बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे रौशन आनंद:बोले- राहत से आगे बढ़कर स्थायी समाधान जरूरी, मजबूत तटबंध ही स्थायी हल

बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे रौशन आनंद:बोले- राहत से आगे बढ़कर स्थायी समाधान जरूरी, मजबूत तटबंध ही स्थायी हल

भागलपुर में ज्ञान बिंदु इंस्टीट्यूट के निदेशक रौशन आनंद नवगछिया के मदरौनी क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे और राहत सामग्री बांटी। राहत बांटने के दौरान रोशन आनंद ने जरूरतमंद परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि आपदा के समय समाज के अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुंचाना सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि समाज के सक्षम लोगों की भी जिम्मेदारी है। राहत सामग्री बांटने के साथ ही रोशन आनंद ने बाढ़ के स्थायी समाधान का सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ आने पर राहत सामग्री बांटने से समस्या खत्म नहीं होगी। बिहार को अब राहत से आगे बढ़कर लंबे समय तक चलने वाली बाढ़ नियंत्रण योजना पर काम करना होगा। रौशन आनंद ने कहा कि पटना, भागलपुर, बक्सर समेत बिहार के कई जिलों में बाढ़ ने लोगों की जिंदगी पर बुरा असर डाला है। भागलपुर जैसे जिले को बाढ़ और कटाव से बचाने के लिए खास योजना की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हर साल करोड़ों रुपए राहत और बचाव में खर्च करने के बजाय अगर मजबूत तटबंध और बांध बनाने पर गंभीरता से काम हो, तो आने वाली पीढ़ियों को इस त्रासदी से काफी हद तक बचाया जा सकता है।
बाढ़ पर सियासत नहीं, जवाबदेही की जरूरत

रौशन आनंद ने कहा कि बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं रह गई है, बल्कि इससे निपटने की तैयारी और स्थायी व्यवस्था भी सरकारों की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने संकेतों में कहा कि बाढ़ के समय सक्रियता दिखाई देने के साथ-साथ सालभर बांध और तटबंधों की मजबूती पर भी उतनी ही गंभीरता से काम होना चाहिए। अगर हर साल वही इलाके डूबते हैं, वही परिवार विस्थापित होते हैं और फिर वही राहत अभियान शुरू होता है, तो कहीं न कहीं व्यवस्था के स्तर पर स्थायी समाधान की कमी है।
बिहारियों को एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए

हालांकि रौशन आनंद ने सरकार पर केवल सवाल ही नहीं उठाए, बल्कि मुख्यमंत्री की बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सक्रियता की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लगातार बाढ़ की स्थिति पर नजर रख रहे हैं और रात के तीन बजे तक प्रभावित क्षेत्रों में घूमकर स्थिति का जायजा लेना छोटी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार के साथ समाज के सक्षम लोगों को भी आगे आना चाहिए। मदरौनी में राहत वितरण को उन्होंने इसी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा बताया।

बिहार के लोग हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं और आज एक से बढ़कर एक बिहारी देश-दुनिया में नाम कमा रहे हैं। ऐसे में आपदा के समय भी बिहारियों को एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए। भागलपुर में ज्ञान बिंदु इंस्टीट्यूट के निदेशक रौशन आनंद नवगछिया के मदरौनी क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे और राहत सामग्री बांटी। राहत बांटने के दौरान रोशन आनंद ने जरूरतमंद परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि आपदा के समय समाज के अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुंचाना सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि समाज के सक्षम लोगों की भी जिम्मेदारी है। राहत सामग्री बांटने के साथ ही रोशन आनंद ने बाढ़ के स्थायी समाधान का सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ आने पर राहत सामग्री बांटने से समस्या खत्म नहीं होगी। बिहार को अब राहत से आगे बढ़कर लंबे समय तक चलने वाली बाढ़ नियंत्रण योजना पर काम करना होगा। रौशन आनंद ने कहा कि पटना, भागलपुर, बक्सर समेत बिहार के कई जिलों में बाढ़ ने लोगों की जिंदगी पर बुरा असर डाला है। भागलपुर जैसे जिले को बाढ़ और कटाव से बचाने के लिए खास योजना की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हर साल करोड़ों रुपए राहत और बचाव में खर्च करने के बजाय अगर मजबूत तटबंध और बांध बनाने पर गंभीरता से काम हो, तो आने वाली पीढ़ियों को इस त्रासदी से काफी हद तक बचाया जा सकता है।
बाढ़ पर सियासत नहीं, जवाबदेही की जरूरत

रौशन आनंद ने कहा कि बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं रह गई है, बल्कि इससे निपटने की तैयारी और स्थायी व्यवस्था भी सरकारों की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने संकेतों में कहा कि बाढ़ के समय सक्रियता दिखाई देने के साथ-साथ सालभर बांध और तटबंधों की मजबूती पर भी उतनी ही गंभीरता से काम होना चाहिए। अगर हर साल वही इलाके डूबते हैं, वही परिवार विस्थापित होते हैं और फिर वही राहत अभियान शुरू होता है, तो कहीं न कहीं व्यवस्था के स्तर पर स्थायी समाधान की कमी है।
बिहारियों को एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए

हालांकि रौशन आनंद ने सरकार पर केवल सवाल ही नहीं उठाए, बल्कि मुख्यमंत्री की बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सक्रियता की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लगातार बाढ़ की स्थिति पर नजर रख रहे हैं और रात के तीन बजे तक प्रभावित क्षेत्रों में घूमकर स्थिति का जायजा लेना छोटी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार के साथ समाज के सक्षम लोगों को भी आगे आना चाहिए। मदरौनी में राहत वितरण को उन्होंने इसी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा बताया।

बिहार के लोग हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं और आज एक से बढ़कर एक बिहारी देश-दुनिया में नाम कमा रहे हैं। ऐसे में आपदा के समय भी बिहारियों को एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए।  

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