मुजफ्फरपुर- जहरीली गैस से दम घुटकर दो मजदूरों की मौत:रिश्ते में जीजा-साला थे, एसएसपी आवास से 200 मीटर दूर टॉयलेट टंकी में उतरे थे

मुजफ्फरपुर- जहरीली गैस से दम घुटकर दो मजदूरों की मौत:रिश्ते में जीजा-साला थे, एसएसपी आवास से 200 मीटर दूर टॉयलेट टंकी में उतरे थे

मुजफ्फरपुर में एक टॉयलेट की टंकी में जहरीली गैस के कारण दम घुटने से दो मजदूरों की मौत हो गई। वहीं, एक अन्य मजदूर दोनों को बचाने के प्रयास में बीमार हो गया, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है।घटना सिकंदरपुर थाना क्षेत्र में सीनियर एसएसपी कांतेश मिश्रा के आवास से 200 मीटर की दूरी पर एक मकान में हुई है। जानकारी के मुताबिक, हादसा सिकंदरपुर के रहने वाले मुन्ना गुप्ता नाम के मकान में हुआ है। करीब 15 दिन पहले मुन्ना के मकान में शौचालय की टंकी की ढलाई का काम पूरा हुआ था। ढलाई के बाद से टंकी पूरी तरह बंद थी। आशंका जताई जा रहा है कि टंकी के पैक होने के कारण अंदर जहरीली गैस भर गई थी, जिसकी वजह से दोनों मजदूरों की मौत हुई। घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें देखिए अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरी घटना सोमवार सुबह टंकी के अंदर लगी लकड़ी और प्लाई की शटरिंग हटाने के लिए मजदूर सोनू कुमार (निवासी अली नेउरा, मीनापुर) बिना किसी सुरक्षा उपकरण के टंकी के छोटे वाले गड्ढे में उतरा। चूंकि टंकी कई दिनों से बंद थी, हवा न मिलने के कारण ऑक्सीजन खत्म हो चुकी थी और जहरीली गैस का दबाव बहुत ज्यादा था। नीचे कदम रखते ही सोनू को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। दम घुटने के कारण वह छटपटाने लगा और चिल्लाया। ऊपर खड़े ठेकेदार मोहम्मद जहांगीर ने जब सोनू को तड़पते देखा, तो उसे बाहर निकालने के लिए तुरंत टंकी के अंदर कूद गया। लेकिन जहरीली गैस इतनी तेज थी कि नीचे उतरते ही दोनों बेहोश होकर टंकी में गिर गए। बचाने तीसरा मजदूर उतारा, समय रहते उसे निकाला गया बचाव में उतरा तीसरा मजदूर भी हुआ घायल: सोनू और जहांगीर को बेहोश देख वहां मौजूद तीसरे मजदूर दिनेश कुमार (निवासी सरवदीपुर, बोचहां) ने चीख-पुकार मचाई और उन्हें बाहर निकालने का प्रयास करने लगा। इस रेस्क्यू की कोशिश के दौरान दिनेश भी जहरीली गैस की चपेट में आ गया और उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। हालांकि, स्थानीय लोगों और आसपास के श्रमिकों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को किसी तरह टंकी से बाहर निकाला जा सका। लेकिन तब तक बेहद देर हो चुकी थी। दम घुटने और शरीर में जहरीली गैस फैलने के कारण सोनू और मोहम्मद जहांगीर की मौके पर ही मौत हो चुकी थी, जबकि दिनेश को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। दोनों मृतक रिश्ते में साला-बहनोई थे पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मृतक सोनू और ठेकेदार मोहम्मद जहांगीर आपस में साला-बहनोई थे। एक ही परिवार के दो कमाऊ सदस्यों की इस अचानक और खौफनाक मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव मीनापुर के अली नेउरा पहुंची, वहां कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। पुलिस बल मौके पर, जांच जारी एसएसपी आवास के ठीक पास हुए इस भीषण हादसे की सूचना मिलते ही सिकंदरपुर थाना पुलिस दलबल के साथ तुरंत घटना स्थल पर पहुंची। पुलिस ने आक्रोशित और हताश भीड़ को शांत कराया और दोनों शवों को अपने कब्जे में लेकर कागजी कार्रवाई पूरी की। इसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए स्थानीय श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमएच) भेज दिया गया। थाना प्रभारी रविभूषण ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला बंद सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस (जैसे मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड) के रिसाव के कारण दम घुटने का लग रहा है। पुलिस मकान मालिक और कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है। यह घटना एक बार फिर बिना सुरक्षा मानकों के सेप्टिक टैंक में उतरने के खतरों को उजागर करती है। मुजफ्फरपुर में एक टॉयलेट की टंकी में जहरीली गैस के कारण दम घुटने से दो मजदूरों की मौत हो गई। वहीं, एक अन्य मजदूर दोनों को बचाने के प्रयास में बीमार हो गया, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है।