TPC प्रमुख ब्रजेश गंझू का UP में एनकाउंटर:रामनगर में ATS ने मार गिराया, झारखंड सरकार-NIA ने रखा था 30 लाख का इनाम

TPC प्रमुख ब्रजेश गंझू का UP में एनकाउंटर:रामनगर में ATS ने मार गिराया, झारखंड सरकार-NIA ने रखा था 30 लाख का इनाम

झारखंड के कुख्यात नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) का प्रमुख और कमांडर ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह वाराणसी में उत्तर प्रदेश एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारा गया। उस पर झारखंड सरकार और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से कुल 30 लाख रुपए इनाम घोषित था। झारखंड सरकार ने ब्रजेश गंझू पर 25 लाख रुपए और NIA ने पांच लाख रुपए इनाम रखा था। NIA ने करीब आठ साल पहले उसे टेरर फंडिंग मामले में वांटेड घोषित किया था। ब्रजेश चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र का रहने वाला था। झारखंड में लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। पलामू प्रमंडल में TPC से जुड़े नक्सली बीड़ी पत्ता के ठेकेदारों से लेवी वसूलते रहे हैं। वहीं, पड़ोसी चतरा जिले में सीसीएल की आम्रपाली और मगध कोयला परियोजनाओं के शुरू होने के बाद संगठन ने कोयला कारोबार को भी निशाना बनाया। यहां नक्सली दस्ते कोयला खनन में लगी आउटसोर्सिंग और परिवहन कंपनियों से लेवी वसूलते रहे हैं। ब्रजेश गंझू पर व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और ठेकेदारों से वसूली के भी आरोप रहे हैं। रामनगर में घेराबंदी के दौरान हुई मुठभेड़ उत्तर प्रदेश ATS के अनुसार, रविवार सुबह करीब पांच बजे वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र में ब्रजेश गंझू के साथ मुठभेड़ हुई। एटीएस के डीएसपी विपिन राय ने बताया कि सूचना मिली थी कि एक नक्सली रामनगर के रास्ते मुगलसराय की ओर जा रहा है। सूचना के आधार पर एटीएस टीम ने इलाके में घेराबंदी की। इसी दौरान ब्रजेश बाइक से वहां पहुंचा। टीम ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन पकड़े जाने के डर से उसने दोनों हाथों से पिस्टल निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में डीएसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोलियां लगीं। इसके बाद एटीएस टीम ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें ब्रजेश को गोली लगी और वह सड़क पर गिर गया। टीम उसे जिला अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ के दौरान उसका एक साथी मौके से फरार हो गया। एटीएस ने मौके से ब्रजेश के पास से दो पिस्टल, कई जिंदा कारतूस और खोखे बरामद किए हैं। आठ साल पहले हुई थी घर की कुर्की ब्रजेश गंझू लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। करीब आठ साल पहले एनआईए से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में उसे वांटेड घोषित किया गया था। इसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसके घर की कुर्की भी की गई थी। झारखंड में टीपीसी की गतिविधियों में ब्रजेश की अहम भूमिका बताई जाती रही है। संगठन के दस्ते विशेष रूप से चतरा और पलामू प्रमंडल के इलाकों में लेवी वसूली और अन्य आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। चतरा की आम्रपाली और मगध कोयला परियोजनाओं के अलावा परिवहन और आउटसोर्सिंग कारोबार से जुड़े लोगों पर भी संगठन की नजर रही है। ब्रजेश गंझू के मारे जाने को झारखंड में सक्रिय टीएसपीसी के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के लिहाज से अहम माना जा रहा है। एटीएस ने शव को लाल बहादुर शास्त्री पोस्टमार्टम हाउस में रखवाया है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है। झारखंड के कुख्यात नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) का प्रमुख और कमांडर ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह वाराणसी में उत्तर प्रदेश एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारा गया। उस पर झारखंड सरकार और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से कुल 30 लाख रुपए इनाम घोषित था। झारखंड सरकार ने ब्रजेश गंझू पर 25 लाख रुपए और NIA ने पांच लाख रुपए इनाम रखा था। NIA ने करीब आठ साल पहले उसे टेरर फंडिंग मामले में वांटेड घोषित किया था। ब्रजेश चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र का रहने वाला था। झारखंड में लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। पलामू प्रमंडल में TPC से जुड़े नक्सली बीड़ी पत्ता के ठेकेदारों से लेवी वसूलते रहे हैं। वहीं, पड़ोसी चतरा जिले में सीसीएल की आम्रपाली और मगध कोयला परियोजनाओं के शुरू होने के बाद संगठन ने कोयला कारोबार को भी निशाना बनाया। यहां नक्सली दस्ते कोयला खनन में लगी आउटसोर्सिंग और परिवहन कंपनियों से लेवी वसूलते रहे हैं। ब्रजेश गंझू पर व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और ठेकेदारों से वसूली के भी आरोप रहे हैं। रामनगर में घेराबंदी के दौरान हुई मुठभेड़ उत्तर प्रदेश ATS के अनुसार, रविवार सुबह करीब पांच बजे वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र में ब्रजेश गंझू के साथ मुठभेड़ हुई। एटीएस के डीएसपी विपिन राय ने बताया कि सूचना मिली थी कि एक नक्सली रामनगर के रास्ते मुगलसराय की ओर जा रहा है। सूचना के आधार पर एटीएस टीम ने इलाके में घेराबंदी की। इसी दौरान ब्रजेश बाइक से वहां पहुंचा। टीम ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन पकड़े जाने के डर से उसने दोनों हाथों से पिस्टल निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में डीएसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोलियां लगीं। इसके बाद एटीएस टीम ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें ब्रजेश को गोली लगी और वह सड़क पर गिर गया। टीम उसे जिला अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ के दौरान उसका एक साथी मौके से फरार हो गया। एटीएस ने मौके से ब्रजेश के पास से दो पिस्टल, कई जिंदा कारतूस और खोखे बरामद किए हैं। आठ साल पहले हुई थी घर की कुर्की ब्रजेश गंझू लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। करीब आठ साल पहले एनआईए से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में उसे वांटेड घोषित किया गया था। इसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसके घर की कुर्की भी की गई थी। झारखंड में टीपीसी की गतिविधियों में ब्रजेश की अहम भूमिका बताई जाती रही है। संगठन के दस्ते विशेष रूप से चतरा और पलामू प्रमंडल के इलाकों में लेवी वसूली और अन्य आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। चतरा की आम्रपाली और मगध कोयला परियोजनाओं के अलावा परिवहन और आउटसोर्सिंग कारोबार से जुड़े लोगों पर भी संगठन की नजर रही है। ब्रजेश गंझू के मारे जाने को झारखंड में सक्रिय टीएसपीसी के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के लिहाज से अहम माना जा रहा है। एटीएस ने शव को लाल बहादुर शास्त्री पोस्टमार्टम हाउस में रखवाया है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।  

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