मधेपुरा में बिहार राज्य कार्यपालक सहायक सेवा संघ की मधेपुरा जिला इकाई ने अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित राज्यव्यापी आंदोलन में शामिल होने का फैसला लिया है। रविवार को स्थानीय डीजीपीएस, मधेपुरा परिसर में जिला अध्यक्ष संतोष कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में संगठन को प्रखंड और अनुमंडल स्तर तक मजबूत करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए अगले 15 दिनों में संगठन का विस्तार किया जाएगा। संघ ने अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन चलाने की भी रणनीति बनाई है। स्वास्थ्य बीमा और कॉरपोरेट सैलरी पैकेज की मांग कार्यपालक सहायकों ने सभी विभागों में समूह स्वास्थ्य बीमा और कॉरपोरेट सैलरी पैकेज लागू करने की मांग की है। इस संबंध में सरकार को अल्टीमेटम देने का फैसला लिया गया। संघ ने आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मियों की नियुक्ति की किसी भी कोशिश का विरोध करने की चेतावनी दी। कार्य समीक्षा के नाम पर हटाने का विरोध जिला अध्यक्ष संतोष कुमार ने कहा कि कार्य समीक्षा या वित्तीय बोझ का हवाला देकर कार्यपालक सहायकों को हटाने की धमकी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने ईपीएफ, अवकाश और अन्य कानूनी सुविधाओं में हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ भी चरणबद्ध आंदोलन की बात कही। मानदेय बढ़ाने का आश्वासन, फैसला अब तक नहीं संतोष कुमार ने कहा कि मानदेय पुनर्निर्धारण और अन्य सुविधाओं को लेकर सरकार व मिशन कार्यालय की ओर से लंबे समय से आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संघ अब आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट निर्णय चाहता है। 36वीं शासी परिषद में हुआ था प्राथमिकता से विचार का फैसला उन्होंने बताया कि 26 अगस्त 2025 को हुई 36वीं शासी परिषद की बैठक में मानदेय पुनर्निर्धारण के प्रस्ताव पर अगली बैठक में प्राथमिकता से विचार करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 6 अक्टूबर 2025 को अपर मुख्य सचिव-सह-मिशन निदेशक, बीपीएसएमएस के साथ हुई बातचीत में भी मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था। तीन महीने में सिफारिश का वादा भी पूरा नहीं संघ के अनुसार, 10 दिसंबर 2025 को हुई 37वीं शासी परिषद की बैठक में उच्चस्तरीय समिति गठित कर तीन महीने में सिफारिश देने का निर्णय हुआ था। संघ का कहना है कि तय समय-सीमा बीतने के बाद भी मानदेय पुनर्निर्धारण पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। अक्टूबर में राज्यव्यापी आंदोलन में उतरेगा संघ जिला अध्यक्ष ने कहा कि अक्टूबर से जिले के सभी विभागों के कार्यपालक सहायक राज्य संघ के आह्वान पर आंदोलन में शामिल होंगे। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़कर पटना में राज्य सरकार के समक्ष भी आवाज उठाई जाएगी। 15 साल से संविदा पर महत्वपूर्ण काम लेने का आरोप संघ ने कहा कि करीब 15 वर्षों से कार्यपालक सहायकों से संविदा के नाम पर नियमित और महत्वपूर्ण सरकारी काम लिया जा रहा है। इसके बावजूद उन्हें सेवा-सुरक्षा और अन्य अधिकारों का उचित लाभ नहीं मिल रहा है। संघ ने लंबे समय तक संविदा व्यवस्था में रखने को युवाओं के रोजगार और सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा बताया। बैठक में ये रहे मौजूद बैठक में जिला कार्यकारिणी के विस्तार और संगठन को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। जिला अध्यक्ष संतोष कुमार के अलावा जिला सचिव रंजीत कुमार डॉन, कोषाध्यक्ष चंदन कुमार, अमरदीप कुमार, कैलाश राम, प्रकाश कुमार, मनीष राज, सिंटू कुमार सुमन, मुकेश कुमार, उदय कुमार सिंह, संतोष राजभर, हिमांशु कुमार, संगीता कुमारी, मनीषा कुमारी, रत्नेश कुमार पंडित, मिथलेश कुमार सहित अन्य कार्यपालक सहायक मौजूद