देवास में ‘राइडर बाबा’ मंगलदास महाराज का निधन:5 बार भारत भ्रमण किया,अमरनाथ की पैदल यात्रा की; 5 किलो की मालाएं पहनते थे महाराज

देवास में ‘राइडर बाबा’ मंगलदास महाराज का निधन:5 बार भारत भ्रमण किया,अमरनाथ की पैदल यात्रा की; 5 किलो की मालाएं पहनते थे महाराज

देवास में नागा संत मंगलदास महाराज का निधन हो गया। उन्हें जम्मू वाले बाबा, राइडर बाबा और हाईटेक बाबा जैसे नामों से जाना जाता था। मंगलदास महाराज ने अपनी बुलेट से करीब पांच बार पूरे भारत का भ्रमण किया था। वे करीब 60 साल से अमरनाथ की पैदल यात्रा करते आ रहे थे और वहां सेवा कार्य भी करते थे। उनके निधन की खबर मिलने के बाद जम्मू, गुजरात, मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों से कई संत देवास पहुंचे। नर्मदा किनारे संत परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया। गुजरात से आए संत परमेश्वर दास ने बताया कि मंगलदास महाराज ने अपना पूरा जीवन साधु-संत के रूप में बिताया। वे निर्वाणी अणी अखाड़े के नागा संत थे और परमेश्वर दास के गुरुभाई भी थे। महाराज का निधन सोमवार को हुआ था। इसके बाद उनका शव जिला अस्पताल में रखा गया। मंगलवार को जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को ले जाया गया। जम्मू से गुजरात तक संत जीवन से जुड़ी रही यात्रा मंगलदास महाराज का गुरू स्थान जम्मू है। करीब छह दशक तक उनका जम्मू से गहरा जुड़ाव रहा। बाद में वे गुजरात में निवास करने लगे थे। अमरनाथ से देवास पहुंचने के बाद वे करीब दो माह तक भ्रमण करते हुए यहां रहे। पिछले करीब 20 दिनों से वे देवास में ही थे। उनके शरीर पूरा करने की खबर के बाद जम्मू, गुजरात, उज्जैन और मध्यप्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से संत देवास पहुंचे और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शामिल हुए। 24 साल से देवास से जुड़ाव समाजसेवी दीपक गर्ग ने बताया कि मंगलदास महाराज का कैलादेवी मंदिर से करीब 24 वर्षों से जुड़ाव रहा। वे वर्ष में करीब तीन बार देवास आते थे और यहां संतों व श्रद्धालुओं के बीच समय बिताते थे। इस बार भी वे करीब 20 दिनों से देवास में ही रुके हुए थे। संत के रूप में उनका जीवन धार्मिक यात्राओं, सेवा और साधना को समर्पित रहा। बुलेट से देशभर में भ्रमण करने की उनकी अनूठी शैली के कारण वे साधु-संतों के बीच अलग पहचान रखते थे।

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