मोतिहारी के पहाड़पुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक चतुर्थवर्गीय कर्मी द्वारा मासूम बच्चे के सिर में टांका लगाने का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। वीडियो में कृष्णा नाम का फोर्थ ग्रेड कर्मी एक किशोर के सिर की चोट पर टांका लगाते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामला सामने आने के बाद सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने जांच टीम गठित कर दी है। वहीं, दूसरी ओर CHC प्रभारी की ओर से एक पत्र जारी कर वायरल वीडियो को भ्रामक बताया गया। यह पत्र सामने आने के बाद सिविल सर्जन ने CHC प्रभारी से शो-कॉज मांगा है। सिविल सर्जन ने कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सिर फटा था, पिता के साथ इलाज कराने पहुंचा था किशोर जानकारी के अनुसार, एक किशोर के सिर में गंभीर चोट लगी थी। चोट इतनी गहरी थी कि उसके सिर से खून निकल रहा था और टांके लगाने की जरूरत थी। किशोर अपने पिता के साथ इलाज कराने के लिए पहाड़पुर CHC पहुंचा था। अस्पताल में इलाज के दौरान वहां मौजूद कृष्णा नामक चतुर्थवर्गीय कर्मी बच्चे के सिर में टांका लगाने लगा। वीडियो में वह आराम से बच्चे के सिर की चोट पर उपचार करता और टांके लगाता दिखाई दे रहा है। इसी दौरान अस्पताल में मौजूद किसी मरीज के परिजन ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर अस्पताल में चिकित्सकीय प्रक्रिया करने की जिम्मेदारी किसकी है और चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को यह काम करने की अनुमति किस स्तर से दी गई थी। वीडियो वायरल होने के बाद उठे कई सवाल वीडियो के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या किसी चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को मरीज का उपचार करने या टांका लगाने की अनुमति है? अगर नहीं, तो अस्पताल में यह प्रक्रिया उसके द्वारा कैसे कराई गई? लोगों का कहना है कि अस्पताल में आने वाले मरीज डॉक्टर और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों पर भरोसा करते हैं। ऐसे में अगर बिना अधिकृत चिकित्सकीय योग्यता वाले कर्मचारी से उपचार कराया जाता है तो यह मरीज की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। हालांकि, पूरे मामले में यह भी जांच का विषय है कि वीडियो किस परिस्थिति में बनाया गया, उस समय ड्यूटी पर कौन-कौन से स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे और बच्चे के सिर में टांका लगाने की जिम्मेदारी कर्मचारी को किसने दी। CHC प्रभारी ने पत्र जारी कर वीडियो को बताया भ्रामक वीडियो वायरल होने के बाद पहाड़पुर CHC प्रभारी की ओर से एक पत्र जारी किया गया। इसमें वायरल वीडियो को भ्रामक बताया गया। CHC प्रभारी की ओर से मामले को लेकर अपना पक्ष रखा गया, लेकिन यह पत्र सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने CHC प्रभारी से ही शो-कॉज पूछ लिया है। उनसे मामले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्वास्थ्य विभाग अब यह भी जांच करेगा कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना की वास्तविकता क्या है और CHC प्रभारी की ओर से जारी पत्र किस आधार पर जारी किया गया। सिविल सर्जन ने बनाई जांच टीम वीडियो सामने आने के बाद सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम का गठन किया है। टीम पूरे मामले की जांच करेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि बच्चे का इलाज किस परिस्थिति में हुआ, टांका किसने लगाया और उस समय ड्यूटी पर कौन-कौन से कर्मचारी और चिकित्सक मौजूद थे। साथ ही CHC प्रभारी की भूमिका और उनके द्वारा जारी किए गए पत्र की भी जांच की जाएगी। ‘मामला बेहद गंभीर, जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई’ सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है। वीडियो सामने आने के बाद जांच टीम गठित की गई है। CHC प्रभारी से शो-कॉज भी पूछा गया है। पूरे मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही घटना वास्तव में किस परिस्थिति में हुई और चतुर्थवर्गीय कर्मी को मरीज के उपचार की जिम्मेदारी कैसे