थे। मधेपुरा में बिहार राज्य कार्यपालक सहायक सेवा संघ की मधेपुरा जिला इकाई ने अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित राज्यव्यापी आंदोलन में शामिल होने का फैसला लिया है। रविवार को स्थानीय डीजीपीएस, मधेपुरा परिसर में जिला अध्यक्ष संतोष कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में संगठन को प्रखंड और अनुमंडल स्तर तक मजबूत करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए अगले 15 दिनों में संगठन का विस्तार किया जाएगा। संघ ने अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन चलाने की भी रणनीति बनाई है। स्वास्थ्य बीमा और कॉरपोरेट सैलरी पैकेज की मांग कार्यपालक सहायकों ने सभी विभागों में समूह स्वास्थ्य बीमा और कॉरपोरेट सैलरी पैकेज लागू करने की मांग की है। इस संबंध में सरकार को अल्टीमेटम देने का फैसला लिया गया। संघ ने आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मियों की नियुक्ति की किसी भी कोशिश का विरोध करने की चेतावनी दी। कार्य समीक्षा के नाम पर हटाने का विरोध जिला अध्यक्ष संतोष कुमार ने कहा कि कार्य समीक्षा या वित्तीय बोझ का हवाला देकर कार्यपालक सहायकों को हटाने की धमकी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने ईपीएफ, अवकाश और अन्य कानूनी सुविधाओं में हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ भी चरणबद्ध आंदोलन की बात कही। मानदेय बढ़ाने का आश्वासन, फैसला अब तक नहीं संतोष कुमार ने कहा कि मानदेय पुनर्निर्धारण और अन्य सुविधाओं को लेकर सरकार व मिशन कार्यालय की ओर से लंबे समय से आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संघ अब आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट निर्णय चाहता है। 36वीं शासी परिषद में हुआ था प्राथमिकता से विचार का फैसला उन्होंने बताया कि 26 अगस्त 2025 को हुई 36वीं शासी परिषद की बैठक में मानदेय पुनर्निर्धारण के प्रस्ताव पर अगली बैठक में प्राथमिकता से विचार करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 6 अक्टूबर 2025 को अपर मुख्य सचिव-सह-मिशन निदेशक, बीपीएसएमएस के साथ हुई बातचीत में भी मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था। तीन महीने में सिफारिश का वादा भी पूरा नहीं संघ के अनुसार, 10 दिसंबर 2025 को हुई 37वीं शासी परिषद की बैठक में उच्चस्तरीय समिति गठित कर तीन महीने में सिफारिश देने का निर्णय हुआ था। संघ का कहना है कि तय समय-सीमा बीतने के बाद भी मानदेय पुनर्निर्धारण पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। अक्टूबर में राज्यव्यापी आंदोलन में उतरेगा संघ जिला अध्यक्ष ने कहा कि अक्टूबर से जिले के सभी विभागों के कार्यपालक सहायक राज्य संघ के आह्वान पर आंदोलन में शामिल होंगे। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़कर पटना में राज्य सरकार के समक्ष भी आवाज उठाई जाएगी। 15 साल से संविदा पर महत्वपूर्ण काम लेने का आरोप संघ ने कहा कि करीब 15 वर्षों से कार्यपालक सहायकों से संविदा के नाम पर नियमित और महत्वपूर्ण सरकारी काम लिया जा रहा है। इसके बावजूद उन्हें सेवा-सुरक्षा और अन्य अधिकारों का उचित लाभ नहीं मिल रहा है। संघ ने लंबे समय तक संविदा व्यवस्था में रखने को युवाओं के रोजगार और सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा बताया। बैठक में ये रहे मौजूद बैठक में जिला कार्यकारिणी के विस्तार और संगठन को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। जिला अध्यक्ष संतोष कुमार के अलावा जिला सचिव रंजीत कुमार डॉन, कोषाध्यक्ष चंदन कुमार, अमरदीप कुमार, कैलाश राम, प्रकाश कुमार, मनीष राज, सिंटू कुमार सुमन, मुकेश कुमार, उदय कुमार सिंह, संतोष राजभर, हिमांशु कुमार, संगीता कुमारी, मनीषा कुमारी, रत्नेश कुमार पंडित, मिथलेश कुमार सहित अन्य कार्यपालक सहायक मौजूद थे।

