लखनऊ में गणेश विसर्जन पर मराठी समाज ने निकाली यात्रा:महाराष्ट्र के 65 कलाकार हुए शामिल, भक्त बोले- बप्पा को विदा करने के बाद घंटों होश नहीं रहता

लखनऊ में गणेश विसर्जन पर मराठी समाज ने निकाली यात्रा:महाराष्ट्र के 65 कलाकार हुए शामिल, भक्त बोले- बप्पा को विदा करने के बाद घंटों होश नहीं रहता

लखनऊ में रविवार को बप्पा की प्रतिमाओं की विदाई हुई । गणेश चतुर्थी के 7 वें दिन बड़ी संख्या में लोगों ने मूर्ति विसर्जन किया। गोमती तट स्थित झूलेलाल वाटिका और चौक स्थित गऊ घाट पर भक्तों की भारी भीड़ दिखी। ढोल-नगाड़े के साथ प्रसाद वितरण करते हुए मूर्ति को फूल-मालाओं से सजाए हुए लोगों के झुंड पहुंचता रहा।सबसे विशेष मराठी समाज का विसर्जन रहा। चौक में मराठी समाज के द्वारा स्थापित की गई गणेश प्रतिमा का भव्य विसर्जन हुआ । चौक स्टेडियम से चरक चौराहा , कोनेश्वर मंदिर और रूमी गेट से होते हुए कुड़िया घाट तक शोभा यात्रा निकाली गई । बप्पा चार घोड़ों वाली बग्गी पर सवार थे , भक्त झूम रहे थे। यात्रा में विशेष रूप से मराठी समाज के लोग शामिल हुए। मराठी गानों पर महिलाएं और पुरुष सभी झूमते गाते हुए पूरे रास्ते ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारे लगा रहे थे। 41 सालों हो रही मूर्ति स्थापित उत्तर प्रदेश मराठी समाज के अध्यक्ष उमेश कुमार पाटिल ने बताया कि 41 सालों से लगातार बप्पा कि मूर्ति स्थापित कर रहे हैं। मूर्ति विशेष रूप से महाराष्ट्र से मंगवाई जाती है। उन्होंने बताया कि शोभा यात्रा को भव्य और खास बनाने के लिए महाराष्ट्र से विशेष 65 कलाकार आए हैं जो अपने अद्भुत अंदाज ढोल बजाकर प्रस्तुति दे रहे हैं।उन्होंने बताया कि 7 दिनों के लिए बप्पा को स्थापित करते हैं। ये 7 दिन बहुत खास होते हैं। ‘विसर्जन के बाद कई घंटों तक उदास रहते’ जब तक बप्पा विराजमान रहते हैं हम लोग दुकान नहीं जाते व्यापार पर ध्यान नहीं देते। मगर फिर भी बप्पा की कृपा होती है और इन 7 दिनों में पूरे साल का सबसे अच्छा व्यापार होता है । अभी हम लोग ढोल नगाड़े पर नाचते और गाते हुए बप्पा को विसर्जित करने जा रहे हैं। मगर मूर्ति विसर्जन के बाद तीन-चार घंटे तक हम लोगों को होश नहीं रहता है ऐसा लगता है कि जैसे परिवार के सदस्य हमारे बीच से विदा हो गया। बप्पा जब आते हैं तो सुख शांति लेकर आते हैं और जब जाते हैं तो हम सबको उदास कर जाते हैं।

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