गाजियाबाद के मोहन नगर स्थित ‘गुल्मोहर ग्रीन्स’ सोसाइटी में बिना निवासियों की सहमति के अतिरिक्त मंजिलों और फ्लैटों के निर्माण के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने मामले की निष्पक्ष जांच और वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए दो एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने अधिवक्ता संजय कुमार ओम और प्रखर कुमार श्रीवास्तव को मौका मुआयना कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का जिम्मा सौंपा है। जानिए क्या है मामला
यह याचिका सुरेश चंदर व 10 अन्य निवासियों द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि बिल्डर ने ‘यूपी अपार्टमेंट एक्ट, 2010’ के नियमों का उल्लंघन करते हुए निवासियों की सहमति के बिना अतिरिक्त निर्माण शुरू कर दिया। याचियों का कहना है कि 18 दिसंबर 2024 को जारी तीसरे कंपाउंडिंग आदेश के जरिए अवैध रूप से 112 अतिरिक्त फ्लैटों को मंजूरी दी गई, जिनमें टावर नंबर 16 से 19 में दो-दो अतिरिक्त मंजिलें और टावर 27 व 28 में निर्माण शामिल हैं।निवासियों का तर्क है कि जिन टावरों में लोग पहले से रह रहे हैं, वहां इस तरह का निर्माण कार्य उनकी जान-माल के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। बिल्डरों और अन्य ने आपत्ति जताई
दूसरी ओर, बिल्डर और अन्य प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ताओं के दावों पर आपत्ति जताई। कोर्ट द्वारा वास्तविक स्थिति की पड़ताल के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने के प्रस्ताव पर दोनों पक्षों ने अपनी सहमति दी। इस सर्वेक्षण का आधा खर्च याचिकाकर्ताओं और आधा खर्च बिल्डर (प्रतिवादी संख्या 3) द्वारा उठाया जाएगा। कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर संजय कुमार ओम की फीस 1,00,000 रुपये और प्रखर कुमार श्रीवास्तव की फीस 50,000 रुपये तय की है। एडवोकेट कमिश्नर जांच करेंगे
हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार, दोनों एडवोकेट कमिश्नर 19 और 20 सितंबर 2026 को मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे। इस दौरान परियोजना में मौजूद कुल टावरों की संख्या, प्रत्येक टावर में मंजिलों व फ्लैटों की स्थिति, निर्माणाधीन व पूर्ण हो चुके फ्लैटों का ब्योरा और टावर 16 से 19 की ऊपरी मंजिलों की स्थिति की गहन जांच की जाएगी। निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पूरे निरीक्षण की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाएगी, जिसकी सॉफ्ट कॉपी और पेन ड्राइव कमिश्नरों को सौंपी जाएगी। पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया
अदालत ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) और गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे निरीक्षण के दौरान एडवोकेट कमिश्नरों को आवश्यक सहायता और पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराएं। एडवोकेट कमिश्नर अपनी जांच रिपोर्ट 25 सितंबर 2026 तक पक्षों को सौंपेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर 2026 को तय की गई है, जिस दिन जीडीए को मामले से जुड़े सभी मूल दस्तावेज कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।

