उरई जनपद के विकासखंड कुठौंद में सोमवार से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण शुरू हुआ। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विकास चौधरी के निर्देशन और जिला समन्वयक समेकित शिक्षा शिवदीन चौधरी के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण में दिव्यांग बच्चों की पहचान, शिक्षा और उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने की जानकारी दी गई। खंड शिक्षा अधिकारी रंगनाथ चौधरी ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। बच्चे तीन वर्ष की उम्र से ही आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से शिक्षा की शुरुआत करते हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं को दिव्यांगता की प्रारंभिक पहचान कर बच्चों को आवश्यक सुविधाएं और शासन की योजनाओं का लाभ दिलाना चाहिए। प्रभारी बाल विकास परियोजना अधिकारी शिवानी ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों की शिक्षा की पहली कड़ी हैं। उन्हें बच्चों के साथ उनके माता-पिता और समाज को भी दिव्यांगता के प्रति जागरूक करना चाहिए। स्पेशल एजुकेटर अंकित सिंह ने दिव्यांगता के प्रकार, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम तथा दिव्यांग बच्चों से जुड़ी समस्याओं की जानकारी दी। उन्होंने मेडिकल कैंप, मेजरमेंट कैंप, दिव्यांग बालिकाओं के लिए स्टाइपेंड और बहुदिव्यांग बच्चों के लिए स्कॉट अलाउंस जैसी योजनाओं के बारे में बताया। स्पेशल एजुकेटर मनीष कुमार ने मानसिक दिव्यांगता वाले बच्चों की पहचान, उनकी शिक्षा तथा दैनिक क्रियाकलापों को बेहतर ढंग से कराने के तरीकों की जानकारी दी। प्रशिक्षण में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आवश्यक जानकारी दी गई।

