लखनऊ के हजरतगंज स्थित प्रेस क्लब में हिंदी दिवस पर साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो कृतियों ‘संक्रान्ति का संहार’ और ‘काल यात्रा – वेद से बर्लिन तक’ का विमोचन किया गया। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, लखनऊ की ओर से कार्यक्रम में दोनों पुस्तकों के साहित्यिक, ऐतिहासिक और वैचारिक पक्षों पर परिचर्चा हुई। डॉ. उपाध्याय अब तक 24 किताबों की रचना कर चुके हैं। वहीं, बेंजाई प्रकाशन सुल्तानपुर से प्रकाशित ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’ कहानी-संग्रह है। इसमें वेदकाल से आधुनिक विश्व तक की वैचारिक और सांस्कृतिक यात्रा को कहानियों के माध्यम से सामने रखा गया है। ‘संक्रान्ति का संहार’ तृतीय पानीपत युद्ध पर आधारित ऐतिहासिक उपन्यास है। 14 जनवरी 1761 को हुए इस निर्णायक युद्ध की पृष्ठभूमि को उपन्यास में मानवीय संवेदना, राजनीतिक समझ और साहित्यिक कल्पना के साथ प्रस्तुत किया गया है। अद्विक प्रकाशन ने इसका प्रकाशन किया है। इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा के आयाम परिषद के लखनऊ अध्यक्ष निर्भय नारायण गुप्त की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम की मुख्य वक्ता आलोचक डॉ. रिंकी मणिकर्णिका रहीं। उन्होंने कहा कि संक्रान्ति का संहार में ऐतिहासिक तथ्यों को शोध के साथ जुटाकर प्रस्तुत किया गया है। काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, इतिहास और आधुनिक वैश्विक चेतना के विविध पहलुओं को सामने लाता है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. ममता पंकज ने कहा कि दोनों कृतियां इतिहास, भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विचारों के बीच संवाद स्थापित करती हैं।

