तेदेपा नेता ज्योत्सना तिरुनागरी ने शनिवार को आरोप लगाया कि तिरुपति लड्डू में कथित मिलावट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निष्कर्षों से पता चलता है कि पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के पांच साल के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर, सुनियोजित और व्यवस्थित तरीके से मिलावट की गई। तिरुनागरी ने हाल में सुकृति फूड्स के कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी के बाद दावा किया कि 2019 से 2024 के बीच तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को 230 करोड़ रुपये मूल्य के मिलावटी घी की आपूर्ति की गई। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “ईडी की जांच से एक बेहद चिंताजनक बात सामने आई है: आरोप है कि 2019 से 2024 के बीच टीटीडी को लगभग 230 करोड़ रुपये के मिलावटी घी की आपूर्ति की गयी।
यह कोई इक्का-दुक्का घटना नहीं थी – इससे पता चलता है कि पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के पांच वर्षों के दौरान बड़े पैमाने पर, बहुत सोच-समझकर और व्यवस्थित तरीके से मिलावट की गई, जिसके लिए पूरी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।”
जांच एजेंसी के अनुसार, दुनिया भर में मशहूर ‘तिरुपति लड्डू’ बनाने में इस्तेमाल होने वाला घी कथित तौर पर रिफाइंड पाम ऑयल, पामोलीन और कई तरह के रसायनों का इस्तेमाल करके बनाया गया था। ईडी ने हाल ही में धन शोधन के आरोपों में घी बनाने वाली कंपनी के प्रवर्तक मंगला को गिरफ्तार किया। मंगला को ईडी ने 17 सितंबर को तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) में घी में मिलावट के कथित मामले में हिरासत में लिया था।
ईडी ने दावा किया कि उसकी जांच में यह पाया गया कि मिलावटी घी (जिसका इस्तेमाल तिरुपति लड्डू प्रसाद बनाने में किया जाता था) रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल तेल, पामोलीन और कई अन्य रसायनों का इस्तेमाल करके बनाया गया था। एजेंसी ने बताया कि 2019 से 2024 के बीच, पांच वर्षों में “धोखाधड़ी” से आपूर्ति किए गए घी की कीमत 230 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 96 करोड़ रुपये का मिलावटी घी कथित तौर पर मंगला ने तैयार किया था।

