों से भी जानकारी जुटाई गई। मुजफ्फरपुर से जुड़े संजीव श्रीवास्तव को सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक पुरस्कार संजीव श्रीवास्तव को सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक (हिंदी) का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलेगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की आधिकारिक सूची में उन्हें इस श्रेणी का एकमात्र विजेता घोषित किया गया है। इस पुरस्कार के साथ स्वर्ण कमल और नकद पुरस्कार दिया जाएगा। संजीव श्रीवास्तव लंबे समय से पत्रकारिता और फिल्म लेखन से जुड़े हैं। उनका पैतृक गांव-घर बिहार के सीतामढ़ी में है और वे करीब ढाई दशक से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं।

