संतोष सुमन बोले-आरक्षण की समीक्षा का मतलब खत्म करना नहीं:डेटा से देखें किसे कितना लाभ मिला; बेगूसराय में की SC-ST में वर्गीकरण की बातें कही

संतोष सुमन बोले-आरक्षण की समीक्षा का मतलब खत्म करना नहीं:डेटा से देखें किसे कितना लाभ मिला; बेगूसराय में की SC-ST में वर्गीकरण की बातें कही

बेगूसराय के कंकौल स्थित प्रेक्षागृह में शनिवार को हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) की ओर से गरीब चौपाल यात्रा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष पियूष कुमार ने की। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने नेताओं के समर्थन में नारेबाजी भी की। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आरक्षण का सबसे बड़ा आधार सामाजिक आधार है। आज भी समाज में छुआछूत, अंधविश्वास, शैक्षणिक पिछड़ापन और गरीबी जैसी समस्याएं मौजूद हैं। जब तक समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को बराबरी का दर्जा नहीं मिलता, तब तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी। बोले- समीक्षा का मतलब आरक्षण खत्म करना नहीं आरक्षण की समीक्षा के सवाल पर संतोष सुमन ने कहा कि लोग ‘समीक्षा’ शब्द से डर जाते हैं, जबकि डरने की जरूरत नहीं है। समीक्षा का मतलब आरक्षण खत्म करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार करना है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के आधार पर यह देखना जरूरी है कि इतने वर्षों में किन-किन जातियों को आरक्षण का लाभ मिला और कौन से वंचित समाज अब भी इससे पीछे रह गए हैं। SC-ST में भी कई जातियां अब तक पीछे मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भीतर भी कई ऐसी जातियां हैं, जो आज भी अपना आवेदन तक ठीक से नहीं लिख पाती हैं और जिनके बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए वर्गीकरण (Categorization), रोटेशन सिस्टम (Rotation System) या सभी के लिए समान शिक्षा व्यवस्था (Equal Education System) जैसे विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए। गरीबों और सभी वर्गों की बात करने का दावा संतोष सुमन ने कहा कि हम पार्टी सिर्फ किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि हर समाज के गरीब, पिछड़ा, अति-पिछड़ा, अल्पसंख्यक और सवर्ण वर्ग के गरीब लोगों की बात करती है। उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी जब मुख्यमंत्री थे, तब अपनी अंतिम कैबिनेट में सवर्ण गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण (EWS) का एजेंडा पास किया था। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह व्यवस्था देश और राज्य में लागू हुई। बोले- आरक्षण की वजह से आज इस मुकाम पर हैं मंत्री ने कहा कि जीतन राम मांझी और वह खुद आज जिस मुकाम पर हैं, उसमें आरक्षण की भी भूमिका है। उन्होंने कहा कि आरक्षण उनके लिए एक बहुत महत्वपूर्ण व्यवस्था है, इसलिए इसके विरोध का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि जो वर्ग आरक्षण का लाभ लेकर आगे बढ़ चुके हैं, वे अपने ही समाज के उन गरीब और पीछे छूटे लोगों के बारे में भी सोचें, ताकि सभी का समान विकास हो सके। बेगूसराय के कंकौल स्थित प्रेक्षागृह में शनिवार को हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) की ओर से गरीब चौपाल यात्रा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष पियूष कुमार ने की। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने नेताओं के समर्थन में नारेबाजी भी की। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आरक्षण का सबसे बड़ा आधार सामाजिक आधार है। आज भी समाज में छुआछूत, अंधविश्वास, शैक्षणिक पिछड़ापन और गरीबी जैसी समस्याएं मौजूद हैं। जब तक समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को बराबरी का दर्जा नहीं मिलता, तब तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी। बोले- समीक्षा का मतलब आरक्षण खत्म करना नहीं आरक्षण की समीक्षा के सवाल पर संतोष सुमन ने कहा कि लोग ‘समीक्षा’ शब्द से डर जाते हैं, जबकि डरने की जरूरत नहीं है। समीक्षा का मतलब आरक्षण खत्म करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार करना है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के आधार पर यह देखना जरूरी है कि इतने वर्षों में किन-किन जातियों को आरक्षण का लाभ मिला और कौन से वंचित समाज अब भी इससे पीछे रह गए हैं। SC-ST में भी कई जातियां अब तक पीछे मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भीतर भी कई ऐसी जातियां हैं, जो आज भी अपना आवेदन तक ठीक से नहीं लिख पाती हैं और जिनके बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए वर्गीकरण (Categorization), रोटेशन सिस्टम (Rotation System) या सभी के लिए समान शिक्षा व्यवस्था (Equal Education System) जैसे विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए। गरीबों और सभी वर्गों की बात करने का दावा संतोष सुमन ने कहा कि हम पार्टी सिर्फ किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि हर समाज के गरीब, पिछड़ा, अति-पिछड़ा, अल्पसंख्यक और सवर्ण वर्ग के गरीब लोगों की बात करती है। उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी जब मुख्यमंत्री थे, तब अपनी अंतिम कैबिनेट में सवर्ण गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण (EWS) का एजेंडा पास किया था। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह व्यवस्था देश और राज्य में लागू हुई। बोले- आरक्षण की वजह से आज इस मुकाम पर हैं मंत्री ने कहा कि जीतन राम मांझी और वह खुद आज जिस मुकाम पर हैं, उसमें आरक्षण की भी भूमिका है। उन्होंने कहा कि आरक्षण उनके लिए एक बहुत महत्वपूर्ण व्यवस्था है, इसलिए इसके विरोध का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि जो वर्ग आरक्षण का लाभ लेकर आगे बढ़ चुके हैं, वे अपने ही समाज के उन गरीब और पीछे छूटे लोगों के बारे में भी सोचें, ताकि सभी का समान विकास हो सके।  

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