सीमांचल के कद्दावर नेता अब्दुल जलील मस्तान का निधन:महागठबंधन सरकार में मंत्री, अमौर से 6 बार विधायक रहे; दिल्ली एम्स में चल रहा था इलाज

सीमांचल के कद्दावर नेता अब्दुल जलील मस्तान का निधन:महागठबंधन सरकार में मंत्री, अमौर से 6 बार विधायक रहे; दिल्ली एम्स में चल रहा था इलाज

पूर्णिया की अमौर विधानसभा सीट से 6 बार विधायक रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री अब्दुल जलील मस्तान का निधन हो गया है। वे पिछले कुछ दिनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। दिल्ली के एम्स में उनका इलाज चल रहा था और वे आईसीयू में भर्ती थे। उनके निधन की खबर से सीमांचल समेत पूरे बिहार के राजनीतिक गलियारे और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है। 6 बार विधायक, 11 बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा अब्दुल जलील मस्तान सीमांचल में कांग्रेस के प्रमुख और जनाधार वाले नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने पूर्णिया जिले की अमौर विधानसभा सीट का 6 बार प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1985 से वे अमौर सीट पर कांग्रेस के टिकट से 11 बार चुनाव लड़ चुके थे। जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ के कारण चुनावी परिस्थितियां बदलने के बावजूद अमौर विधानसभा क्षेत्र में उनका प्रभाव बना रहा। महागठबंधन सरकार में मंत्री रहे 2015 में बिहार में महागठबंधन सरकार बनने के बाद अब्दुल जलील मस्तान बिहार सरकार में मंत्री बने। उन्होंने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। वे करीब 40 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े रहे और अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी के लिए सक्रिय रहे। सीमांचल के मुद्दों को लेकर विधानसभा में उठाते रहे आवाज अब्दुल जलील मस्तान अपनी बेबाक बयानबाजी और आम लोगों के बीच सक्रिय रहने के लिए जाने जाते थे। बाढ़ और सीमांचल की बुनियादी समस्याओं को लेकर वे विधानसभा से लेकर सड़क तक आवाज उठाते रहे। इलाके के लोगों के बीच उनकी सुलभता और जमीन से जुड़े नेता की छवि बनी रही। राजनीतिक दलों के नेताओं ने जताया शोक उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों ने शोक जताया है। नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके निधन को सीमांचल की राजनीति के लिए बड़ी क्षति बताया। ‘सीमांचल में गरीब की आवाज थे’ अमौर के वर्तमान AIMIM विधायक अख्तरूल ईमान ने अब्दुल जलील मस्तान के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि वे सीमांचल में गरीबों की आवाज थे। उनके जाने से राजनीतिक मैदान में अपूरणीय क्षति हुई है। ‘हमने हमेशा मोहब्बत से चुनाव लड़ा’ अमौर से जदयू के पूर्व विधायक सबा जफर ने कहा कि अब्दुल जलील मस्तान सीमांचल के कद्दावर नेता थे। उन्होंने कहा, “भले ही हमलोग चुनाव के प्रतिद्वंद्वी रहे हों, लेकिन हमने हमेशा मोहब्बत से चुनाव लड़ा है। मेरे पिताजी के साथ भी उनकी चुनावी लड़ाई रही है, लेकिन हर सुख-दुख में सब साथ खड़े रहे हैं।” उन्होंने कहा कि अल्लाह उन्हें जन्नत में जगह दे। इस दुख की घड़ी में वे उनके परिवार के साथ हैं। पूर्णिया की अमौर विधानसभा सीट से 6 बार विधायक रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री अब्दुल जलील मस्तान का निधन हो गया है। वे पिछले कुछ दिनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। दिल्ली के एम्स में उनका इलाज चल रहा था और वे आईसीयू में भर्ती थे। उनके निधन की खबर से सीमांचल समेत पूरे बिहार के राजनीतिक गलियारे और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है। 6 बार विधायक, 11 बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा अब्दुल जलील मस्तान सीमांचल में कांग्रेस के प्रमुख और जनाधार वाले नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने पूर्णिया जिले की अमौर विधानसभा सीट का 6 बार प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1985 से वे अमौर सीट पर कांग्रेस के टिकट से 11 बार चुनाव लड़ चुके थे। जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ के कारण चुनावी परिस्थितियां बदलने के बावजूद अमौर विधानसभा क्षेत्र में उनका प्रभाव बना रहा। महागठबंधन सरकार में मंत्री रहे 2015 में बिहार में महागठबंधन सरकार बनने के बाद अब्दुल जलील मस्तान बिहार सरकार में मंत्री बने। उन्होंने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। वे करीब 40 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े रहे और अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी के लिए सक्रिय रहे। सीमांचल के मुद्दों को लेकर विधानसभा में उठाते रहे आवाज अब्दुल जलील मस्तान अपनी बेबाक बयानबाजी और आम लोगों के बीच सक्रिय रहने के लिए जाने जाते थे। बाढ़ और सीमांचल की बुनियादी समस्याओं को लेकर वे विधानसभा से लेकर सड़क तक आवाज उठाते रहे। इलाके के लोगों के बीच उनकी सुलभता और जमीन से जुड़े नेता की छवि बनी रही। राजनीतिक दलों के नेताओं ने जताया शोक उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों ने शोक जताया है। नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके निधन को सीमांचल की राजनीति के लिए बड़ी क्षति बताया। ‘सीमांचल में गरीब की आवाज थे’ अमौर के वर्तमान AIMIM विधायक अख्तरूल ईमान ने अब्दुल जलील मस्तान के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि वे सीमांचल में गरीबों की आवाज थे। उनके जाने से राजनीतिक मैदान में अपूरणीय क्षति हुई है। ‘हमने हमेशा मोहब्बत से चुनाव लड़ा’ अमौर से जदयू के पूर्व विधायक सबा जफर ने कहा कि अब्दुल जलील मस्तान सीमांचल के कद्दावर नेता थे। उन्होंने कहा, “भले ही हमलोग चुनाव के प्रतिद्वंद्वी रहे हों, लेकिन हमने हमेशा मोहब्बत से चुनाव लड़ा है। मेरे पिताजी के साथ भी उनकी चुनावी लड़ाई रही है, लेकिन हर सुख-दुख में सब साथ खड़े रहे हैं।” उन्होंने कहा कि अल्लाह उन्हें जन्नत में जगह दे। इस दुख की घड़ी में वे उनके परिवार के साथ हैं।  

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