नालंदा साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई:ठगी के 94.41 लाख रुपए कराए गए वापस, पीड़ित को मिली डूबी हुई रकम

नालंदा साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई:ठगी के 94.41 लाख रुपए कराए गए वापस, पीड़ित को मिली डूबी हुई रकम

नालंदा साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। साइबर अपराधियों के चंगुल में फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा चुके एक पीड़ित को पुलिस की तत्परता और तकनीकी दक्षता के चलते 94.41 लाख रुपए वापस मिल गई है। इतनी बड़ी रकम की सुरक्षित बरामदगी साइबर थाना पुलिस की पेशेवर कार्यशैली और डिजिटल साक्ष्यों के सटीक इस्तेमाल का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है। जांच के दौरान पुलिस ने प्राप्त शिकायत और डिजिटल साक्ष्यों को आधार बनाते हुए ठगी की गई रकम के ‘मनी ट्रेल’ की गहन पड़ताल शुरू की। जांच दल ने संदिग्ध बैंक खातों, विभिन्न वॉलेट्स और वित्तीय लेन-देन के पूरे नेटवर्क का बारीकी से सत्यापन किया। जैसे ही मनी ट्रांसफर का सुराग मिला, पुलिस ने बिना किसी विलंब के संबंधित बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों से त्वरित संपर्क साधा। साइबर अपराधियों द्वारा रकम को विभिन्न खातों में निकाले जाने से पहले ही बैंक अधिकारियों के सहयोग से उस संपूर्ण राशि को तत्काल प्रभाव से होल्ड और फ्रीज करा दिया गया। पीड़ित ने जताया आभार खातों के फ्रीज होने के बाद बैंकिंग विवरणों और आवश्यक वैधानिक दस्तावेजों का गहन सत्यापन किया। इसके बाद विधि सम्मत न्यायिक व प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए कुल 94,41,192 रुपए की पूरी राशि सीधे पीड़ित के मूल बैंक खाते में सफलतापूर्वक वापस ट्रांसफर कराई गई। अपनी डूबी हुई पूंजी वापस पाकर पीड़ित ने राहत की सांस ली और पुलिस प्रशासन के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। इस पूरे सफल ऑपरेशन का नेतृत्व अनुसंधानकर्ता दरोगा अबू तालिब अंसारी ने किया। जिन्होंने बैंकों के नोडल अधिकारियों और अन्य विशेष इकाइयों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर इस मिशन को अंजाम तक पहुंचाया। इस बड़ी सफलता के बाद नालंदा पुलिस ने आम नागरिकों से सजग रहने की अपील दोहराई है। लोगों से सावधानी बरतने की अपील साइबर पुलिस ने कहा है कि किसी भी अनजान फोन कॉल, व्हाट्सऐप कॉल, संदेहास्पद एसएमएस या लुभावने ऑनलाइन विज्ञापनों पर भरोसा करने से पहले उनकी सत्यता की जांच अवश्य कर लें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन अथवा नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें। नालंदा साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। साइबर अपराधियों के चंगुल में फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा चुके एक पीड़ित को पुलिस की तत्परता और तकनीकी दक्षता के चलते 94.41 लाख रुपए वापस मिल गई है। इतनी बड़ी रकम की सुरक्षित बरामदगी साइबर थाना पुलिस की पेशेवर कार्यशैली और डिजिटल साक्ष्यों के सटीक इस्तेमाल का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है। जांच के दौरान पुलिस ने प्राप्त शिकायत और डिजिटल साक्ष्यों को आधार बनाते हुए ठगी की गई रकम के ‘मनी ट्रेल’ की गहन पड़ताल शुरू की। जांच दल ने संदिग्ध बैंक खातों, विभिन्न वॉलेट्स और वित्तीय लेन-देन के पूरे नेटवर्क का बारीकी से सत्यापन किया। जैसे ही मनी ट्रांसफर का सुराग मिला, पुलिस ने बिना किसी विलंब के संबंधित बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों से त्वरित संपर्क साधा। साइबर अपराधियों द्वारा रकम को विभिन्न खातों में निकाले जाने से पहले ही बैंक अधिकारियों के सहयोग से उस संपूर्ण राशि को तत्काल प्रभाव से होल्ड और फ्रीज करा दिया गया। पीड़ित ने जताया आभार खातों के फ्रीज होने के बाद बैंकिंग विवरणों और आवश्यक वैधानिक दस्तावेजों का गहन सत्यापन किया। इसके बाद विधि सम्मत न्यायिक व प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए कुल 94,41,192 रुपए की पूरी राशि सीधे पीड़ित के मूल बैंक खाते में सफलतापूर्वक वापस ट्रांसफर कराई गई। अपनी डूबी हुई पूंजी वापस पाकर पीड़ित ने राहत की सांस ली और पुलिस प्रशासन के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। इस पूरे सफल ऑपरेशन का नेतृत्व अनुसंधानकर्ता दरोगा अबू तालिब अंसारी ने किया। जिन्होंने बैंकों के नोडल अधिकारियों और अन्य विशेष इकाइयों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर इस मिशन को अंजाम तक पहुंचाया। इस बड़ी सफलता के बाद नालंदा पुलिस ने आम नागरिकों से सजग रहने की अपील दोहराई है। लोगों से सावधानी बरतने की अपील साइबर पुलिस ने कहा है कि किसी भी अनजान फोन कॉल, व्हाट्सऐप कॉल, संदेहास्पद एसएमएस या लुभावने ऑनलाइन विज्ञापनों पर भरोसा करने से पहले उनकी सत्यता की जांच अवश्य कर लें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन अथवा नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।  

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