मुजफ्फरनगर में पत्नी की दहेज हत्या के मामले में विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने निलंबित बीएसएफ जवान मनोज उर्फ मोनू को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। सजा के समय मनोज को जिला कारागार से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। वह वर्ष 2024 से जेल में बंद है। मामला आकांक्षा उर्फ पूजा की मौत से जुड़ा है। मेरठ के मवाना थाना क्षेत्र के मीवा गांव निवासी सुभाष ने अपनी बेटी आकांक्षा की शादी 6 फरवरी 2017 को मुजफ्फरनगर के भोपा थाना क्षेत्र के कासमपुर खोला गांव निवासी अजब सिंह के बेटे मनोज उर्फ मोनू से की थी। मनोज उस समय बीएसएफ में जवान के पद पर तैनात था। अभियोजन के अनुसार, शादी के बाद से ही आकांक्षा को दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाता था। मायके पक्ष ने मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। छुट्टी बढ़वाकर पत्नी को मायके ले गया अभियोजन के मुताबिक, मार्च 2024 में मनोज छुट्टी पर घर आया था। अप्रैल में उसे ड्यूटी पर लौटना था। इसी दौरान उसने पत्नी की तबीयत खराब होने की बात कही और आकांक्षा को हृदयाघात होने का हवाला देकर छुट्टी बढ़वा ली। इसके बाद 2 अप्रैल को वह आकांक्षा को लेकर उसके मायके मीवा पहुंचा। अगले ही दिन परिवार को उसकी मौत की सूचना मिली। पहले हार्ट अटैक, फिर हादसे की बताई वजह अभियोजन के अनुसार, 3 अप्रैल 2024 की सुबह करीब 7:30 बजे आकांक्षा के ससुर अजब सिंह ने उसके पिता सुभाष को फोन किया। बताया गया कि आकांक्षा को हृदयाघात हुआ है और मनोज उसे डॉक्टर के पास लेकर जा रहा है। कुछ देर बाद मायके पक्ष को बताया गया कि डॉक्टर के पास ले जाते समय कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई और आकांक्षा की मौत हो गई। बेटी की मौत की सूचना के बाद मायके वालों ने घटना पर सवाल उठाए और इसे सामान्य सड़क हादसा मानने से इनकार कर दिया। पति समेत 5 पर दर्ज हुआ था मुकदमा सुभाष की शिकायत पर 7 अप्रैल 2024 को मीरापुर थाने में मनोज समेत पांच लोगों के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। आरोपियों में मनोज के पिता अजब सिंह, मां मिथलेश, चाचा मंगलू और बहनोई लवकुश भी शामिल थे। पुलिस ने जांच के बाद मनोज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद मामला विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट में पहुंचा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने पेश किए। कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. विजय कुमार की अदालत ने सुनवाई पूरी करने के बाद मनोज उर्फ मोनू को दोषी माना। सोमवार को अदालत ने उसे आजीवन कारावास और 50 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के दौरान आरोपी को जिला कारागार से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया।

