दिनकर स्मृति विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित 118वीं दिनकर जयंती का 12 दिवसीय समारोह शुरू हो गया है। समारोह की शुरुआत सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ सिमरिया धाम से किया गया है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए स्वामी चिदात्मन जी ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की प्रतिमा अमृत सरोवर के बीच सिमरिया में स्थापित होनी चाहिए। स्वामी चिदात्मन जी ने कहा कि इस स्वरूप के लिए उचित स्थान सिमरिया का गोलंबर है। मिथिला की सीमा पर बसा सिमरिया धर्म, अध्यात्म और साहित्य की भूमि है। दिनकर विश्वकवि हैं, उनके ज्ञान से सिमरिया आने वाले देशभर के संत श्रद्धालू ज्ञान के प्रकाश से आलोकित होंगे। दिनकर मूर्ति नहीं विचार हैं दिनकर जयंती को संबोधित करते हुए बीएचयू के प्रोफेफर रामाज्ञा शशिधर ने कहा कि दिनकर मूर्ति नहीं विचार हैं। मूर्ति वही जिंदा रहती है, जिसमें विचार व स्वप्न जिंदा रहता है। सिमरिया घाट बाया और गंगा का संगम है। यहां साहित्यिक नवजागरण का एक केंद्र बनता जा रहा है। दक्षिण भारत में महान कवि तिरूवल्लुवर का जो सम्मान है, वही सम्मान दिनकर का सिमरिया में है। साहित्यकार उमेश कुंवर कवि ने कहा कि अगर श्रीकृष्ण सिंह और रामचरित्र सिंह होते तो वे दोनों एक सुर में दिनकर की मूर्ति लगाने की वकालत करते। मूर्ति को लेकर उठे विवाद को खत्म करना ही बेगूसराय के सेहत के लिए अच्छा है। दिनकर सर्वोपरि हैं और उनकी मूर्ति ही सिमरिया सिक्स लेन गोलंबर पर लगनी चाहिए।
दिनकर की प्रतिमा ही सिमरिया गोलंबर पर लगेगी शिक्षाविद संतोष ईश्वर ने कहा कि दिनकर ने संघर्ष करते हुए जीवन में नई उंचाईयों को प्राप्त किया। साहित्यकार आनंद शंकर ने कहा कि दिनकर साहित्य साधना से किसानों और मजदूरों को जगाने का काम किया। दिनकर पुस्तकालय के सचिव संजीव फिरोज ने कहा कि कुछ लोग सिमरिया सिक्स लेन गोलंबर को मल्हीपुर गोलंबर कह कर दिगभ्रमित करने का काम कर रहे हैं। ऐसी साजिश नहीं चलेगी, दिनकर की प्रतिमा ही सिमरिया गोलंबर पर लगेगी। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण प्रियदर्शी, स्वागत भाषण रामनाथ सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन विश्वंभर सिंह ने किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में वरिष्ठ कवि प्रफुल्ल मिश्र, रमा मौसम, विद्यासागर ब्रह्मचारी, राजीव रंजन, विनोद बिहारी, एके मनीष आदि ने कविता पाठ किया। मौके पर कृष्ण कुमार शर्मा, प्रदीप कुमार, अमरदीप सुमन, जितेन्द्र झा, राजेन्द्र राय, दीनबंधु कुमार, कृष्ण मुरारी, रोचकानंद वत्स, गुलशन कुमार, संजीव कुमार राय, अमन गौतम, सूरज कुमार, अजीत कुमार, अमित कुमार सहित अन्य उपस्थित थे। दिनकर स्मृति विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित 118वीं दिनकर जयंती का 12 दिवसीय समारोह शुरू हो गया है। समारोह की शुरुआत सर्वमंगला अध्यात्म योग विद्यापीठ सिमरिया धाम से किया गया है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए स्वामी चिदात्मन जी ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की प्रतिमा अमृत सरोवर के बीच सिमरिया में स्थापित होनी चाहिए। स्वामी चिदात्मन जी ने कहा कि इस स्वरूप के लिए उचित स्थान सिमरिया का गोलंबर है। मिथिला की सीमा पर बसा सिमरिया धर्म, अध्यात्म और साहित्य की भूमि है। दिनकर विश्वकवि हैं, उनके ज्ञान से सिमरिया आने वाले देशभर के संत श्रद्धालू ज्ञान के प्रकाश से आलोकित होंगे। दिनकर मूर्ति नहीं विचार हैं दिनकर जयंती को संबोधित करते हुए बीएचयू के प्रोफेफर रामाज्ञा शशिधर ने कहा कि दिनकर मूर्ति नहीं विचार हैं। मूर्ति वही जिंदा रहती है, जिसमें विचार व स्वप्न जिंदा रहता है। सिमरिया घाट बाया और गंगा का संगम है। यहां साहित्यिक नवजागरण का एक केंद्र बनता जा रहा है। दक्षिण भारत में महान कवि तिरूवल्लुवर का जो सम्मान है, वही सम्मान दिनकर का सिमरिया में है। साहित्यकार उमेश कुंवर कवि ने कहा कि अगर श्रीकृष्ण सिंह और रामचरित्र सिंह होते तो वे दोनों एक सुर में दिनकर की मूर्ति लगाने की वकालत करते। मूर्ति को लेकर उठे विवाद को खत्म करना ही बेगूसराय के सेहत के लिए अच्छा है। दिनकर सर्वोपरि हैं और उनकी मूर्ति ही सिमरिया सिक्स लेन गोलंबर पर लगनी चाहिए।
दिनकर की प्रतिमा ही सिमरिया गोलंबर पर लगेगी शिक्षाविद संतोष ईश्वर ने कहा कि दिनकर ने संघर्ष करते हुए जीवन में नई उंचाईयों को प्राप्त किया। साहित्यकार आनंद शंकर ने कहा कि दिनकर साहित्य साधना से किसानों और मजदूरों को जगाने का काम किया। दिनकर पुस्तकालय के सचिव संजीव फिरोज ने कहा कि कुछ लोग सिमरिया सिक्स लेन गोलंबर को मल्हीपुर गोलंबर कह कर दिगभ्रमित करने का काम कर रहे हैं। ऐसी साजिश नहीं चलेगी, दिनकर की प्रतिमा ही सिमरिया गोलंबर पर लगेगी। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण प्रियदर्शी, स्वागत भाषण रामनाथ सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन विश्वंभर सिंह ने किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में वरिष्ठ कवि प्रफुल्ल मिश्र, रमा मौसम, विद्यासागर ब्रह्मचारी, राजीव रंजन, विनोद बिहारी, एके मनीष आदि ने कविता पाठ किया। मौके पर कृष्ण कुमार शर्मा, प्रदीप कुमार, अमरदीप सुमन, जितेन्द्र झा, राजेन्द्र राय, दीनबंधु कुमार, कृष्ण मुरारी, रोचकानंद वत्स, गुलशन कुमार, संजीव कुमार राय, अमन गौतम, सूरज कुमार, अजीत कुमार, अमित कुमार सहित अन्य उपस्थित थे।

