स्टेम सेल थेरेपी पर स्वास्थ्य मंत्रालय की सख्ती

स्टेम सेल थेरेपी पर स्वास्थ्य मंत्रालय की सख्ती

नई दिल्ली। स्टेम सेल थेरेपी के बढ़ते इस्तेमाल और अप्रमाणित उपचारों पर केंद्र सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया है कि स्टेम सेल थेरेपी को नियमित स्टैंडर्ड केयर के तौर पर केवल उन्हीं बीमारियों और चिकित्सा संकेतों में दिया जा सकेगा, जिन्हें मंत्रालय ने मंजूरी दी है।

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) के मामले में किसी भी प्रकार की स्टेम सेल का चिकित्सकीय इस्तेमाल केवल विधिवत मंजूर क्लिनिकल ट्रायल में ही किया जा सकेगा। इसके लिए 2017 की आईसीएमआर-डीबीटी नेशनल गाइडलाइंस और समय-समय पर जारी सरकारी निर्देशों का पालन जरूरी होगा। एएसडी के लिए अप्रमाणित स्टेम सेल उपचार को नियमित, मानक या व्यावसायिक क्लिनिकल सेवा के रूप में पेश नहीं किया जा सकेगा।

मंत्रालय की यह एडवाइजरी सुप्रीम कोर्ट के 30 जनवरी 2026 के यश चैरिटेबल ट्रस्ट बनाम भारत संघ मामले के फैसले के बाद आई है। राज्यों से कहा गया है कि अदालत के निर्देशों को सभी संबंधित नियामक प्राधिकरणों और सरकारी-निजी क्लिनिकल प्रतिष्ठानों तक पहुंचाकर सख्ती से लागू कराएं।

उल्लंघन पर कार्रवाई

  • मंजूर संकेतों के बाहर स्टेम सेल थेरेपी को स्टैंडर्ड केयर के रूप में नहीं दिया जा सकेगा।
  • एएसडी में स्टेम सेल उपचार केवल मंजूर क्लिनिकल ट्रायल में।
  • बिना मंजूरी उपचार का प्रचार या विज्ञापन भी कार्रवाई के दायरे में।
  • सुप्रीम कोर्ट के अनुसार उल्लंघन पर पेशेवर कदाचार की कार्रवाई संभव।
  • क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट का पंजीकरण रद्द और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

एनएमसी ने भी दोहराए नियम

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने 5 सितंबर की एडवाइजरी में कहा कि स्टेम सेल थेरेपी केवल मंजूर संकेतों में ही मानक चिकित्सा सेवा के तौर पर दी जा सकती है। मंजूर संकेतों से बाहर इसका अनधिकृत इस्तेमाल, प्रिस्क्रिप्शन, प्रचार या विज्ञापन पेशेवर कदाचार माना जाएगा। राज्य मेडिकल काउंसिलों को शिकायतों की जांच कर दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *