कटिहार समेत देशभर में भगवान विश्वकर्मा पूजा की तैयारियां चल रही हैं। बाजारों और अलग-अलग जगहों पर उत्साह का माहौल है। कई जगहों पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमाओं को आखिरी रूप दिया जा रहा है। मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर प्रतिमाओं को सुंदर बनाने में लगे हैं। मूर्तिकार संतोष पाल की कार्यशालाओं में इन दिनों काफी काम चल रहा है। कार्यशाला में कोई मूर्ति पर बारीक काम कर रहा है, तो कोई रंग लगाकर प्रतिमाओं को आखिरी रूप दे रहा है। कई दिनों की मेहनत के बाद ज्यादातर प्रतिमाएं अब तैयार हो चुकी हैं। कुछ प्रतिमाओं में आखिरी रंग और सजावट का काम बाकी है। मूर्तिकारों के लिए भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा बनाना सिर्फ मिट्टी और रंग का काम नहीं है। यह उनकी आस्था और पुरानी परंपरा से जुड़ा है। मूर्तिकार संतोष पाल ने बताया कि वे कई दिनों से लगातार मेहनत कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे प्रतिमाओं को सुंदर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जब पूजा के दिन लोग प्रतिमा देखकर खुश होते हैं, तो उनकी मेहनत सफल लगती है। विश्वकर्मा पूजा के मौके पर कारखानों, वर्कशॉप, दुकानों और दूसरे संस्थानों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और तकनीकी कामों का देवता माना जाता है। इसी वजह से पूजा से पहले प्रतिमाओं की मांग बढ़ जाती है। मूर्तिकारों को कम समय में कई प्रतिमाएं बनानी पड़ती हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि महंगाई बढ़ गई है। मिट्टी, रंग और सजावटी सामान भी महंगा हो गया है। इसके बावजूद वे अपनी कला और परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके काम में सालों का अनुभव और मेहनत दिखती है। कटिहार समेत देशभर में भगवान विश्वकर्मा पूजा की तैयारियां चल रही हैं। बाजारों और अलग-अलग जगहों पर उत्साह का माहौल है। कई जगहों पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमाओं को आखिरी रूप दिया जा रहा है। मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर प्रतिमाओं को सुंदर बनाने में लगे हैं। मूर्तिकार संतोष पाल की कार्यशालाओं में इन दिनों काफी काम चल रहा है। कार्यशाला में कोई मूर्ति पर बारीक काम कर रहा है, तो कोई रंग लगाकर प्रतिमाओं को आखिरी रूप दे रहा है। कई दिनों की मेहनत के बाद ज्यादातर प्रतिमाएं अब तैयार हो चुकी हैं। कुछ प्रतिमाओं में आखिरी रंग और सजावट का काम बाकी है। मूर्तिकारों के लिए भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा बनाना सिर्फ मिट्टी और रंग का काम नहीं है। यह उनकी आस्था और पुरानी परंपरा से जुड़ा है। मूर्तिकार संतोष पाल ने बताया कि वे कई दिनों से लगातार मेहनत कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे प्रतिमाओं को सुंदर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जब पूजा के दिन लोग प्रतिमा देखकर खुश होते हैं, तो उनकी मेहनत सफल लगती है। विश्वकर्मा पूजा के मौके पर कारखानों, वर्कशॉप, दुकानों और दूसरे संस्थानों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और तकनीकी कामों का देवता माना जाता है। इसी वजह से पूजा से पहले प्रतिमाओं की मांग बढ़ जाती है। मूर्तिकारों को कम समय में कई प्रतिमाएं बनानी पड़ती हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि महंगाई बढ़ गई है। मिट्टी, रंग और सजावटी सामान भी महंगा हो गया है। इसके बावजूद वे अपनी कला और परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके काम में सालों का अनुभव और मेहनत दिखती है।

