DUSU Elections: छात्र संगठनों की भागीदारी के खिलाफ दायर याचिका Delhi High Court में खारिज

DUSU Elections: छात्र संगठनों की भागीदारी के खिलाफ दायर याचिका Delhi High Court में खारिज

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को राजनीतिक दलों के नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) जैसे छात्र संगठनों से जुड़े उम्मीदवारों के आगामी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनावों में भाग लेने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि हालांकि दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के अधिकारियों और उसके मुख्य चुनाव अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि चुनाव किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति की भागीदारी या हस्तक्षेप से मुक्त हों, लेकिन एक छात्र संगठन को उसके राजनीतिक दल से ‘‘अलग’’ माना जाना चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों के सदस्यों को डूसू चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि उच्चतम न्यायालय और केंद्र द्वारा स्वीकार की गई लिंगदोह समिति की रिपोर्ट के तहत चुनावों में राजनीतिक दलों की भागीदारी प्रतिबंधित है।

पीठ ने कहा, ‘‘जो प्रतिबंधित है, वह छात्र चुनाव प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की संलिप्तता है। जिन छात्र संगठनों ने उम्मीदवारों की संबद्धता के संबंध में कुछ घोषणाएं की हैं… उन्हें राजनीतिक दल नहीं कहा जा सकता।’’
पीठ ने कहा, ‘‘केवल इसलिए कि कोई (उम्मीदवार) किसी राजनीतिक दल की छात्र इकाई का सदस्य है, इसका मतलब यह नहीं होगा कि वह उस राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ है। इसलिए, यह लिंगदोह समिति का उल्लंघन नहीं होगा।’’
डूसू चुनाव 18 सितंबर को होने हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि लिंगदोह समिति की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से किसी ऐसे व्यक्ति की भागीदारी पर रोक लगाती है जो वास्तविक छात्र नहीं है और छात्र चुनावों के साथ राजनीतिक दलों के जुड़ाव पर भी रोक लगाती है। पीठ ने डूसू चुनावों में राजनीतिक दलों की भागीदारी और प्रभाव के प्रति आगाह किया और डीयू अधिकारियों से आम आदमी पार्टी (आप) के छात्र संगठन के एक उम्मीदवार द्वारा कथित रूप से पार्टी का नाम और उसका चुनाव चिह्न प्रदर्शित करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट का संज्ञान लेने को कहा। अदालत ने कहा कि इस तरह की गतिविधि पर अधिकारियों और मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा लगाम लगाई जानी चाहिए।

दिल्ली विश्वविद्यालय के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह केवल अपने छात्रों की उम्मीदवारी स्वीकार करता है और किसी भी छात्र संगठन या राजनीतिक दल को इसमें शामिल नहीं करता है। दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा द्वारा दायर जनहित याचिका में डूसू चुनावों की घोषणा करने और चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के नामों की छंटनी करने वाले मुख्य चुनाव अधिकारी के 11 सितंबर और 13 अगस्त के नोटिस को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने 13 अगस्त के चुनाव अधिसूचना नोटिस को इस आधार पर चुनौती दी थी कि इसमें आचार संहिता, लिंगदोह समिति की सिफारिशों और अन्य प्रासंगिक शासी मानदंडों का उल्लेख नहीं था।

अदालत ने इस नोटिस में हस्तक्षेप करने से भी यह कहते हुए इनकार कर दिया कि इस तरह के सभी प्रकाशन वेबसाइट पर उपलब्ध बताए गए हैं। याचिकाकर्ता विजेता ने अपनी याचिका में इस बात पर जोर दिया था कि लिंगदोह समिति द्वारा छात्र संघों को राजनीतिक दलों से अलग करने की सिफारिश के बावजूद, एसएफआई-आइसा गठबंधन, आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित विभिन्न डूसू पदों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। याचिका में दावा किया गया है, ‘‘दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा के रूप में, याचिकाकर्ता ने खुद देखा है कि कैसे राजनीतिक दल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र संघ चुनावों के दौरान विश्वविद्यालय परिसर के शैक्षणिक माहौल को राजनीतिक माहौल में बदल रहे हैं।

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