बाढ़ का पानी उतरते ही नुकसान का आकलन होगा:घर-फसल से सड़क-पुल तक की बनेगी रिपोर्ट, प्रभावित इलाकों में जाएगी टीम

बाढ़ का पानी उतरते ही नुकसान का आकलन होगा:घर-फसल से सड़क-पुल तक की बनेगी रिपोर्ट, प्रभावित इलाकों में जाएगी टीम

भागलपुर में बाढ़ राहत और बचाव अभियान के बाद अब प्रशासन का ध्यान नुकसान के आकलन पर है। सोमवार को भागलपुर के समीक्षा भवन में बिहार सरकार के नगर विकास मंत्री और जिला प्रभारी मंत्री नितेश मिश्रा ने बाढ़ और आपदा की स्थिति पर अधिकारियों के साथ एक बैठक की। बैठक में जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक, संबंधित विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें बाढ़ प्रभावित इलाकों की जमीनी स्थिति, राहत शिविरों में सुविधाएं, सामुदायिक रसोई, चिकित्सा व्यवस्था और प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों ने भी अपने क्षेत्रों की समस्याएं बताईं। मंत्री ने अधिकारियों को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से राहत व्यवस्था को और बेहतर बनाने का निर्देश दिया। प्रभारी मंत्री नितेश मिश्रा ने कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद नुकसान का सही आकलन करने के लिए एक खास टीम बनाई जाएगी। यह टीम प्रभावित इलाकों में जाकर घरों, फसलों, सड़कों, पुल-पुलिया, सरकारी भवनों और दूसरी सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान का जायजा लेगी। नुकसान का आकलन तय नियमों और तकनीकी मानकों के आधार पर होगा। इसके बाद संबंधित विभागों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और सहायता शुरू की जाएगी। ‘पोस्ट फ्लड’ प्लान पर अभी से तैयारी
बाढ़ का पानी उतरने के बाद उत्पन्न होने वाली चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। पोस्ट फ्लड कार्ययोजना के तहत प्रभावित इलाकों में नुकसान का तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कराया जाएगा।
कृषि क्षेत्र में बाढ़ से हुई क्षति का आकलन कर नियमानुसार किसानों को मिलने वाली सहायता और इनपुट सब्सिडी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। वहीं, लंबे समय तक पानी जमा रहने से उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और संभावित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क रहने को कहा गया है। बाढ़ के दौरान प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए जिले में राहत शिविर, कम्युनिटी किचन और मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इन व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण भी किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान जहां भी किसी तरह की कमी सामने आ रही है, वहां तत्काल सुधार के निर्देश दिए जा रहे हैं। सभी विभागों को अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश
बाढ़ के बाद की स्थिति से निपटने के लिए कृषि, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, ग्रामीण विकास, पथ निर्माण और अन्य संबंधित विभागों को अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इन योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद जरूरत के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जिस क्षेत्र में जिस प्रकार की जरूरत है, वहां उसी के अनुरूप संसाधन और सहायता उपलब्ध कराई जाए। भागलपुर में बाढ़ राहत और बचाव अभियान के बाद अब प्रशासन का ध्यान नुकसान के आकलन पर है। सोमवार को भागलपुर के समीक्षा भवन में बिहार सरकार के नगर विकास मंत्री और जिला प्रभारी मंत्री नितेश मिश्रा ने बाढ़ और आपदा की स्थिति पर अधिकारियों के साथ एक बैठक की। बैठक में जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक, संबंधित विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें बाढ़ प्रभावित इलाकों की जमीनी स्थिति, राहत शिविरों में सुविधाएं, सामुदायिक रसोई, चिकित्सा व्यवस्था और प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों ने भी अपने क्षेत्रों की समस्याएं बताईं। मंत्री ने अधिकारियों को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से राहत व्यवस्था को और बेहतर बनाने का निर्देश दिया। प्रभारी मंत्री नितेश मिश्रा ने कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद नुकसान का सही आकलन करने के लिए एक खास टीम बनाई जाएगी। यह टीम प्रभावित इलाकों में जाकर घरों, फसलों, सड़कों, पुल-पुलिया, सरकारी भवनों और दूसरी सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान का जायजा लेगी। नुकसान का आकलन तय नियमों और तकनीकी मानकों के आधार पर होगा। इसके बाद संबंधित विभागों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और सहायता शुरू की जाएगी। ‘पोस्ट फ्लड’ प्लान पर अभी से तैयारी
बाढ़ का पानी उतरने के बाद उत्पन्न होने वाली चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। पोस्ट फ्लड कार्ययोजना के तहत प्रभावित इलाकों में नुकसान का तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कराया जाएगा।
कृषि क्षेत्र में बाढ़ से हुई क्षति का आकलन कर नियमानुसार किसानों को मिलने वाली सहायता और इनपुट सब्सिडी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। वहीं, लंबे समय तक पानी जमा रहने से उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और संभावित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क रहने को कहा गया है। बाढ़ के दौरान प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए जिले में राहत शिविर, कम्युनिटी किचन और मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इन व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण भी किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान जहां भी किसी तरह की कमी सामने आ रही है, वहां तत्काल सुधार के निर्देश दिए जा रहे हैं। सभी विभागों को अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश
बाढ़ के बाद की स्थिति से निपटने के लिए कृषि, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, ग्रामीण विकास, पथ निर्माण और अन्य संबंधित विभागों को अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इन योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद जरूरत के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जिस क्षेत्र में जिस प्रकार की जरूरत है, वहां उसी के अनुरूप संसाधन और सहायता उपलब्ध कराई जाए।  

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