पटना में सर्दियों में आश्रय स्थलों पर नहीं जलेंगे अलाव:ठंड से बचाव के लिए हीटर-ब्लोअर पर फोकस, गिग वर्कर्स के एसी लाउंज होंगे विंटर-रेडी

पटना में सर्दियों में आश्रय स्थलों पर नहीं जलेंगे अलाव:ठंड से बचाव के लिए हीटर-ब्लोअर पर फोकस, गिग वर्कर्स के एसी लाउंज होंगे विंटर-रेडी

पटना में ठंड में अलाव नहीं जलेंगे। ठंड से बचाने के लिए हीटर और ब्लोअर की संख्या बढ़ाई जाएगी। पटना नगर निगम ने सर्दियों में जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचाने के लिए आश्रय स्थलों पर हीटर-ब्लोअर बढ़ाने का निर्णय लिया है। वहीं, खुले में अलाव जलाने की जरूरत कम करने के साथ गिग वर्कर्स के एसी लाउंज को भी विंटर-रेडी बनाया जाएगा। दरअसल, वायु प्रदूषण एक्शन ग्रुप के विशेषज्ञ और नगर निगम के संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि ठंड के मौसम में आश्रय स्थलों के आस-पास अलाव जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। हाल ही में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में पटना नगर निगम ने पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। पटना को 16वां स्थान मिला है। पिछले साल पटना 27वें स्थान पर था। इसलिए निगम इस रिपोर्ट पर विचार कर रहा है। अलाव से PM2.5 बढ़ने की रिपोर्ट नगर निगम ने एयर पॉल्यूशन एक्शन ग्रुप (A-PAG) के सहयोग से ‘बियोंड द बोनफायर्स: रिथिंकिंग विंटर हीटिंग फॉर वलनरेबल पॉपुलेशंस ऑफ पटना’ नाम से अध्ययन कराया है। अध्ययन में आवासहीन लोगों, स्ट्रीट वेंडर्स, रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों, यात्रियों और बस्तियों में रहने वाले लोगों से बातचीत की गई। आश्रय स्थलों, स्लम क्षेत्रों और बस स्टैंडों का भी जायजा लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, खुले में अलाव जलाने से आसपास PM2.5 का स्तर करीब 18 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इससे कमजोर और संवेदनशील आबादी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी कारण निगम ने अलाव के विकल्प के रूप में आश्रय स्थलों पर हीटिंग की बेहतर व्यवस्था करने की तैयारी शुरू की है।
गिग वर्कर्स के लिए बढ़ेंगे विंटर-रेडी लाउंज पटना में गिग वर्कर्स के लिए फिलहाल 2 स्थानों पर एसी लाउंज की सुविधा उपलब्ध है। नगर निगम इन्हें सर्दियों के अनुकूल बनाने की योजना पर काम कर रहा है। जरूरत के अनुसार एसी लाउंज की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। निगम का मानना है कि सुरक्षित और सुविधायुक्त स्थान मिलने से सड़क किनारे ठंड से बचने के लिए अलाव जलाने की जरूरत कम हो सकती है। 18 आश्रय स्थलों पर बढ़ेंगी ठंड से बचाव की सुविधाएं नगर आयुक्त यशपाल मीणा के अनुसार, पटना नगर निगम क्षेत्र में कुल 18 आश्रय स्थल हैं। इनमें 6 स्थायी आश्रय स्थल, 12 जर्मन हैंगर और 8 स्थानों पर टेंट लगाए जाते हैं। सर्दियों में इन सभी जगहों पर जरूरतमंदों के लिए कुल 955 बेड उपलब्ध रहते हैं। आश्रय स्थलों पर पेयजल, शौचालय, बिस्तर और कंबल जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। इस बार ठंड से बचाव के लिए हीटर और ब्लोअर की संख्या बढ़ाई जाएगी। निगम का प्रयास है कि लोगों को पर्याप्त गर्माहट मिले और खुले में अलाव जलाने की आवश्यकता कम हो। पटना में ठंड में अलाव नहीं जलेंगे। ठंड से बचाने के लिए हीटर और ब्लोअर की संख्या बढ़ाई जाएगी। पटना नगर निगम ने सर्दियों में जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचाने के लिए आश्रय स्थलों पर हीटर-ब्लोअर बढ़ाने का निर्णय लिया है। वहीं, खुले में अलाव जलाने की जरूरत कम करने के साथ गिग वर्कर्स के एसी लाउंज को भी विंटर-रेडी बनाया जाएगा। दरअसल, वायु प्रदूषण एक्शन ग्रुप के विशेषज्ञ और नगर निगम के संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि ठंड के मौसम में आश्रय स्थलों के आस-पास अलाव जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। हाल ही में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में पटना नगर निगम ने पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। पटना को 16वां स्थान मिला है। पिछले साल पटना 27वें स्थान पर था। इसलिए निगम इस रिपोर्ट पर विचार कर रहा है। अलाव से PM2.5 बढ़ने की रिपोर्ट नगर निगम ने एयर पॉल्यूशन एक्शन ग्रुप (A-PAG) के सहयोग से ‘बियोंड द बोनफायर्स: रिथिंकिंग विंटर हीटिंग फॉर वलनरेबल पॉपुलेशंस ऑफ पटना’ नाम से अध्ययन कराया है। अध्ययन में आवासहीन लोगों, स्ट्रीट वेंडर्स, रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों, यात्रियों और बस्तियों में रहने वाले लोगों से बातचीत की गई। आश्रय स्थलों, स्लम क्षेत्रों और बस स्टैंडों का भी जायजा लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, खुले में अलाव जलाने से आसपास PM2.5 का स्तर करीब 18 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इससे कमजोर और संवेदनशील आबादी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी कारण निगम ने अलाव के विकल्प के रूप में आश्रय स्थलों पर हीटिंग की बेहतर व्यवस्था करने की तैयारी शुरू की है।
गिग वर्कर्स के लिए बढ़ेंगे विंटर-रेडी लाउंज पटना में गिग वर्कर्स के लिए फिलहाल 2 स्थानों पर एसी लाउंज की सुविधा उपलब्ध है। नगर निगम इन्हें सर्दियों के अनुकूल बनाने की योजना पर काम कर रहा है। जरूरत के अनुसार एसी लाउंज की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। निगम का मानना है कि सुरक्षित और सुविधायुक्त स्थान मिलने से सड़क किनारे ठंड से बचने के लिए अलाव जलाने की जरूरत कम हो सकती है। 18 आश्रय स्थलों पर बढ़ेंगी ठंड से बचाव की सुविधाएं नगर आयुक्त यशपाल मीणा के अनुसार, पटना नगर निगम क्षेत्र में कुल 18 आश्रय स्थल हैं। इनमें 6 स्थायी आश्रय स्थल, 12 जर्मन हैंगर और 8 स्थानों पर टेंट लगाए जाते हैं। सर्दियों में इन सभी जगहों पर जरूरतमंदों के लिए कुल 955 बेड उपलब्ध रहते हैं। आश्रय स्थलों पर पेयजल, शौचालय, बिस्तर और कंबल जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। इस बार ठंड से बचाव के लिए हीटर और ब्लोअर की संख्या बढ़ाई जाएगी। निगम का प्रयास है कि लोगों को पर्याप्त गर्माहट मिले और खुले में अलाव जलाने की आवश्यकता कम हो।  

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