मिली। मोतिहारी के पहाड़पुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक चतुर्थवर्गीय कर्मी द्वारा मासूम बच्चे के सिर में टांका लगाने का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। वीडियो में कृष्णा नाम का फोर्थ ग्रेड कर्मी एक किशोर के सिर की चोट पर टांका लगाते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामला सामने आने के बाद सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने जांच टीम गठित कर दी है। वहीं, दूसरी ओर CHC प्रभारी की ओर से एक पत्र जारी कर वायरल वीडियो को भ्रामक बताया गया। यह पत्र सामने आने के बाद सिविल सर्जन ने CHC प्रभारी से शो-कॉज मांगा है। सिविल सर्जन ने कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सिर फटा था, पिता के साथ इलाज कराने पहुंचा था किशोर जानकारी के अनुसार, एक किशोर के सिर में गंभीर चोट लगी थी। चोट इतनी गहरी थी कि उसके सिर से खून निकल रहा था और टांके लगाने की जरूरत थी। किशोर अपने पिता के साथ इलाज कराने के लिए पहाड़पुर CHC पहुंचा था। अस्पताल में इलाज के दौरान वहां मौजूद कृष्णा नामक चतुर्थवर्गीय कर्मी बच्चे के सिर में टांका लगाने लगा। वीडियो में वह आराम से बच्चे के सिर की चोट पर उपचार करता और टांके लगाता दिखाई दे रहा है। इसी दौरान अस्पताल में मौजूद किसी मरीज के परिजन ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर अस्पताल में चिकित्सकीय प्रक्रिया करने की जिम्मेदारी किसकी है और चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को यह काम करने की अनुमति किस स्तर से दी गई थी। वीडियो वायरल होने के बाद उठे कई सवाल वीडियो के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या किसी चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को मरीज का उपचार करने या टांका लगाने की अनुमति है? अगर नहीं, तो अस्पताल में यह प्रक्रिया उसके द्वारा कैसे कराई गई? लोगों का कहना है कि अस्पताल में आने वाले मरीज डॉक्टर और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों पर भरोसा करते हैं। ऐसे में अगर बिना अधिकृत चिकित्सकीय योग्यता वाले कर्मचारी से उपचार कराया जाता है तो यह मरीज की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। हालांकि, पूरे मामले में यह भी जांच का विषय है कि वीडियो किस परिस्थिति में बनाया गया, उस समय ड्यूटी पर कौन-कौन से स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे और बच्चे के सिर में टांका लगाने की जिम्मेदारी कर्मचारी को किसने दी। CHC प्रभारी ने पत्र जारी कर वीडियो को बताया भ्रामक वीडियो वायरल होने के बाद पहाड़पुर CHC प्रभारी की ओर से एक पत्र जारी किया गया। इसमें वायरल वीडियो को भ्रामक बताया गया। CHC प्रभारी की ओर से मामले को लेकर अपना पक्ष रखा गया, लेकिन यह पत्र सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने CHC प्रभारी से ही शो-कॉज पूछ लिया है। उनसे मामले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्वास्थ्य विभाग अब यह भी जांच करेगा कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना की वास्तविकता क्या है और CHC प्रभारी की ओर से जारी पत्र किस आधार पर जारी किया गया। सिविल सर्जन ने बनाई जांच टीम वीडियो सामने आने के बाद सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम का गठन किया है। टीम पूरे मामले की जांच करेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि बच्चे का इलाज किस परिस्थिति में हुआ, टांका किसने लगाया और उस समय ड्यूटी पर कौन-कौन से कर्मचारी और चिकित्सक मौजूद थे। साथ ही CHC प्रभारी की भूमिका और उनके द्वारा जारी किए गए पत्र की भी जांच की जाएगी। ‘मामला बेहद गंभीर, जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई’ सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है। वीडियो सामने आने के बाद जांच टीम गठित की गई है। CHC प्रभारी से शो-कॉज भी पूछा गया है। पूरे मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही घटना वास्तव में किस परिस्थिति में हुई और चतुर्थवर्गीय कर्मी को मरीज के उपचार की जिम्मेदारी कैसे मिली।

