देश के अलग-अलग राज्यों में पैरामेडिकल, आयुष इंटर्न्स की हड़ताल:कहीं बिना सैलरी के काम, कहीं 13 साल से वही स्टाइपेंड

देश के अलग-अलग राज्यों में पैरामेडिकल, आयुष इंटर्न्स की हड़ताल:कहीं बिना सैलरी के काम, कहीं 13 साल से वही स्टाइपेंड

देशभर में मेडिकल इंटर्न्स के प्रदर्शन के बाद अब आंध्र प्रदेश के तिरुपति में पैरामेडिकल इंटर्न्स भी स्टाइपेंड की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। साथ ही आंध्र प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों जैसे आंध्र मेडिकल कॉलेज, विशाखापत्तनम और एसवी मेडिकल कॉलेज, तिरुपति भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं। बिना सैलरी के 12 घंटे काम करते हैं बता दें कि आंध्र प्रदेश में वर्तमान में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के पैरामेडिकल इन्टर्न यानी एमएलटी, हेल्थ साइंस के स्टूडेंट्स को कोई आधिकारिक या नियमित स्टाइपेंड नहीं दिया जाता है। पैरामेडिकल स्टूडेंट्स बिना सैलरी के 12 घंटे की शिफ्ट का विरोध कर रहे हैं। स्टूडेंट्स की मांग है कि ₹15,000 का मासिक स्टाइपेंड दिया जाए। वे इन्हीं मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। बालों से खींचकर ले जाती पुलिस इसी विरोध प्रदर्शन का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें महिला पुलिस प्रोटेस्ट में शामिल एक स्टूडेंट के बालों से उसे खींच रही है। इसी विरोध-प्रदर्शन के दौरान अफरातफरी मच गई। एमपी में मेडिकल इंटर्न्स पर वॉटर कैनन से हमला किया गया हाल ही में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी प्रदर्शन कर रहे MBBS इन्टर्न डॉक्टर्स पर वॉटर कैनन से हमला किया गया था। प्रदर्शन के बाद उनकी मांगे मान ली गई थी और उनका स्टाइपेंड 14,337 रुपए से बढ़ाकर 21,500 रुपए किया गया था। वाटर कैनन मामले में जांच के निर्देश इंटर्न ने वाटर कैनन चलाने का विरोध किया। उनका कहना है कि हम डॉक्टर हैं, क्रिमिनल नहीं, जो हम पर वाटर कैनन चलाई गई। इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वाटर कैनन मामले में जांच के निर्देश दिए थे। इंदौर में डॉक्टरों के समर्थन में रैली का आयोजन इंदौर के एमवाय अस्पताल परिसर में इंटर्न डॉक्टरों ने विरोध जताने के लिए रैली निकाली। भोपाल में प्रदर्शन के दौरान इंटर्न डॉक्टरों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में डॉक्टरों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। रैली में इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टर शामिल हुए। जम्मू कश्मीर में 48 घंटे की भूख हड़ताल पर इंटर्न जम्मू-कश्मीर में MBBS और BDS इंटर्न 31 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। जम्मू-कश्मीर के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और दो डेंटल कॉलेजों के मेडिकल इंटर्न ने बढ़े हुए स्टाइपेंड की मांग को लेकर 7 सितंबर से 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की है। प्रदर्शनकारी इंटर्न का कहना है कि उनका आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक स्टाइपेंड को लेकर सरकार की ओर से आदेश जारी नहीं किया जाता। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर वे सरकार को काफी समय दे चुके हैं। इस संबंध में छात्रों द्वारा 2023 में भी सिफारिश की गई थी। फिलहाल मेडिकल इंटर्न की नजर सरकार की ओर से आधिकारिक आदेश जारी होने पर है। इंटर्न का कहना है कि केवल बातचीत अब पर्याप्त नहीं हैं। उत्तराखंड में करीब 600 इंटर्न भूख हड़ताल पर उत्तराखंड में मेडिकल इंटर्न अपना स्टाइपेंड 17,000 से बढ़ाकर 30,000 किए जाने की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन में करीब 600 MBBS इंटर्न आंदोलन में शामिल हैं। इंटर्न ने OPD और वार्ड ड्यूटी का बहिष्कार किया है। हालांकि इमरजेंसी ड्यूटी वाले इंटर्न मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इस आंदोलन का नेतृत्व वॉइस ऑफ इंटर्नस – उत्तराखंड के बैनर तले हो रहा है। पीजी रेजिडेंट डॉक्टर काली पट्‌टी बांधकर कर रहे विरोध इंटर्न डॉक्टरों का दावा है कि कई दूसरे राज्यों में MBBS इंटर्न को उत्तराखंड से अधिक स्टाइपेंड मिलता है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने कहा है कि स्टाइपेंड संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस संबंध में मेडिकल कॉलेजों से रिपोर्ट भी मांगी गई है। इस हड़ताल में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी, वीसीएसजी मेडिकल कॉलेज/इंस्टीट्यूट, श्रीनगर, गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून और सोबन सिंह जीना मेडिकल साइंसेज संस्थान, अल्मोड़ा के स्टूडेंट्स शामिल हैं। इसके अलावा उत्तराखंड के करीब 600 पीजी रेजिडेंट डॉक्टर भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर काली पट्टी बांधकर विरोध कर रहे हैं। मेडिकल इंटर्न के स्टाइपेंड को लेकर भारत का कानून भारत में MBBS मेडिकल इंटर्न को स्टाइपेंड देना सिर्फ कॉलेज की मर्जी पर डिपेंड नहीं करता है। NMC के कंप्लसरी रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप रेग्यूलेशन्स 2021 में स्टाइपेंड का प्रावधान है। इसके अलावा सभी मेडिकल इंटर्न को स्टाइपेंड देने का नियम भी तय है। इसके तहत CRMI रेग्यूलेशन्स 2021 के शेड्यूल-IV, क्लॉज 3(a) के अनुसार सभी इंटर्न को संबंधित संस्थान, यूनिवर्सिटी या राज्य की सक्षम प्राधिकरण द्वारा तय स्टाइपेंड दिया जाना जरूरी है। ———————————————————————— ये खबर भी पढ़ें मिड डे मील में कहीं कीड़े, कहीं सड़े आलू:आरोप छात्रों से प्रिंसिपल कहते हैं- शिकायत की तो केस कर देंगे, देशभर के कई राज्यों के मामले एमपी के छिंदवाड़ा के मानेगांव में स्कूली बच्चों के मध्यान भोजन यानी मिड डे मील में खाने की गुणवत्ता, सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें

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