राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन से जुड़े मामलों में लापरवाही और अनियमितता के आरोप में तीन अधिकारियों/कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। मंत्री के समक्ष प्रस्तुत की गई संचिका में तीन मामलों में दिए गए दंड और अनुमोदित आरोपों की जानकारी दी गई है। इनमें एक अंचल अधिकारी को 20 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। वहीं दो अन्य राजस्व अधिकारियों पर नामांतरण (म्यूटेशन) से जुड़े मामलों में गलत रिपोर्ट और आदेश की अनदेखी करने का आरोप है। 20 हजार रुपए रिश्वत लेते अंचल अधिकारी गिरफ्तार बांका के चांदन के अंचल अधिकारी रविकांत कुमार को 20 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। दस्तावेज में उनके खिलाफ रिश्वत लेने का आरोप दर्ज है। गिरफ्तारी के बाद विभाग ने उन्हें गिरफ्तारी की तारीख से निलंबित कर दिया है। गलत रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण वाद खारिज करने का आरोप अररिया के नरपतगंज के राजस्व अधिकारी रामउदगार चौपाल पर नामांतरण वाद संख्या 1693/25-26 में गलत और भ्रामक रिपोर्ट के आधार पर मामला अस्वीकृत करने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि नामांतरण से जुड़े इस मामले में सही तरीके से जांच और रिपोर्ट के बजाय गलत और भ्रामक प्रतिवेदन के आधार पर फैसला लिया गया। इस मामले में विभाग ने संचयी प्रभाव के बिना दो वेतनवृद्धियों पर रोक लगाने का दंड निर्धारित किया है। यानी अधिकारी की दो वेतनवृद्धियां रोकी जाएंगी, लेकिन इसका असर आगे की वेतनवृद्धि पर स्थायी रूप से नहीं पड़ेगा। पुराने राजस्व मामले में आदेश की अनदेखी का आरोप बांका के धोरैया के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी और बाद में सारण के लहलादपुर के अंचल अधिकारी रहे जयशंकर प्रसाद पर भी कार्रवाई की गई है। वे अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन पर नामांतरण रिवीजन वाद संख्या 66/99-2000 में पारित आदेश की अनदेखी करने का आरोप है। दस्तावेज के अनुसार, विक्रेता के नाम से जमाबंदी कायम नहीं रहने के बावजूद नामांतरण के लिए अनुशंसा की गई। विभाग ने इसे पुराने आदेश की अवहेलना मानते हुए कार्रवाई की है। सेवानिवृत्त होने के बाद उन पर 5 वर्षों तक 15 प्रतिशत पेंशन की कटौती का दंड लगाया गया है। तीनों मामलों में अलग-अलग कार्रवाई विभाग की ओर से सामने आए विवरण के अनुसार तीनों मामलों में कार्रवाई का आधार अलग है। रविकांत कुमार पर रिश्वत लेने का मामला है और गिरफ्तारी के बाद उन्हें निलंबित किया गया। रामउदगार चौपाल पर गलत और भ्रामक रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण वाद अस्वीकृत करने का आरोप है, जबकि जयशंकर प्रसाद पर पुराने आदेश की अनदेखी कर नामांतरण की अनुशंसा करने का आरोप है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन से जुड़े मामलों में लापरवाही और अनियमितता के आरोप में तीन अधिकारियों/कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। मंत्री के समक्ष प्रस्तुत की गई संचिका में तीन मामलों में दिए गए दंड और अनुमोदित आरोपों की जानकारी दी गई है। इनमें एक अंचल अधिकारी को 20 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। वहीं दो अन्य राजस्व अधिकारियों पर नामांतरण (म्यूटेशन) से जुड़े मामलों में गलत रिपोर्ट और आदेश की अनदेखी करने का आरोप है। 20 हजार रुपए रिश्वत लेते अंचल अधिकारी गिरफ्तार बांका के चांदन के अंचल अधिकारी रविकांत कुमार को 20 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। दस्तावेज में उनके खिलाफ रिश्वत लेने का आरोप दर्ज है। गिरफ्तारी के बाद विभाग ने उन्हें गिरफ्तारी की तारीख से निलंबित कर दिया है। गलत रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण वाद खारिज करने का आरोप अररिया के नरपतगंज के राजस्व अधिकारी रामउदगार चौपाल पर नामांतरण वाद संख्या 1693/25-26 में गलत और भ्रामक रिपोर्ट के आधार पर मामला अस्वीकृत करने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि नामांतरण से जुड़े इस मामले में सही तरीके से जांच और रिपोर्ट के बजाय गलत और भ्रामक प्रतिवेदन के आधार पर फैसला लिया गया। इस मामले में विभाग ने संचयी प्रभाव के बिना दो वेतनवृद्धियों पर रोक लगाने का दंड निर्धारित किया है। यानी अधिकारी की दो वेतनवृद्धियां रोकी जाएंगी, लेकिन इसका असर आगे की वेतनवृद्धि पर स्थायी रूप से नहीं पड़ेगा। पुराने राजस्व मामले में आदेश की अनदेखी का आरोप बांका के धोरैया के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी और बाद में सारण के लहलादपुर के अंचल अधिकारी रहे जयशंकर प्रसाद पर भी कार्रवाई की गई है। वे अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन पर नामांतरण रिवीजन वाद संख्या 66/99-2000 में पारित आदेश की अनदेखी करने का आरोप है। दस्तावेज के अनुसार, विक्रेता के नाम से जमाबंदी कायम नहीं रहने के बावजूद नामांतरण के लिए अनुशंसा की गई। विभाग ने इसे पुराने आदेश की अवहेलना मानते हुए कार्रवाई की है। सेवानिवृत्त होने के बाद उन पर 5 वर्षों तक 15 प्रतिशत पेंशन की कटौती का दंड लगाया गया है। तीनों मामलों में अलग-अलग कार्रवाई विभाग की ओर से सामने आए विवरण के अनुसार तीनों मामलों में कार्रवाई का आधार अलग है। रविकांत कुमार पर रिश्वत लेने का मामला है और गिरफ्तारी के बाद उन्हें निलंबित किया गया। रामउदगार चौपाल पर गलत और भ्रामक रिपोर्ट के आधार पर नामांतरण वाद अस्वीकृत करने का आरोप है, जबकि जयशंकर प्रसाद पर पुराने आदेश की अनदेखी कर नामांतरण की अनुशंसा करने का आरोप है।

