फतेहपुर में 24 साल पुराने चलती ट्रेन में हत्या के चर्चित मामले में कोर्ट ने सोमवार को 4 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। हत्या और मृतक की संपत्ति हड़पने के मामले में 4 आरोपियों में कृष्णपाल, रामचन्द्र, साथी सिंह और अधिवक्ता लालभन को दोषी ठहराया। कोर्ट ने हत्या के मामले में चारों को सश्रम आजीवन कारावास और 1-1 लाख रुपए का जुर्माना लगाय है। इसके अलावा 2-2 साल की कैद और 5-5 हजार रुपए अतिरिक्त जुर्माना लगाया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कानून सबके लिए बराबर है। कोर्ट की तारीख पर जा रहे थे सुरेश सिंह 21 दिसंबर 2002 की सुबह करीब 9:50 बजे हुई थी। सुरेश सिंह अपने भाई और भतीजे के साथ खागा पैसेंजर ट्रेन से फतेहपुर कोर्ट की तारीख पर जा रहे थे। ट्रेन रमवा और फतेहपुर स्टेशन के बीच पहुंची थी, तभी कटोघन और बेजापुर, थाना खागा निवासी साथी सिंह, रामचन्द्र, लालभन और कृष्णपाल असलहों के साथ डिब्बे में पहुंचे। आरोपियों ने सुरेश सिंह पर फायरिंग कर दी। गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने उनकी लाइसेंसी बंदूक और कारतूस की बेल्ट छीन ली। चलती ट्रेन से शव नीचे फेंकने का आरोप अभियोजन के मुताबिक, हत्या के बाद आरोपियों ने सुरेश सिंह के शव को लात मारकर चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया और उनका सामान लेकर फरार हो गए। घटना के बाद जीआरपी फतेहपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। 6 गवाहों की गवाही के आधार पर फैसला अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अजय कुमार सिंह और जीआरपी पीओ रणधीर सिंह ने पैरवी की। अभियोजन ने अदालत में छह गवाह पेश किए। आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए घटना के समय इलाहाबाद में एक वकील के पास मौजूद होने का दावा किया था। अदालत ने बचाव पक्ष के इस दावे को स्वीकार नहीं किया और चारों को दोषी करार दिया।

