पत्रकार Ravi Nair की गिरफ्तारी पर Gujarat High Court ने सरकार और Adani Enterprises को भेजा नोटिस

पत्रकार Ravi Nair की गिरफ्तारी पर Gujarat High Court ने सरकार और Adani Enterprises को भेजा नोटिस

गुजरात उच्च न्यायालय ने पत्रकार रवि नायर की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार और ‘अदाणी एंटरप्राइजेज’ को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति एम. के. ठक्कर की एकल पीठ ने शनिवार को प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सोमवार को सूचीबद्ध किया। गांधीनगर की एक जिला अदालत ने मानहानि के मामले में नायर की दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के दौरान पत्रकार के व्यक्तिगत रूप से पेश न होने पर गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

इसके बाद 17 सितंबर को नायर को गिरफ्तार कर लिया गया। मानसा अदालत ने नायर की कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और खबरों को लेकर ‘अदाणी एंटरप्राइजेज’ की ओर से उनके खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि के मामले में इस साल 10 फरवरी को उन्हें एक साल के कारावास की सजा सुनाई थी। नायर ने गांधीनगर की एक अपीलीय अदालत में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी थी।

अदालत ने इस शर्त पर नौ मार्च को उन्हें जमानत दे दी थी कि वह अपील की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगे। नायर के वकीलों ने कहा कि खराब स्वास्थ्य के कारण पत्रकार तीन सितंबर को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, क्योंकि उन्हें अपने गृह राज्य केरलम से यात्रा करनी थी। वकीलों का दावा है कि अपीलीय अदालत ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट देने की उनकी याचिका खारिज कर दी और बिना किसी पूर्व सूचना के उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया जिस पर 17 सितंबर तक अमल किया जाना था।

अदालत ने नायर को हिरासत में लेने का निर्देश दिया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। उच्च न्यायालय ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष जल्द से जल्द सुनवाई का अनुरोध किए जाने के बाद शनिवार शाम नायर की याचिका पर सुनवाई की। आवेदन में कहा गया था कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 और व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा है।

नायर ने अपने वकील रोनित जॉय और अभिक चिमनी के माध्यम से दाखिल हलफनामे में कहा कि जिला अदालत ने पहले समन या जमानती वारंट जारी किए बिना सीधे गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। उन्होंने दावा किया कि यह एक मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश के विपरीत है। उन्होंने उच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा कि 17 सितंबर को अदालत के समक्ष उपस्थित होने और वारंट रद्द करने का अनुरोध करते हुए आवेदन दायर करने के बावजूद जिला अदालत ने आवेदन खारिज कर दिया तथा उन्हें हिरासत में लेने का आदेश पारित कर दिया।

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