कानपुर में कॉपीराइट, धोखाधड़ी और जालसाजी के मुकदमे में वर्ष 2000 से फरार चल रहे आरोपी को आखिरकार रेलबाजार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पुलिस से बचने के लिए 26 साल तक अपनी पहचान बदलकर चौबेपुर और बिठूर इलाके में रह रहा था। पुलिस की दो टीमें पिछले तीन महीने से उसके पुराने मामलों, पहचान और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रही थीं। शनिवार को बिठूर में उसके छिपे होने की सूचना मिली, जिसके बाद घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया। पुलिस ने शाम करीब 6 बजे आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। थाना प्रभारी अमान सिंह ने बताया कि वर्ष 2000 में आरोपी के खिलाफ कॉपीराइट, धोखाधड़ी और जालसाजी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। केस दर्ज होने के बाद वह पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए फरार हो गया था। इसके बाद उसने अपनी पहचान बदल ली और लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस को गुमराह करता रहा। लंबे समय से उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी। तीन महीने से जुटा रहे थे सुराग, बिठूर में मिली लोकेशन आरोपी की गिरफ्तारी के लिए रेलबाजार पुलिस ने दो टीमें लगाई थीं। दोनों टीमें पिछले तीन महीने से उसके पुराने पते, पहचान और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रही थीं। इसी दौरान पुलिस को उसके बिठूर में छिपकर रहने की सूचना मिली। टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। 26 साल में कहां-कहां रहा, पुलिस जुटा रही जानकारी गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी 26 साल तक किन-किन जगहों पर रहा और उसने किस पहचान का इस्तेमाल किया। पुलिस उसके इस दौरान की गतिविधियों और संपर्कों की भी जानकारी जुटा रही है। लंबे समय से लंबित मामले में आरोपी की गिरफ्तारी को रेलबाजार पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

