छिंदवाड़ा में बादल बनते हैं पर नहीं गिर रहा पानी:दिन में धूप से उमस बढ़ी; सदी-खांसी, संक्रमण मरीज बढ़े, मौसम में उतार-चढ़ाव परेशानी

छिंदवाड़ा में बादल बनते हैं पर नहीं गिर रहा पानी:दिन में धूप से उमस बढ़ी; सदी-खांसी, संक्रमण मरीज बढ़े, मौसम में उतार-चढ़ाव परेशानी

छिंदवाड़ा जिले में पिछले दो दिनों से मौसम लगातार बारिश के लिए तैयार होता दिखाई दे रहा है। आसमान में बादल छाने के बाद बारिश की उम्मीद बन रही है, लेकिन बादल बिना बरसे ही निकल रहे हैं। इसके उलट दिन में निकल रही धूप के कारण वातावरण में उमस बढ़ गई है। मौसम के इस बदलाव से लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ रहा है। बारिश नहीं होने और दिन में धूप निकलने के कारण मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसका असर लोगों की सेहत पर भी दिखाई दे रहा है। सर्दी-खांसी के साथ गले में संक्रमण की शिकायत लेकर मरीज अस्पताल और निजी क्लीनिकों में पहुंच रहे हैं। मौसम में बदलाव के दौरान बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इस साल 195.7 मिमी कम बारिश
जिले में 1 जून से 12 सितंबर 2026 तक औसत 715 मिमी बारिश दर्ज की गई है। जबकि पिछले साल इसी अवधि में 910.7 मिमी बारिश हो चुकी थी। यानी इस साल पिछले साल की तुलना में करीब 195.7 मिमी कम बारिश हुई है। जिले की सामान्य औसत बारिश 1059 मिमी है। इस लिहाज से सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा होने के लिए अभी 344 मिमी बारिश की जरूरत है। तहसीलवार आंकड़ों में हर्रई में सबसे ज्यादा 1026.6 मिमी, तामिया में 962.2 मिमी और उमरेठ में 879.7 मिमी बारिश दर्ज हुई है। वहीं छिंदवाड़ा में अब तक 409 मिमी, मोहखेड़ में 499.9 मिमी, परासिया में 509.6 मिमी और बिछुआ में 588.9 मिमी बारिश दर्ज की गई है। मौसम बदलते ही सावधानी जरूरी
डॉक्टर मनन गोगिया ने बताया कि मौसम में लगातार बदलाव होने पर सर्दी-खांसी और गले में संक्रमण की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे समय में लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। कोशिश करें कि अधिक से अधिक उबला हुआ या सुरक्षित पानी पिएं। इससे गले के संक्रमण से बचाव में मदद मिल सकती है। अचानक ठंडे-गर्म वातावरण में जाने से भी बचना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सर्दी-खांसी से परेशान लोगों को विशेष सावधानी रखने की जरूरत है।

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