दरभंगा में ‘बिहार बचाएगा लोकतंत्र’ कार्यक्रम:कन्हैया बोले- बिहार लोकतंत्र की जननी है, समाज में सभी के लिए समान भाव और सम्मान जरूरी

दरभंगा में ‘बिहार बचाएगा लोकतंत्र’ कार्यक्रम:कन्हैया बोले- बिहार लोकतंत्र की जननी है, समाज में सभी के लिए समान भाव और सम्मान जरूरी

दरभंगा में लोकवार्ता के बैनर तले लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विमर्श की पहल ‘बिहार बचाएगा लोकतंत्र’ के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य एवं एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी डॉ. कन्हैया कुमार शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकवार्ता के संयोजक मनीष पासवान ने की, जबकि संचालन अनुपमा भारद्वाज ने किया। इस दौरान मिथिला की लोकतांत्रिक विरासत, लोक-बुद्धि, सामाजिक सहभागिता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। एनएसयूआई के दर्जनों युवा कार्यकर्ताओं ने डॉ. कन्हैया कुमार का भव्य स्वागत किया। कार्यकर्ताओं ने उन्हें मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग-चादर, फूल-माला देकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्हें बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर, संविधान के मूल उद्देश्यों से संबंधित प्रति और मिथिला पेंटिंग भेंट की गई। कार्यकर्ताओं ने ‘कन्हैया कुमार जिंदाबाद’ और ‘बाबा साहेब अमर रहे’ के नारे भी लगाए। ‘लोकतंत्र की पुरानी परंपरा से प्रदेश की पहचान’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. कन्हैया कुमार ने कहा कि बिहार लोकतंत्र की जननी है। बिहार में लोकतंत्र की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक की स्थापना हुई थी। आज जब देश और दुनिया के कई हिस्सों में लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, ऐसे समय में जिस प्रदेश की पहचान लोकतंत्र की पुरानी परंपरा से रही है। वहां के लोगों की जिम्मेदारी है कि वे लोकतंत्र की रक्षा के सवाल पर संवाद करें। व्यक्ति की गरिमा सबसे महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति को उसकी शारीरिक दक्षता के आधार पर अपमानित नहीं किया जाना चाहिए। है। व्यक्ति की पहचान चाहे जो भी हो, उसकी गरिमा और अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। संविधान की मूल भावना के विरोध में जो भी बात होगी, उसका विरोध किया जाना चाहिए। हमारा जीवन, हमारे मूल्य, हमारे अधिकार और हमारी जिम्मेदारियां संविधान से जुड़े हैं। संवैधानिक मूल्यों पर चलते हुए ही बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है। ‘लोकतंत्र में आम लोगों की भागीदारी जरूरी’ कन्हैया कुमार ने सामूहिक सहभागिता का उदाहरण देते हुए कहा कि जब पूरी टीम मिलकर खेलेगी, तभी खेल जीतेगी। यदि लोग खेल में शामिल ही नहीं होंगे तो जीत की संभावना कैसे बनेगी। उन्होंने लोकतंत्र में आम लोगों की भागीदारी को आवश्यक बताया। दरभंगा महाराज और कर्पूरी ठाकुर के योगदान की चर्चा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लोकवार्ता के संयोजक मनीष पासवान ने दरभंगा महाराज द्वारा संस्थानों के निर्माण और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने जननायक कर्पूरी ठाकुर के सामाजिक न्याय और आरक्षण के लिए किए गए प्रयासों को रेखांकित किया। साथ ही गोनू झा जैसे लोक-प्रतीकों का उदाहरण देते हुए मिथिला की लोक-बुद्धि, तर्कशीलता और सवाल करने की परंपरा पर चर्चा की। अनुपमा भारद्वाज ने लोकवार्ता और ‘बिहार बचाएगा लोकतंत्र’ अभियान की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक सवालों के उत्तर तलाशने के लिए लोक की सामूहिक स्मृति, अनुभव और ज्ञान की ओर लौटना जरूरी है। लोकतंत्र केवल संस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के व्यवहार और आपसी संवाद में भी उसकी अभिव्यक्ति होनी चाहिए। साझा संस्कृति और संसाधनों पर जोर इंजीनियर फुलेश्वर सिंह ने बाढ़ प्रबंधन, तालाबों और पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर समुदाय की सहभागिता से जल और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। डॉ. राकेश रंजन ने ‘लोक लाज’ और ‘लोक नियति’ को लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भयमुक्त संवाद को आवश्यक बताया। कहा कि यदि लोग अपनी बात कहने से डरने लगें तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है। दरभंगा महाराज के योगदान की चर्चा प्रो. मुनेश्वर यादव ने मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक विरासत और दरभंगा महाराज के संस्थान निर्माण में योगदान की चर्चा की। उन्होंने वैश्वीकरण के दौर में स्थानीय संस्थाओं, संस्कृति और संसाधनों को मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र को केवल चुनाव, सरकार और संवैधानिक संस्थाओं तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। लोकतांत्रिक मूल्यों को समाज के व्यवहार, संवाद, सहभागिता और सामूहिक जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है। कार्यक्रम में युवाओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की मौजूदगी भी रही। दरभंगा में लोकवार्ता के बैनर तले लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विमर्श की पहल ‘बिहार बचाएगा लोकतंत्र’ के तहत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य एवं एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी डॉ. कन्हैया कुमार शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकवार्ता के संयोजक मनीष पासवान ने की, जबकि संचालन अनुपमा भारद्वाज ने किया। इस दौरान मिथिला की लोकतांत्रिक विरासत, लोक-बुद्धि, सामाजिक सहभागिता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। एनएसयूआई के दर्जनों युवा कार्यकर्ताओं ने डॉ. कन्हैया कुमार का भव्य स्वागत किया। कार्यकर्ताओं ने उन्हें मिथिला की परंपरा के अनुसार पाग-चादर, फूल-माला देकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्हें बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर, संविधान के मूल उद्देश्यों से संबंधित प्रति और मिथिला पेंटिंग भेंट की गई। कार्यकर्ताओं ने ‘कन्हैया कुमार जिंदाबाद’ और ‘बाबा साहेब अमर रहे’ के नारे भी लगाए। ‘लोकतंत्र की पुरानी परंपरा से प्रदेश की पहचान’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. कन्हैया कुमार ने कहा कि बिहार लोकतंत्र की जननी है। बिहार में लोकतंत्र की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक की स्थापना हुई थी। आज जब देश और दुनिया के कई हिस्सों में लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, ऐसे समय में जिस प्रदेश की पहचान लोकतंत्र की पुरानी परंपरा से रही है। वहां के लोगों की जिम्मेदारी है कि वे लोकतंत्र की रक्षा के सवाल पर संवाद करें। व्यक्ति की गरिमा सबसे महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति को उसकी शारीरिक दक्षता के आधार पर अपमानित नहीं किया जाना चाहिए। है। व्यक्ति की पहचान चाहे जो भी हो, उसकी गरिमा और अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। संविधान की मूल भावना के विरोध में जो भी बात होगी, उसका विरोध किया जाना चाहिए। हमारा जीवन, हमारे मूल्य, हमारे अधिकार और हमारी जिम्मेदारियां संविधान से जुड़े हैं। संवैधानिक मूल्यों पर चलते हुए ही बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है। ‘लोकतंत्र में आम लोगों की भागीदारी जरूरी’ कन्हैया कुमार ने सामूहिक सहभागिता का उदाहरण देते हुए कहा कि जब पूरी टीम मिलकर खेलेगी, तभी खेल जीतेगी। यदि लोग खेल में शामिल ही नहीं होंगे तो जीत की संभावना कैसे बनेगी। उन्होंने लोकतंत्र में आम लोगों की भागीदारी को आवश्यक बताया। दरभंगा महाराज और कर्पूरी ठाकुर के योगदान की चर्चा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लोकवार्ता के संयोजक मनीष पासवान ने दरभंगा महाराज द्वारा संस्थानों के निर्माण और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने जननायक कर्पूरी ठाकुर के सामाजिक न्याय और आरक्षण के लिए किए गए प्रयासों को रेखांकित किया। साथ ही गोनू झा जैसे लोक-प्रतीकों का उदाहरण देते हुए मिथिला की लोक-बुद्धि, तर्कशीलता और सवाल करने की परंपरा पर चर्चा की। अनुपमा भारद्वाज ने लोकवार्ता और ‘बिहार बचाएगा लोकतंत्र’ अभियान की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक सवालों के उत्तर तलाशने के लिए लोक की सामूहिक स्मृति, अनुभव और ज्ञान की ओर लौटना जरूरी है। लोकतंत्र केवल संस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के व्यवहार और आपसी संवाद में भी उसकी अभिव्यक्ति होनी चाहिए। साझा संस्कृति और संसाधनों पर जोर इंजीनियर फुलेश्वर सिंह ने बाढ़ प्रबंधन, तालाबों और पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर समुदाय की सहभागिता से जल और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। डॉ. राकेश रंजन ने ‘लोक लाज’ और ‘लोक नियति’ को लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भयमुक्त संवाद को आवश्यक बताया। कहा कि यदि लोग अपनी बात कहने से डरने लगें तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है। दरभंगा महाराज के योगदान की चर्चा प्रो. मुनेश्वर यादव ने मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक विरासत और दरभंगा महाराज के संस्थान निर्माण में योगदान की चर्चा की। उन्होंने वैश्वीकरण के दौर में स्थानीय संस्थाओं, संस्कृति और संसाधनों को मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र को केवल चुनाव, सरकार और संवैधानिक संस्थाओं तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। लोकतांत्रिक मूल्यों को समाज के व्यवहार, संवाद, सहभागिता और सामूहिक जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है। कार्यक्रम में युवाओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की मौजूदगी भी रही।  

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