इजराइली सेना को लेकर पिछले कुछ दिनों में वहां के मीडिया में कई रिपोर्ट सामने आई हैं। इनमें सेना के पास कुछ हथियारों और सैनिकों की कमी होने का दावा किया गया है। अखबार मारिव के मुताबिक 3 साल की जंग में इजराइली सेना ने जितना गोला-बारूद इस्तेमाल किया, वह पिछले 30 साल में इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद के बराबर था। इस वजह से बड़ी संख्या में टैंक घिस गए हैं और वे इस्तेमाल के लायल नहीं रह गए हैं। सैनिकों की भी गंभीर कमी है। उनकी छुट्टियां रोक दी गई हैं। वहीं, चैनल 12 ने बताया कि अमेरिकी कंपनी बोइंग से 12 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर की खरीद बजट में कमी की वजह से रुक गई है। इजराइली सेना 3 साल में 5 मोर्चे पर लड़ी अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद इजराइल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके बाद लड़ाई का दायरा गाजा से आगे बढ़ा। इजराइल ने लेबनान और ईरान में भी सैन्य कार्रवाई की। वेस्ट बैंक और सीरिया में भी उसकी सैन्य कार्रवाई जारी रही। इस दौरान सेना को एक से ज्यादा मोर्चों पर टैंक, बख्तरबंद वाहन, गोला-बारूद और दूसरे सैन्य उपकरण लगातार इस्तेमाल करने पड़े। अमेरिका से हर साल हजारों करोड़ की मदद अमेरिका हर साल इजराइल को औसतन 3.8 अरब डॉलर (करीब 29 हजार करोड़ रुपए) की सैन्य मदद देता है। इस मदद से इजराइल अमेरिका से लड़ाकू विमान, हथियार और दूसरे सैन्य उपकरण खरीद सकता है। अमेरिकी संसदीय रिपोर्ट के मुताबिक, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से इजराइल अमेरिका से सबसे ज्यादा कुल विदेशी सहायता पाने वाला देश रहा है। 2023 तक अमेरिका इजराइल को करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए की सैन्य सहायता दे चुका था। ऐसे में सिर्फ हथियारों की खरीद के लिए बजट की परेशानी को देखकर यह कहना मुश्किल है कि इजराइली सेना के पास युद्ध लड़ने के लिए हथियार खत्म हो गए हैं। एक्सपर्ट बोले- इजराइल के हथियार खत्म नहीं हुए, भंडार घटा रक्षा विश्लेषक हमजा अत्तार ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि इजराइली सेना के पास हथियारों की ऐसी कमी नहीं है कि वह युद्ध लड़ने की स्थिति में न हो। उनके मुताबिक, इजराइल आम तौर पर जरूरत से ज्यादा हथियारों का भंडार रखता है। तीन साल की जंग में हथियारों और सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल हुआ है। इसलिए सेना अब खर्च हुए और क्षतिग्रस्त हथियारों की जगह नए हथियार लाकर अपना भंडार फिर से बढ़ाना चाहती है। इसके लिए उसे ज्यादा बजट की जरूरत है। यानी यहां ‘हथियारों की कमी’ का मतलब यह नहीं है कि इजराइल के पास युद्ध लड़ने के लिए हथियार ही नहीं बचे हैं। इसका मतलब यह भी हो सकता है कि सेना अपने हथियारों का भंडार उस स्तर पर बनाए रखना चाहती है, जिसे वह लंबे युद्ध के लिए जरूरी मानती है। अमेरिका-यूरोप पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है अत्तार का एक और तर्क है कि हथियारों की कमी से जुड़ी ये खबरें अमेरिका और यूरोप पर हथियारों की सप्लाई तेज करने का दबाव बनाने का काम भी कर सकती हैं। इजराइल में यह चिंता बढ़ रही है कि अमेरिका में उसके समर्थन को लेकर लोगों की सोच बदल सकती है। ऐसे में इजराइल भविष्य में अमेरिकी नीति में बदलाव होने से पहले हथियारों के सौदों को जल्दी पूरा करना चाहता है। अत्तार ने इसी संदर्भ में अमेरिकी हथियारों की संभावित नई बिक्री की रिपोर्टों का उदाहरण दिया। उनका कहना है कि हथियारों की कमी की खबरें सामने आने से अमेरिका और यूरोप से मिलने वाली सैन्य मदद को जल्द बढ़ाने की जरूरत का संदेश भी जा सकता है। सैनिकों की कमी भी बड़ी समस्या इजराइल में एक ऐसा तबका है, जिसकी आबादी बढ़ रही है, लेकिन सेना में उसकी भागीदारी अब भी बहुत कम है। ये हैं हारेदी यानी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी। तीन साल से चल रही जंग के बीच जब सेना को ज्यादा सैनिकों की जरूरत महसूस हो रही है, तब हारेदी युवाओं की भर्ती सबसे बड़े विवादों में से एक बन गई है। 1948 से मिल रही थी छूट, अब कोर्ट ने कहा- सेना में जाओ इजराइल बनने के बाद से धार्मिक पढ़ाई में पूरी तरह लगे हारेदी पुरुषों को सैन्य सेवा से छूट मिलती रही। उनका तर्क रहा है कि धार्मिक शिक्षा और तोराह का अध्ययन उनके जीवन का मुख्य हिस्सा है। यह व्यवस्था दशकों तक चलती रही। लेकिन 2024 में इजराइल की सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि हारेदी पुरुषों को सेना से सामूहिक छूट देने का कोई कानूनी आधार नहीं है। कोर्ट के फैसले के बाद सेना ने उन्हें भी सामान्य भर्ती प्रक्रिया में शामिल करना शुरू किया। इसके बाद मामला सिर्फ सेना और युवाओं के बीच नहीं रहा। हारेदी धार्मिक नेताओं और उनके समर्थकों ने भर्ती का विरोध किया। कई जगह प्रदर्शन हुए और कुछ युवाओं ने भर्ती नोटिस का जवाब देने से इनकार कर दिया। वजह यह बताई गई कि सेना में जाने से उनकी धार्मिक जीवनशैली और धार्मिक पढ़ाई प्रभावित होगी। 24 हजार नोटिस भेजे, सिर्फ 428 सेना में पहुंचे जुलाई 2025 में इजराइली संसद में सेना ने जो आंकड़े दिए, वे इस विवाद की गंभीरता दिखाते हैं। सेना ने करीब 24 हजार हारेदी युवाओं को भर्ती के नोटिस भेजे थे। इनमें करीब 1,200 भर्ती केंद्र पहुंचे, लेकिन सिर्फ 428 वास्तव में सेना में शामिल हुए। इनमें भी केवल 98 लड़ाकू सैनिक थे। ——————— यह खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- पाकिस्तान ने सऊदी अरब की मदद से इनकार किया हूती विद्रोहियों ने यमन के लाल सागर तट और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। यह इलाका सऊदी अरब के बेहद करीब है। इससे सऊदी की सुरक्षा और व्यापार पर संकट बढ़ गया है। पूरी खबर पढ़ें…
रिपोर्ट- इजराइली सेना में हथियार-सैनिक कम पड़े:3 साल की जंग में टैंक भी घिसे, बोइंग से 12 अपाचे हेलिकॉप्टर की डील भी अटकी

