राष्ट्रीय लोक अदालत में हजारों मामलों का निपटारा:गोपालगंज सिविल कोर्ट में 28 बेंच बनीं, आपसी सहमति से हुए समाधान

राष्ट्रीय लोक अदालत में हजारों मामलों का निपटारा:गोपालगंज सिविल कोर्ट में 28 बेंच बनीं, आपसी सहमति से हुए समाधान

गोपालगंज के सिविल कोर्ट परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने यह आयोजन किया। इसका मुख्य मकसद आपसी सहमति और सुलह-समझौते से लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का जल्दी समाधान करना था। लोक अदालत की शुरुआत जिला जज ने दीप जलाकर की, जिसमें बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। दो तरह के मामलों की सुनवाई हुई लोक अदालत में ज्यादा मामलों को देखते हुए और सुनवाई को आसान बनाने के लिए कुल 28 पीठें बनाई गईं। हर पीठ में न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ पैनल अधिवक्ता भी तयनात किए गए थे। परिवहन विभाग से जुड़े एमवी एक्ट और ट्रैफिक चालान के मामलों के लिए अलग से खास पीठें बनीं। परिवार न्यायालय, बैंक लोन वसूली, सिविल और आपराधिक सुलहनीय मामलों के लिए भी अलग-अलग पीठें तय की गईं। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में हजारों मामलों का निपटारा सुलह-समझौते से किया गया। लोक अदालत में मुख्य रूप से दो तरह के मामलों की सुनवाई हुई। प्री-लिटिगेशन मामलों में वे केस शामिल थे, जो कोर्ट में मुकदमा दर्ज होने से पहले के थे। दोनों पक्षों की सहमति से निपटाए गए केस इनमें विभिन्न राष्ट्रीयकृत और ग्रामीण बैंकों के लोन वसूली मामले, बीएसएनएल बिल, बिजली विभाग के बकाया और मोटर वाहन अधिनियम (ट्रैफिक चालान) से जुड़े मामले शामिल थे। कोर्ट में लंबित मामलों में सिविल कोर्ट में चल रहे आपराधिक सुलहनीय मामले, पारिवारिक और वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले, एनआई एक्ट (चेक बाउंस) के मामले, श्रम विवाद और दुर्घटना दावा से जुड़े कई केस दोनों पक्षों की सहमति से निपटाए गए। लोक अदालत में आने वाले पक्षों और आम लोगों की सुविधा के लिए कोर्ट परिसर में ‘हेल्प डेस्क’ भी लगाया गया था। इससे लोग आसानी से अपनी संबंधित पीठ और अपने मामले की जानकारी ले सके। गोपालगंज के सिविल कोर्ट परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने यह आयोजन किया। इसका मुख्य मकसद आपसी सहमति और सुलह-समझौते से लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का जल्दी समाधान करना था। लोक अदालत की शुरुआत जिला जज ने दीप जलाकर की, जिसमें बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। दो तरह के मामलों की सुनवाई हुई लोक अदालत में ज्यादा मामलों को देखते हुए और सुनवाई को आसान बनाने के लिए कुल 28 पीठें बनाई गईं। हर पीठ में न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ पैनल अधिवक्ता भी तयनात किए गए थे। परिवहन विभाग से जुड़े एमवी एक्ट और ट्रैफिक चालान के मामलों के लिए अलग से खास पीठें बनीं। परिवार न्यायालय, बैंक लोन वसूली, सिविल और आपराधिक सुलहनीय मामलों के लिए भी अलग-अलग पीठें तय की गईं। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में हजारों मामलों का निपटारा सुलह-समझौते से किया गया। लोक अदालत में मुख्य रूप से दो तरह के मामलों की सुनवाई हुई। प्री-लिटिगेशन मामलों में वे केस शामिल थे, जो कोर्ट में मुकदमा दर्ज होने से पहले के थे। दोनों पक्षों की सहमति से निपटाए गए केस इनमें विभिन्न राष्ट्रीयकृत और ग्रामीण बैंकों के लोन वसूली मामले, बीएसएनएल बिल, बिजली विभाग के बकाया और मोटर वाहन अधिनियम (ट्रैफिक चालान) से जुड़े मामले शामिल थे। कोर्ट में लंबित मामलों में सिविल कोर्ट में चल रहे आपराधिक सुलहनीय मामले, पारिवारिक और वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले, एनआई एक्ट (चेक बाउंस) के मामले, श्रम विवाद और दुर्घटना दावा से जुड़े कई केस दोनों पक्षों की सहमति से निपटाए गए। लोक अदालत में आने वाले पक्षों और आम लोगों की सुविधा के लिए कोर्ट परिसर में ‘हेल्प डेस्क’ भी लगाया गया था। इससे लोग आसानी से अपनी संबंधित पीठ और अपने मामले की जानकारी ले सके।  

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