विधायक विनय बिहारी ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए:बोले- ‘कर्जा खाकर विकास कैसे करेंगे’, चुनाव में पैसा बांटने का आरोप

विधायक विनय बिहारी ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए:बोले- ‘कर्जा खाकर विकास कैसे करेंगे’, चुनाव में पैसा बांटने का आरोप

बक्सर में भाजपा विधायक विनय बिहारी ने अपनी ही पार्टी और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय लोगों के बीच पैसे बांटकर वोट लिए गए। अब कर्ज के सहारे विकास की योजनाएं बनाई जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज या आंकड़ा पेश नहीं किया। लौरिया विधानसभा से भाजपा विधायक विनय बिहारी ने कहा कि भगवान श्रीराम से जुड़ी बक्सर भूमि का भी अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। उन्होंने इशारों में बताया कि सरकार के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब पहले विकास के काम हो रहे थे और उनका असर दिख रहा था, तो चुनाव के समय लोगों के खातों में दस-दस हजार रुपये क्यों भेजे गए। ”बहुत ज्यादा बोलने से गर्दन कटती है…” विनय बिहारी ने भोजपुरी अंदाज में कहा, ‘केतना कर्जा खइबअ ऐ राजा, केतना कर्जा खइबअ… कर्जा खा के विकास कइसे करबअ ऐ राजा।’ उन्होंने इस स्थिति को राज्य के विकास के लिए ठीक नहीं बताया। विधायक ने अपने बयान के राजनीतिक असर को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘मैं मीडिया के सामने बोल रहा हूं, इसका क्या नतीजा होगा? कम बोलने से वोट कटता है, ज्यादा बोलने से टिकट कटता है और बहुत ज्यादा बोलने से गर्दन कटती है। पता नहीं मेरे साथ क्या होगा।’ शराबबंदी कानून पर भी उठाया है सवाल उन्होंने कहा कि भाजपा उनके लिए मंदिर के समान है। लेकिन अगर कुछ गलत हो रहा है, तो उसके खिलाफ बोलना उनका धर्म है। उन्होंने यह भी कहा कि गलत चीजों को देखकर चुप रहना उनके संस्कार में नहीं है। विनय बिहारी पहले भी अपनी ही सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। वे शराबबंदी कानून के प्रभावी होने पर सवाल उठा चुके हैं। विधानसभा में अपने क्षेत्र की सड़क का मुद्दा उठाते हुए भी उन्होंने सरकार पर सवाल खड़े किए थे। वर्ष 2017 में सड़क निर्माण की मांग को लेकर उनके अनोखे विरोध की भी चर्चा हुई थी। राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना राजनीतिक तौर पर विनय बिहारी का ताजा बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने सरकार की आलोचना विपक्षी नेता के तौर पर नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के मौजूदा विधायक के रूप में की है। उनके बयान से चुनावी खर्च, सरकारी कर्ज और विकास के लिए वित्तीय संसाधनों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। बक्सर में भाजपा विधायक विनय बिहारी ने अपनी ही पार्टी और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय लोगों के बीच पैसे बांटकर वोट लिए गए। अब कर्ज के सहारे विकास की योजनाएं बनाई जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज या आंकड़ा पेश नहीं किया। लौरिया विधानसभा से भाजपा विधायक विनय बिहारी ने कहा कि भगवान श्रीराम से जुड़ी बक्सर भूमि का भी अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। उन्होंने इशारों में बताया कि सरकार के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब पहले विकास के काम हो रहे थे और उनका असर दिख रहा था, तो चुनाव के समय लोगों के खातों में दस-दस हजार रुपये क्यों भेजे गए। ”बहुत ज्यादा बोलने से गर्दन कटती है…” विनय बिहारी ने भोजपुरी अंदाज में कहा, ‘केतना कर्जा खइबअ ऐ राजा, केतना कर्जा खइबअ… कर्जा खा के विकास कइसे करबअ ऐ राजा।’ उन्होंने इस स्थिति को राज्य के विकास के लिए ठीक नहीं बताया। विधायक ने अपने बयान के राजनीतिक असर को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘मैं मीडिया के सामने बोल रहा हूं, इसका क्या नतीजा होगा? कम बोलने से वोट कटता है, ज्यादा बोलने से टिकट कटता है और बहुत ज्यादा बोलने से गर्दन कटती है। पता नहीं मेरे साथ क्या होगा।’ शराबबंदी कानून पर भी उठाया है सवाल उन्होंने कहा कि भाजपा उनके लिए मंदिर के समान है। लेकिन अगर कुछ गलत हो रहा है, तो उसके खिलाफ बोलना उनका धर्म है। उन्होंने यह भी कहा कि गलत चीजों को देखकर चुप रहना उनके संस्कार में नहीं है। विनय बिहारी पहले भी अपनी ही सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। वे शराबबंदी कानून के प्रभावी होने पर सवाल उठा चुके हैं। विधानसभा में अपने क्षेत्र की सड़क का मुद्दा उठाते हुए भी उन्होंने सरकार पर सवाल खड़े किए थे। वर्ष 2017 में सड़क निर्माण की मांग को लेकर उनके अनोखे विरोध की भी चर्चा हुई थी। राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना राजनीतिक तौर पर विनय बिहारी का ताजा बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने सरकार की आलोचना विपक्षी नेता के तौर पर नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के मौजूदा विधायक के रूप में की है। उनके बयान से चुनावी खर्च, सरकारी कर्ज और विकास के लिए वित्तीय संसाधनों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।  

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