BHIM को आगे बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने खर्च किए हजारों करोड़, फिर भी रहा सबसे पीछे

BHIM को आगे बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने खर्च किए हजारों करोड़, फिर भी रहा सबसे पीछे

यूपीआई के जरिए 2000 रुपये से ज्यादा भुगतान पाने वाले मर्चेंट को 15 अक्तूबर से 0.4 फीसदी का चार्ज देना होगा। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इसे ‘यूपीआई टैक्स’ बता कर सरकार से वापस लेने की मांग की है, लेकिन इस मामले में एक बड़े मुद्दे को नजरअंदाज किया जा रहा है। वह मुद्दा है कि यूपीआई बिजनेस से देसी ऐप एक तरह से बाहर क्यों हैं? सरकार खुद अपने ऐप के लिए इस बाजार में जगह क्यों नहीं बनवा पाई?इनके बाद आए विदेशी ऐप का लगभग पूरे बाजार पर कब्जा कैसे हो गया? देसी ऐप की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोई ठोस योजना है क्या?

यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस या यूपीआई के जरिए पैसों का लेन-देन अब बहुत आम हो गया है। एनसीपीआई का आंकड़ा बताता है कि अगस्त 2026 में करीब 55 करोड़ लोगों ने यूपीआई के जरिए 24.5 अरब ट्रैंज़ैक्शन किए और 29,823 अरब रुपए का लेन-देन किया। इसमें से करीब 80 फीसदी रकम का लेन-देन सिर्फ दो यूपीआई ऐप (फोनपे और गूगलपे) के जरिए हुआ। ये दोनों ही ऐप विदेशी हैं। फोनपे वालमार्ट का और गूगलपे अल्फ़ाबेट का है।

बाद में आया, फिर भी छा गया

PhonePe (फोनपे) ऐप 2016 में लाइव हुआ और आते ही छा गया था। अगले साल ही इसके एक करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हो गए और इसके जरिए एक दिन में दस लाख ट्रैंज़ैक्शन का आंकड़ा छू लिया गया। गूगल पे या जी पे 2017 में आया और इसने भी भारतीय बाजार में जबरदस्त हिस्सेदारी बनाई। लेकिन, पेटीएम, भारतपे और भीम ऐप जैसे देसी प्लैटफॉर्म आज भी इनसे काफी पीछे हैं। जबकि, ये बाजार में पहले से मौजूद हैं। इनके बाद (2018 में) आए भारतपे की तो बात ही छोड़ देते हैं।

यूपीआई ऐप (UPI App) संख्या के हिसाब से कितना ट्रैंज़ैक्शन (वॉल्यूम शेयर %) रकम के हिसाब से कितना ट्रैंज़ैक्शन (वैल्यू शेयर %)
फोनपे (PhonePe) 45.68% 48.61%
गूगल पे (Google Pay) 33.31% 33.77%
पेटीएम (Paytm) 7.65% 6.42%
सुपर.मनी (Super.money) 3.27% 0.44%
नावी (Navi) 1.65% 1.34%
क्रेड (CRED) 0.72% 2.08%
भीम (BHIM) 0.79% 0.78%
फैमऐप बाय ट्रियो (FamApp by Trio) 0.74% 0.74%
एक्सिस बैंक एप्स (Axis Bank Apps) 0.70% 0.47%
व्हाट्सएप पे (WhatsApp Pay) 0.52% 0.29%
अन्य (Others) 8.72% 9.42%

भीम ऐप एक फीसदी से भी दूर

भारत इंटरफ़ेस फॉर मनी (BHIM या भीम) की शुरुआत 30 दिसंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। दस साल में डिजिटल पेमेंट में इस ऐप की हिस्सेदारी एक फीसदी भी नहीं हो पाई है। न संख्या के लिहाज से और न ही रकम के मामले में यह ऐप अपनी जगह बना पाया। जबकि, मोदी सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में भीम-यूपीआई को मजबूत करने के लिए 1500 करोड़ रुपये की इंसेंटिव स्कीम चलाई थी। इसका उद्देश्य भीम ऐप के जरिए ट्रैंज़ैक्शन का आंकड़ा 20000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना था। इससे पहले के तीन साल में सरकार करीब 7230 करोड़ रुपये का इंसेंटिव दे चुकी थी।

सरकारी ऐप न केवल विदेशी ऐप का मुक़ाबला करने में पीछे रही है, बल्कि देसी प्राइवेट ऐप भी उससे कहीं आगे है। पेटीएम ने ट्रैंज़ैक्शन में जहां अपनी हिस्सेदारी 7 फीसदी के करीब पहुंचा ली है, वहीं भीम ऐप अभी एक फीसदी के लिए भी संघर्ष कर रहा है।

यह आंकड़ा एक बार फिर वही पुराना सवाल खड़ा करता है कि सर्विस सेक्टर में भी सरकारी कंपनियां कैसे फेल हो जाती हैं, जबकि निजी कंपनियां खूब फलती-फूलती हैं। सरकारी फोन कंपनी बीएसएनएल-एमटीएनएल बंद हो गई और मुकेश अंबानी की जियो झंडे गाड़ती जा रही है।

यूपीआई ट्रैंज़ैक्शन पर चार्ज तो पहले भी था

2016 में जब यूपीआई से लेनदेन शुरू हुआ तो इस पर 0.3 फीसदी चार्ज लगाया गया था। नोटबंदी के बाद 2017 में इसे कुछ समय के लिए हटा लिया गया था। 2020 में फिर इसे पूरी तरह निःशुल्क किया गया। अब 15 अक्तूबर, 2026 से 2000 रुपये से ज्यादा के भुगतान (कुछ अपवादों को छोड़ कर) पर 0.4 फीसदी चार्ज लगाया जाएगा। यह चार्ज मर्चेंट से वसूला जाएगा, भुगतान करने वाले से नहीं।

सिटी बैंक के अनुमान के मुताबिक इससे 160-170 अरब रुपये की वसूली होगी। इसमें से करीब 60 फीसदी बैंकों को, 25 फीसदी ऐप और 15 प्रतिशत अग्रीगेटर्स को जाएगा।

चार्ज लगाने के पक्षधरों का कहना है कि डिजिटल पेमेंट जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए निवेश की जरूरत है। चार्ज लगाने से यह जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी। सरकार ने एमडीआर की रकम में से पांच प्रतिशत अलग रखने का फैसला किया है। यह रकम छोटे व्यवसाइयों के बीच यूपीआई को लोकप्रिय बनाने पर खर्च की जाएगी।

महीना (Month) UPI पर लाइव बैंकों की संख्या (No. of Banks live on UPI) वॉल्यूम (मिलियन में) (Volume in Mn.) वैल्यू (करोड़ रुपये में) (Value in Cr.)
अगस्त-2026 752 24,508.96 29,82,355.95
जुलाई-2026 741 23,658.35 29,87,880.49
जून-2026 731 22,716.07 28,92,138.67
मई-2026 720 23,201.93 29,90,424.21
अप्रैल-2026 713 22,346.80 29,02,988.05

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के नाम से क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर 1.5 और डेबिट कार्ड से पेमेंट करने पर 0.9 प्रतिशत चार्ज पहले से वसूला जा रहा है। यह चार्ज मर्चेंट्स को देना होता है। लेकिन, कई दुकानदार या व्यवसायी क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर ग्राहकों से साफ कह देते हैं कि दो फीसदी एक्सट्रा देना होगा। नहीं देने पर वे क्रेडिट कार्ड से भुगतान लेने से मना कर देते हैं।

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