पश्चिम चंपारण के मझौलिया प्रखंड के माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित चार दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों, युवाओं और अन्य इच्छुक लोगों को कम लागत में स्वरोजगार से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए मशरूम उत्पादन की तकनीकी जानकारी देना था। 55 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम में करीब 55 लोगों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र के साथ मशरूम के बीज भी दिए गए, ताकि वे प्रशिक्षण में सीखी तकनीक का इस्तेमाल कर अपने स्तर पर उत्पादन शुरू कर सकें। वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन की जानकारी कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के अभिषेक प्रताप सिंह ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन कम लागत में स्वरोजगार शुरू करने का एक विकल्प बन सकता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी दी गई। तापमान और नमी प्रबंधन पर जोर प्रशिक्षण में मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी सामान, उत्पादन की प्रक्रिया, रखरखाव, तापमान और नमी का प्रबंधन, फसल की देखभाल समेत अन्य जरूरी तकनीकी पहलुओं के बारे में बताया गया। तैयार मशरूम को बाजार तक पहुंचाने और उसकी बिक्री से जुड़ी जानकारी भी दी गई। घर से शुरू किया जा सकता है कारोबार अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद इच्छुक लोग घर या छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू कर सकते हैं। इससे परिवार की आमदनी बढ़ाने के साथ दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण का उद्देश्य गांव के युवाओं, किसानों और अन्य इच्छुक लोगों को खेती आधारित स्वरोजगार से जोड़ना है। मशरूम उत्पादन की खासियत यह है कि इसके लिए कम जगह में भी उत्पादन शुरू किया जा सकता है। प्रमाण पत्र और मशरूम के बीज मिलने के बाद प्रतिभागियों में स्वरोजगार शुरू करने को लेकर उत्साह दिखा। पश्चिम चंपारण के मझौलिया प्रखंड के माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित चार दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों, युवाओं और अन्य इच्छुक लोगों को कम लागत में स्वरोजगार से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए मशरूम उत्पादन की तकनीकी जानकारी देना था। 55 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम में करीब 55 लोगों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र के साथ मशरूम के बीज भी दिए गए, ताकि वे प्रशिक्षण में सीखी तकनीक का इस्तेमाल कर अपने स्तर पर उत्पादन शुरू कर सकें। वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन की जानकारी कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के अभिषेक प्रताप सिंह ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। उन्होंने बताया कि मशरूम उत्पादन कम लागत में स्वरोजगार शुरू करने का एक विकल्प बन सकता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी दी गई। तापमान और नमी प्रबंधन पर जोर प्रशिक्षण में मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी सामान, उत्पादन की प्रक्रिया, रखरखाव, तापमान और नमी का प्रबंधन, फसल की देखभाल समेत अन्य जरूरी तकनीकी पहलुओं के बारे में बताया गया। तैयार मशरूम को बाजार तक पहुंचाने और उसकी बिक्री से जुड़ी जानकारी भी दी गई। घर से शुरू किया जा सकता है कारोबार अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद इच्छुक लोग घर या छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू कर सकते हैं। इससे परिवार की आमदनी बढ़ाने के साथ दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण का उद्देश्य गांव के युवाओं, किसानों और अन्य इच्छुक लोगों को खेती आधारित स्वरोजगार से जोड़ना है। मशरूम उत्पादन की खासियत यह है कि इसके लिए कम जगह में भी उत्पादन शुरू किया जा सकता है। प्रमाण पत्र और मशरूम के बीज मिलने के बाद प्रतिभागियों में स्वरोजगार शुरू करने को लेकर उत्साह दिखा।