घटना सिकंदरपुर थाना क्षेत्र में सीनियर एसएसपी कांतेश मिश्रा के आवास से 200 मीटर की दूरी पर एक मकान में हुई है। जानकारी के मुताबिक, हादसा सिकंदरपुर के रहने वाले मुन्ना गुप्ता नाम के मकान में हुआ है। करीब 15 दिन पहले मुन्ना के मकान में शौचालय की टंकी की ढलाई का काम पूरा हुआ था। ढलाई के बाद से टंकी पूरी तरह बंद थी। आशंका जताई जा रहा है कि टंकी के पैक होने के कारण अंदर जहरीली गैस भर गई थी, जिसकी वजह से दोनों मजदूरों की मौत हुई। घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें देखिए अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरी घटना सोमवार सुबह टंकी के अंदर लगी लकड़ी और प्लाई की शटरिंग हटाने के लिए मजदूर सोनू कुमार (निवासी अली नेउरा, मीनापुर) बिना किसी सुरक्षा उपकरण के टंकी के छोटे वाले गड्ढे में उतरा। चूंकि टंकी कई दिनों से बंद थी, हवा न मिलने के कारण ऑक्सीजन खत्म हो चुकी थी और जहरीली गैस का दबाव बहुत ज्यादा था। नीचे कदम रखते ही सोनू को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। दम घुटने के कारण वह छटपटाने लगा और चिल्लाया। ऊपर खड़े ठेकेदार मोहम्मद जहांगीर ने जब सोनू को तड़पते देखा, तो उसे बाहर निकालने के लिए तुरंत टंकी के अंदर कूद गया। लेकिन जहरीली गैस इतनी तेज थी कि नीचे उतरते ही दोनों बेहोश होकर टंकी में गिर गए। बचाने तीसरा मजदूर उतारा, समय रहते उसे निकाला गया बचाव में उतरा तीसरा मजदूर भी हुआ घायल: सोनू और जहांगीर को बेहोश देख वहां मौजूद तीसरे मजदूर दिनेश कुमार (निवासी सरवदीपुर, बोचहां) ने चीख-पुकार मचाई और उन्हें बाहर निकालने का प्रयास करने लगा। इस रेस्क्यू की कोशिश के दौरान दिनेश भी जहरीली गैस की चपेट में आ गया और उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। हालांकि, स्थानीय लोगों और आसपास के श्रमिकों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद तीनों को किसी तरह टंकी से बाहर निकाला जा सका। लेकिन तब तक बेहद देर हो चुकी थी। दम घुटने और शरीर में जहरीली गैस फैलने के कारण सोनू और मोहम्मद जहांगीर की मौके पर ही मौत हो चुकी थी, जबकि दिनेश को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। दोनों मृतक रिश्ते में साला-बहनोई थे पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मृतक सोनू और ठेकेदार मोहम्मद जहांगीर आपस में साला-बहनोई थे। एक ही परिवार के दो कमाऊ सदस्यों की इस अचानक और खौफनाक मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव मीनापुर के अली नेउरा पहुंची, वहां कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। पुलिस बल मौके पर, जांच जारी एसएसपी आवास के ठीक पास हुए इस भीषण हादसे की सूचना मिलते ही सिकंदरपुर थाना पुलिस दलबल के साथ तुरंत घटना स्थल पर पहुंची। पुलिस ने आक्रोशित और हताश भीड़ को शांत कराया और दोनों शवों को अपने कब्जे में लेकर कागजी कार्रवाई पूरी की। इसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए स्थानीय श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमएच) भेज दिया गया। थाना प्रभारी रविभूषण ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला बंद सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस (जैसे मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड) के रिसाव के कारण दम घुटने का लग रहा है। पुलिस मकान मालिक और कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है। यह घटना एक बार फिर बिना सुरक्षा मानकों के सेप्टिक टैंक में उतरने के खतरों को उजागर करती है।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *