फरक्का जल संधि के मौजूदा स्वरूप में नवीनीकरण के खिलाफ जदयू ने शुक्रवार को रफीगंज विधायक प्रमोद कुमार सिंह के आवास पर पीसी की। जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार, जिला उपाध्यक्ष रामानुज सिंह, जितेंद्र सिंह चंद्रवंशी और बारुण प्रखंड अध्यक्ष मुकेश पटेल ने कहा कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार लंबे समय से जल संसाधन से जुड़े नुकसान झेल रहा है। बिहार के जल अधिकार, सिंचाई, पेयजल और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखे बिना संधि का नवीनीकरण उचित नहीं होगा। नेताओं ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य संजय झा ने 4 सितंबर को बक्सर से संधि के नवीनीकरण के खिलाफ जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। इसके तहत विभिन्न जिलों में लोगों को फरक्का व्यवस्था के प्रभावों की जानकारी दी जा रही है। जदयू नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करीब 15 वर्षों से फरक्का जल संधि को समाप्त करने की मांग करते रहे हैं। 2050 की जरूरतों को ध्यान में रखकर हो फैसला जदयू नेताओं ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर 1996 में 30 वर्ष के लिए फरक्का जल संधि हुई थी। इसकी अवधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है। पार्टी का स्पष्ट मत है कि मौजूदा स्वरूप में इसका नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए। यदि केंद्र सरकार संधि को आगे बढ़ाने पर विचार करती है तो बिहार की 2050 तक की जल जरूरतों को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा कि बिहार में जल संसाधन सीमित नहीं हैं, लेकिन उनका उपयोग और प्रबंधन राज्य की जरूरत के अनुसार होना जरूरी है। सिंचाई और पेयजल की बढ़ती आवश्यकता के बीच बिहार के हिस्से के पानी और नदी संसाधनों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। गंडक, कोसी सहित अन्य नदियों के जल संसाधनों को लेकर भी राज्य के हितों की रक्षा की मांग की गई।
गाद और बाढ़ की समस्या का उठाया मुद्दा जदयू नेताओं ने फरक्का व्यवस्था से गंगा में गाद जमा होने, नदी के प्रवाह में बदलाव और बाढ़ की समस्या बढ़ने की चिंता जताई। उनका कहना था कि इसका असर बिहार के कई इलाकों में देखने को मिलता है। बाढ़ के दौरान राज्य सरकार को राहत और बचाव के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण कार्यों पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। नेताओं ने कहा कि बिहार के कई क्षेत्रों में आज भी सिंचाई और पेयजल की समस्या बनी हुई है। औरंगाबाद भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे में उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग राज्य की जनता के हित में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि बिहार के जल अधिकार और जनसरोकार से जुड़ा विषय है। जदयू जनजागरूकता अभियान के माध्यम से इस मुद्दे को आम लोगों तक पहुंचाएगा। केंद्र सरकार से मांग की गई कि संधि के नवीनीकरण पर निर्णय लेते समय बिहार के वर्तमान और भविष्य के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। फरक्का जल संधि के मौजूदा स्वरूप में नवीनीकरण के खिलाफ जदयू ने शुक्रवार को रफीगंज विधायक प्रमोद कुमार सिंह के आवास पर पीसी की। जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार, जिला उपाध्यक्ष रामानुज सिंह, जितेंद्र सिंह चंद्रवंशी और बारुण प्रखंड अध्यक्ष मुकेश पटेल ने कहा कि फरक्का जल संधि के कारण बिहार लंबे समय से जल संसाधन से जुड़े नुकसान झेल रहा है। बिहार के जल अधिकार, सिंचाई, पेयजल और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखे बिना संधि का नवीनीकरण उचित नहीं होगा। नेताओं ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य संजय झा ने 4 सितंबर को बक्सर से संधि के नवीनीकरण के खिलाफ जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। इसके तहत विभिन्न जिलों में लोगों को फरक्का व्यवस्था के प्रभावों की जानकारी दी जा रही है। जदयू नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करीब 15 वर्षों से फरक्का जल संधि को समाप्त करने की मांग करते रहे हैं। 2050 की जरूरतों को ध्यान में रखकर हो फैसला जदयू नेताओं ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर 1996 में 30 वर्ष के लिए फरक्का जल संधि हुई थी। इसकी अवधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है। पार्टी का स्पष्ट मत है कि मौजूदा स्वरूप में इसका नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए। यदि केंद्र सरकार संधि को आगे बढ़ाने पर विचार करती है तो बिहार की 2050 तक की जल जरूरतों को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा कि बिहार में जल संसाधन सीमित नहीं हैं, लेकिन उनका उपयोग और प्रबंधन राज्य की जरूरत के अनुसार होना जरूरी है। सिंचाई और पेयजल की बढ़ती आवश्यकता के बीच बिहार के हिस्से के पानी और नदी संसाधनों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। गंडक, कोसी सहित अन्य नदियों के जल संसाधनों को लेकर भी राज्य के हितों की रक्षा की मांग की गई।
गाद और बाढ़ की समस्या का उठाया मुद्दा जदयू नेताओं ने फरक्का व्यवस्था से गंगा में गाद जमा होने, नदी के प्रवाह में बदलाव और बाढ़ की समस्या बढ़ने की चिंता जताई। उनका कहना था कि इसका असर बिहार के कई इलाकों में देखने को मिलता है। बाढ़ के दौरान राज्य सरकार को राहत और बचाव के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण कार्यों पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। नेताओं ने कहा कि बिहार के कई क्षेत्रों में आज भी सिंचाई और पेयजल की समस्या बनी हुई है। औरंगाबाद भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे में उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग राज्य की जनता के हित में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि बिहार के जल अधिकार और जनसरोकार से जुड़ा विषय है। जदयू जनजागरूकता अभियान के माध्यम से इस मुद्दे को आम लोगों तक पहुंचाएगा। केंद्र सरकार से मांग की गई कि संधि के नवीनीकरण पर निर्णय लेते समय बिहार के वर्तमान और भविष्य के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

