जिला साहित्य अकादमी की ओर से आज बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी भवन के कर्मयोगी सभागार में सम्मान-सह-स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। समारोह में साहित्य, पत्रकारिता और रंगकर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। पत्रकारिता के क्षेत्र में विजय कुमार झा, अशोक कुमार और रंगकर्म के लिए मेनका मल्लिक को सम्मान दिया गया। समारोह को संबोधित करते हुए राजेंद्र राजन ने कहा कि हिंदी को इतना बोझिल नहीं बना देना चाहिए कि संस्कृत भी लजा जाए। हिंदी को जीवनधारा की तरह अपनाने की जरूरत है। भाषा को अपना बनाने से ही उसका विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि भाषा का आरोपण समाज के अंदर विभेद पैदा करता है। प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा कि करीब एक हजार वर्ष से हिंदी भाषा अपने दायित्व का निर्वहन करती आ रही है, उस समय उसे कोई संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं था। उन्होंने कहा कि हिंदी किसी एक वर्ग या क्षेत्र के समर्थन से इस मुकाम तक नहीं पहुंची, बल्कि इसमें संपूर्ण भारतवासियों का योगदान है। दक्षिण भारत में हिंदी को लेकर यदि कोई विवाद है तो वह राजनीतिक विवाद है। आज हम अंग्रेजी के आतंक में जी रहे हैं। इसके साथ ही सम्मानित होने वाली सभी प्रतिभाओं को बधाई दी। छात्रा ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया कार्यक्रम के दौरान अमीराबाद की छात्रा ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया। मंच संचालन सच्चिदानंद पाठक एवं स्वागत भाषण रामनरेश पंडित ने दिया। मंच पर डॉ. रामनरेश पंडित रमन, चितरंजन एवं साहित्य अकादमी के महासचिव अग्निशेखर सहित अन्य अतिथि उपस्थित थे। साहित्य अकादमी के जिलाध्यक्ष प्रो. सीताराम प्रभंजन ने कहा कि हिंदी दिवस के माध्यम से लोगों को इसके प्रति जोड़ने की कोशिश की जा रही है। सचिव नरेंद्र कुमार सिंह कार्यक्रम के आयोजन में अहम भूमिका का निर्वाह किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रामरेखा ने किया। आयोजकों ने कहा कि साहित्य, पत्रकारिता और कला के क्षेत्र में योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने का उद्देश्य नई पीढ़ी को रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम में ये रहे मौजूद कार्यक्रम में पूर्व विधायक एवं लेखक राजेंद्र राजन, प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह, प्रो. अमरेश शांडिल्य तथा प्रो. स्वप्ना चौधरी समेत अन्य उपस्थित थे। इस अवसर पर साहित्य के क्षेत्र में डॉ. भगवान प्रसाद सिंह, राम कृष्ण, विद्यासागर ब्रह्मचारी, मुकेश कुमार, डॉ. प्रभा कुमारी एवं सुनीता झा को सम्मानित किया गया। जिला साहित्य अकादमी की ओर से आज बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी भवन के कर्मयोगी सभागार में सम्मान-सह-स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। समारोह में साहित्य, पत्रकारिता और रंगकर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। पत्रकारिता के क्षेत्र में विजय कुमार झा, अशोक कुमार और रंगकर्म के लिए मेनका मल्लिक को सम्मान दिया गया। समारोह को संबोधित करते हुए राजेंद्र राजन ने कहा कि हिंदी को इतना बोझिल नहीं बना देना चाहिए कि संस्कृत भी लजा जाए। हिंदी को जीवनधारा की तरह अपनाने की जरूरत है। भाषा को अपना बनाने से ही उसका विस्तार होगा। उन्होंने कहा कि भाषा का आरोपण समाज के अंदर विभेद पैदा करता है। प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा कि करीब एक हजार वर्ष से हिंदी भाषा अपने दायित्व का निर्वहन करती आ रही है, उस समय उसे कोई संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं था। उन्होंने कहा कि हिंदी किसी एक वर्ग या क्षेत्र के समर्थन से इस मुकाम तक नहीं पहुंची, बल्कि इसमें संपूर्ण भारतवासियों का योगदान है। दक्षिण भारत में हिंदी को लेकर यदि कोई विवाद है तो वह राजनीतिक विवाद है। आज हम अंग्रेजी के आतंक में जी रहे हैं। इसके साथ ही सम्मानित होने वाली सभी प्रतिभाओं को बधाई दी। छात्रा ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया कार्यक्रम के दौरान अमीराबाद की छात्रा ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया। मंच संचालन सच्चिदानंद पाठक एवं स्वागत भाषण रामनरेश पंडित ने दिया। मंच पर डॉ. रामनरेश पंडित रमन, चितरंजन एवं साहित्य अकादमी के महासचिव अग्निशेखर सहित अन्य अतिथि उपस्थित थे। साहित्य अकादमी के जिलाध्यक्ष प्रो. सीताराम प्रभंजन ने कहा कि हिंदी दिवस के माध्यम से लोगों को इसके प्रति जोड़ने की कोशिश की जा रही है। सचिव नरेंद्र कुमार सिंह कार्यक्रम के आयोजन में अहम भूमिका का निर्वाह किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रामरेखा ने किया। आयोजकों ने कहा कि साहित्य, पत्रकारिता और कला के क्षेत्र में योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने का उद्देश्य नई पीढ़ी को रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम में ये रहे मौजूद कार्यक्रम में पूर्व विधायक एवं लेखक राजेंद्र राजन, प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह, प्रो. अमरेश शांडिल्य तथा प्रो. स्वप्ना चौधरी समेत अन्य उपस्थित थे। इस अवसर पर साहित्य के क्षेत्र में डॉ. भगवान प्रसाद सिंह, राम कृष्ण, विद्यासागर ब्रह्मचारी, मुकेश कुमार, डॉ. प्रभा कुमारी एवं सुनीता झा को सम्मानित किया गया।

