भागलपुर के बिहपुर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र के ’61 हजार वाले’ बयान पर महागठबंधन प्रत्याशी रहीं कुमारी अर्पणा ने पलटवार किया है। उन्होंने ‘चमचा’ वाले बयान पर भी मंत्री को घेरा और कहा कि राम गले में रुद्राक्ष से नहीं, बल्कि जुबान और आचरण से दिखते हैं। बाढ़ के बीच मंत्री शैलेंद्र ने विधानसभा चुनाव में 61 हजार वोट पाने वाली अर्पणा को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने पूछा था कि ’61 हजार वाली कहां हैं?’ इसके बाद अर्पणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मंत्री ने भले ही ’61 हजार’ कहकर तंज कसा हो, लेकिन यह संख्या 61 हजार मतदाताओं के भरोसे की है। ‘जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए’ अर्पणा ने आगे कहा, हार-जीत चुनाव का हिस्सा है। लेकिन जिन 61 हजार लोगों ने मुझे वोट दिया, उनके फैसले का मजाक बनाना ठीक नहीं है। सिर्फ मेरा नहीं, ब्लकि सभी वोटरों का अपमान किया गया है। जब बिहपुर की जनता बाढ़ से परेशान है और मदद का इंतजार कर रही है, तब नेताओं को ‘कौन कितने हजार वोट वाला’ की राजनीति से ज्यादा जनता की समस्याओं पर बात करनी चाहिए। अर्पणा ने मंत्री के बयान को लेकर कहा कि चुनाव में किसी को कम या ज्यादा वोट मिलना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन जनता के वोटों की संख्या का मजाक उड़ाना मतदाताओं के सम्मान का सवाल है। उन्होंने खुद को “बिहपुर की बेटी” बताते हुए कहा कि वह जनता के मुद्दे उठाती रहेंगी और किसी बयान से पीछे नहीं हटेंगी। ‘चमचा’ शब्द पर भी गरमाया मामला मामला यहीं नहीं रुका। सामने आए ऑडियो बयान में सांसद के सहयोगी कार्यकर्ताओं के लिए कथित तौर पर ‘चमचा’ शब्द के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं। बयान में कहा गया कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के साथ काम करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल राजनीतिक संवाद की मर्यादा पर सवाल खड़ा करता है। भागलपुर के बिहपुर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र के ’61 हजार वाले’ बयान पर महागठबंधन प्रत्याशी रहीं कुमारी अर्पणा ने पलटवार किया है। उन्होंने ‘चमचा’ वाले बयान पर भी मंत्री को घेरा और कहा कि राम गले में रुद्राक्ष से नहीं, बल्कि जुबान और आचरण से दिखते हैं। बाढ़ के बीच मंत्री शैलेंद्र ने विधानसभा चुनाव में 61 हजार वोट पाने वाली अर्पणा को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने पूछा था कि ’61 हजार वाली कहां हैं?’ इसके बाद अर्पणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मंत्री ने भले ही ’61 हजार’ कहकर तंज कसा हो, लेकिन यह संख्या 61 हजार मतदाताओं के भरोसे की है। ‘जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए’ अर्पणा ने आगे कहा, हार-जीत चुनाव का हिस्सा है। लेकिन जिन 61 हजार लोगों ने मुझे वोट दिया, उनके फैसले का मजाक बनाना ठीक नहीं है। सिर्फ मेरा नहीं, ब्लकि सभी वोटरों का अपमान किया गया है। जब बिहपुर की जनता बाढ़ से परेशान है और मदद का इंतजार कर रही है, तब नेताओं को ‘कौन कितने हजार वोट वाला’ की राजनीति से ज्यादा जनता की समस्याओं पर बात करनी चाहिए। अर्पणा ने मंत्री के बयान को लेकर कहा कि चुनाव में किसी को कम या ज्यादा वोट मिलना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन जनता के वोटों की संख्या का मजाक उड़ाना मतदाताओं के सम्मान का सवाल है। उन्होंने खुद को “बिहपुर की बेटी” बताते हुए कहा कि वह जनता के मुद्दे उठाती रहेंगी और किसी बयान से पीछे नहीं हटेंगी। ‘चमचा’ शब्द पर भी गरमाया मामला मामला यहीं नहीं रुका। सामने आए ऑडियो बयान में सांसद के सहयोगी कार्यकर्ताओं के लिए कथित तौर पर ‘चमचा’ शब्द के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं। बयान में कहा गया कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के साथ काम करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल राजनीतिक संवाद की मर्यादा पर सवाल खड़ा करता है।

