नालंदा के बेना थाना क्षेत्र अंतर्गत गिरधरचक गांव में शनिवार की देर रात जहरीली बिढ़नी (जंगली ततैया) के काटने से एक 55 वर्षीय व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान गिरधरचक निवासी रामस्वरूप चौहान के रूप में हुई है। रामस्वरूप मजदूरी कर चार बेटों और तीन बेटियों समेत पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। घर के मुखिया की अचानक हुई मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। मवेशी चराने के दौरान हुई घटना मृतक के भाई अखिलेश कुमार ने बताया कि शनिवार की शाम रामस्वरूप अपने मवेशियों को लेकर गांव के खंधा में चराने गए थे। मवेशी जब आहर के अलंग के पास चर रहे थे, तभी उनका पैर जमीन के भीतर बने एक बड़े छत्ते पर पड़ गया। इसके तुरंत बाद मिट्टी के नीचे से भारी तादाद में बड़े आकार की काली जंगली बिढ़नी बाहर निकल आईं और उन्होंने रामस्वरूप पर धावा बोल दिया। अखिलेश के अनुसार, खुद को बचाने के लिए रामस्वरूप पास के पानी में भी कूद पड़े, लेकिन आक्रामक झुंड ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। बिढ़नियों ने उनके चेहरे और शरीर के कई हिस्सों पर अनगिनत डंक मारे। गंभीर हालत में परिजन उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां रात करीब 11 बजे इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। नर्वस सिस्टम डैमेज होने से गई जान सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि अत्यधिक संख्या में जहरीली बिढ़नी का काटना जानलेवा हो सकता है। शरीर के संवेदनशील हिस्सों, विशेषकर चेहरे पर अनगिनत डंक लगने से कीड़े का टॉक्सिन सीधे नर्वस सिस्टम को गंभीर क्षति पहुंचाता है। मल्टीपल स्टिंग्स और जहर के तेजी से फैलने के कारण मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है, जिसके कारण कई बार मरीज की जान चली जाती है। फ़िलहाल बिहार थाना की पुलिस सदर अस्पताल पहुंच शव के पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया में जुट गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। नालंदा के बेना थाना क्षेत्र अंतर्गत गिरधरचक गांव में शनिवार की देर रात जहरीली बिढ़नी (जंगली ततैया) के काटने से एक 55 वर्षीय व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान गिरधरचक निवासी रामस्वरूप चौहान के रूप में हुई है। रामस्वरूप मजदूरी कर चार बेटों और तीन बेटियों समेत पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। घर के मुखिया की अचानक हुई मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। मवेशी चराने के दौरान हुई घटना मृतक के भाई अखिलेश कुमार ने बताया कि शनिवार की शाम रामस्वरूप अपने मवेशियों को लेकर गांव के खंधा में चराने गए थे। मवेशी जब आहर के अलंग के पास चर रहे थे, तभी उनका पैर जमीन के भीतर बने एक बड़े छत्ते पर पड़ गया। इसके तुरंत बाद मिट्टी के नीचे से भारी तादाद में बड़े आकार की काली जंगली बिढ़नी बाहर निकल आईं और उन्होंने रामस्वरूप पर धावा बोल दिया। अखिलेश के अनुसार, खुद को बचाने के लिए रामस्वरूप पास के पानी में भी कूद पड़े, लेकिन आक्रामक झुंड ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। बिढ़नियों ने उनके चेहरे और शरीर के कई हिस्सों पर अनगिनत डंक मारे। गंभीर हालत में परिजन उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां रात करीब 11 बजे इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। नर्वस सिस्टम डैमेज होने से गई जान सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि अत्यधिक संख्या में जहरीली बिढ़नी का काटना जानलेवा हो सकता है। शरीर के संवेदनशील हिस्सों, विशेषकर चेहरे पर अनगिनत डंक लगने से कीड़े का टॉक्सिन सीधे नर्वस सिस्टम को गंभीर क्षति पहुंचाता है। मल्टीपल स्टिंग्स और जहर के तेजी से फैलने के कारण मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है, जिसके कारण कई बार मरीज की जान चली जाती है। फ़िलहाल बिहार थाना की पुलिस सदर अस्पताल पहुंच शव के पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया में जुट गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा।

