राजस्थान में धर्मांतरण के लिए विदेशी फंडिंग से जुड़े बेल्जियम के एक नेटवर्क का खुलासा हुआ है। ED की शुरुआती जांच के मुताबिक, बेल्जियम के ब्रुसेल्स में संचालित एक संस्था से पिछले वर्षों में करीब 5.10 करोड़ रुपए जैसलमेर भेजे गए। रकम को पारिवारिक भरण-पोषण, शैक्षणिक सेवाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों के नाम पर बैंक खातों में दिखाया गया, जबकि जमीन पर इन गतिविधियों से जुड़ा वास्तविक काम नहीं हो रहा था। जैसलमेर के रहने वाले मुख्य आरोपी देउराम ने करीब 2.60 करोड़ रुपए नकद निकाले, लेकिन उसका कोई वित्तीय रिकॉर्ड नहीं रखा गया। जब इन खातों में विदेशी रकम आने पर रोक लगी तो दूसरे लोगों के निजी बैंक खातों के जरिए फंडिंग जारी रखने की कोशिश की गई। इसी जांच के आधार पर ED ने दो ठिकानों पर छापेमारी कर सबूत जुटाए हैं। अब एजेंसी विदेशी फंडिंग के लेनदेन, रकम के इस्तेमाल और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पांच पॉइंट में समझे क्या है पूरा मामला 1. 14-15 साल पहले बेल्जियम से शुरू हुआ नेटवर्क
ED की शुरुआती जांच के मुताबिक, जैसलमेर में यह नेटवर्क करीब 15 साल पहले सक्रिय हुआ। बेल्जियम के ब्रुसेल्स में ‘अमर एएसबीएल’ (Amar ASBL) नाम की संस्था संचालित हो रही थी। इसे दो बेल्जिक नागरिक जोसेफ गोफिनेट और उनके बेटे सैलियन गोफिनेट चला रहे थे। संस्था कागजों पर गैर-लाभकारी होने का दावा करती है, लेकिन भारत में इसका कोई आधिकारिक ट्रस्ट या एनजीओ रजिस्टर्ड नहीं है। बेल्जिक नागरिक जैसलमेर के स्थानीय निवासी देउराम और उसके साथी ज्ञानचंद के संपर्क में थे। दोनों हर साल जैसलमेर आते थे और 2-3 हफ्ते रुककर स्थानीय लोगों से मिलते थे। 2. बेल्जियम से जैसलमेर भेजी गई करीब 5.10 करोड़ की रकम
ED की जांच में सामने आया कि बेल्जियम की इस संस्था से पिछले वर्षों में करीब 5 करोड़ 10 लाख रुपए की संदिग्ध विदेशी फंडिंग जैसलमेर भेजी गई। शुरुआती जांच के अनुसार, यह पैसा बिना जरूरी FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) रजिस्ट्रेशन के भारत लाया गया। बैंक खातों में रकम को पारिवारिक भरण-पोषण, शैक्षणिक सेवाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों के नाम पर दिखाया गया, जबकि जांच एजेंसी के मुताबिक जमीन पर इन गतिविधियों से जुड़ा कोई वास्तविक काम नहीं हो रहा था। 3. फंड का इस्तेमाल धर्मांतरण और निजी खर्च में होने का आरोप
ED की पड़ताल के अनुसार, विदेशी फंड का इस्तेमाल जैसलमेर के कमजोर और संवेदनशील वर्गों के बीच उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं को प्रभावित करने तथा धर्मांतरण के लिए किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि इस रकम का निजी खर्चों में इस्तेमाल किया गया। मुख्य आरोपी देउराम ने करीब 2 करोड़ 60 लाख रुपए नकद निकाल लिए। ED के मुताबिक, इस रकम का कोई वित्तीय रिकॉर्ड या हिसाब नहीं रखा गया। 4. बैंक खातों पर रोक लगी तो दूसरे खातों से रकम घुमाने की कोशिश
हाल ही में जब बैंकों को इन संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिली तो देउराम और ज्ञानचंद के खातों में आने वाली विदेशी रकम पर रोक लगा दी गई। इसके बाद आरोपियों ने फंडिंग जारी रखने के लिए जैसलमेर के ही अन्य संबंधित लोगों के निजी बैंक खातों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। यानी पहले जिन खातों में सीधे पैसा आ रहा था, उन पर रोक लगने के बाद रकम को दूसरे खातों के जरिए रूट करने की कोशिश की गई। 5. ED ने दो ठिकानों पर छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटाए
इसी जांच के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय के जयपुर जोनल ऑफिस ने FEMA (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) के तहत जैसलमेर में दो ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान ED को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले हैं। अब एजेंसी पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच का फोकस विदेशी फंडिंग के पूरे लेनदेन, उसके इस्तेमाल और इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने पर है।

