बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर दो दिन से जिले में डटे कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने रविवार को मप्र सरकार पर तंज कसते हुए खुद को मुख्यमंत्री बताकर इस्तीफा लिख दिया। राज्यपाल मंगूभाई पटेल को संबोधित पत्र उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री को भी टैग किया। इसके बाद भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा कि दिपके को पहले अपने दिमाग का इलाज कराना चाहिए। वहीं, बालाघाट के प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि बाहरी लोग वहां जाकर वातावरण खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। दिपके ने पत्र में 13 अगस्त 2026 की तारीख लिखी है। इसमें लिखा, ‘मैं तत्काल प्रभाव से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देता हूं।’ उन्होंने प्रधानमंत्री को जनता की सेवा का मौका देने के लिए धन्यवाद देते हुए लिखा कि वे इस मौके पर साफ तौर पर नाकाम रहे हैं। बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत के बाद उनका विवेक उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति नहीं देता।
मुआवजे पर सवाल, नदी तक पहुंचे दिपके ने कहा कि पहले प्रत्येक बच्चे के लिए 2 लाख रुपए मुआवजा घोषित किया गया। आदिवासी समुदाय के विरोध के बाद इसे बढ़ाकर 4 लाख रुपए किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ये बच्चे मंत्रियों या विधायकों के होते तो क्या 4 लाख रुपए पर्याप्त माने जाते? दिपके कुंडेकसा, बोंदारी, कोरका, कोडबीरकोना और घाघाटोला गांव पहुंचे। वे आदिवासियों के साथ उस नदी तक भी गए, जिसका पानी लोग पी रहे हैं। दिपके ने पूछा कि बारिश में पानी गंदा हो गया है तो ग्रामीणों ने कहा कि फिर भी यही पानी पीते हैं। उन्होंने गांवों के स्कूलों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। सबनानी बोले-दिपके किसी सदन के सदस्य नहीं भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा कि मप्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार आपराधिक मामलों में कड़ी कार्रवाई करती है। दिपके न किसी सदन के सदस्य हैं और न ही मध्यप्रदेश कोई मखौल का स्थान है। प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है। स्थानीय लोग और प्रशासन इसे बेहतर करने में जुटे हैं। 2 पीएचसी एक नई एसएचसी मंजूर
बालाघाट में 67 नए डॉक्टर तैनात, दूरस्थ इलाकों तक पहुंचाएंगे इलाज बालाघाट के दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में इलाज की पहुंच बढ़ाने के लिए 67 नए मेडिकल ऑफिसर तैनात किए गए हैं। स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने के लिए 2 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। साथ ही 2 नए पीएचसी, एक एसएचसी और 2 मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। रविवार को डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा की। गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर फोकस हर गर्भवती महिला का समय पर पंजीयन और एएनसी जांच होगी। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की पहचान कर फॉलोअप और दूरस्थ क्षेत्रों में बर्थ वेटिंग होम को प्रभावी बनाया जाएगा। नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों के लिए विशेष अभियान चलेगा। जरूरत के मुताबिक आशा और एएनएम के नए पद स्वीकृत होंगे।

