Floor of the Mouth Cancer: मुंह में कोई छोटा-मोटा छाला या घाव होना एक बहुत ही आम बात है। अक्सर हम इसे पेट की गर्मी, तीखा-मसालेदार खाना खाने या गलती से दांत कट जाने का नतीजा मानकर छोड़ देते हैं। हम बाजार से कोई भी जेल या क्रीम लाकर लगा लेते हैं और सोचते हैं कि यह दो-चार दिन में अपने आप ठीक हो जाएगा। लेकिन अगर यह घाव या सूजन जीभ के ठीक नीचे वाले हिस्से में है और हफ्तों बीत जाने के बाद भी ठीक नहीं हो रही, तो थोड़ा संभल जाने की जरूरत है। मेयो क्लिनिक के मुताबिक, जीभ के नीचे लगातार बना रहने वाला ऐसा घाव या गांठ फ्लोर ऑफ द माउथ कैंसर (Floor of the Mouth Cancer) का शुरुआती संकेत हो सकता है। यह मुंह के कैंसर का ही एक रूप है, जो जीभ के नीचे वाले हिस्से यानी मुंह के तलवे (Floor of the mouth) में पनपता है। शुरुआती दौर में अगर ध्यान दे दिया जाए, तो इसका इलाज बहुत आसान और कारगर होता है। आइए समझते हैं कि यह समस्या क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और हमें कब सतर्क हो जाना चाहिए।
फ्लोर ऑफ द माउथ कैंसर क्या होता है?
नेचर रिसर्च की मानें तो, हमारी जीभ जिस निचले हिस्से पर टिकी होती है, उसे मुंह का तलवा कहा जाता है। जब इस हिस्से की पतली और मुलायम त्वचा (कोशिकाओं) में असामान्य बदलाव आने लगते हैं और वे अनियंत्रित होकर बढ़ने लगती हैं, तो यह कैंसर का रूप ले लेती हैं। यह हिस्सा बहुत ही संवेदनशील होता है क्योंकि यहीं पर हमारी लार बनाने वाली ग्रंथियां (Salivary glands) और कई बारीक नसें होती हैं। अगर यहां गांठ या छालों को लंबे समय तक अनदेखा किया जाए, तो यह बीमारी धीरे-धीरे आसपास के हिस्सों जैसे मसूड़ों, जबड़े की हड्डी या जीभ तक फैल सकती है।
इसके मुख्य लक्षण और शुरुआती संकेत क्या हैं?
- जीभ के नीचे न भरने वाला घाव या छाला।
- सख्त गांठ या सूजन महसूस होना।
- सफेद या लाल रंग के धब्बे।
- दर्द और निगलने में परेशानी।
- दांतों का ढीला होना या मसूड़ों में तकलीफ।
- गर्दन में सूजन।
किन कारणों और आदतों से बढ़ता है इसका खतरा?
- तंबाकू और गुटखा का सेवन।
- शराब की लत।
- मुंह की सही सफाई न रखना।
- एचपीवी (HPV) इन्फेक्शन।
डॉक्टर से जांच कब और क्यों करानी चाहिए?
अगर आपको अपनी जीभ के नीचे कोई भी ऐसा घाव, छाला या गांठ दिखती है जो 15-20 दिनों में खुद ब खुद ठीक नहीं हो रही है, तो बिना वक्त गंवाए किसी डेंटिस्ट या ईएनटी (ENT) स्पेशलिस्ट को दिखाएं। डॉक्टर सबसे पहले उस जगह को ध्यान से देखते हैं और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी (छोटा सा टुकड़ा लेकर जांच करना) की सलाह देते हैं। याद रखें कि बायोप्सी से डरने की जरूरत नहीं होती, यह सिर्फ बीमारी की सच्चाई जानने का एक जरिया है। अगर बीमारी शुरुआती चरण (Early Stage) में पकड़ी जाती है, तो मामूली सर्जरी या इलाज से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।
बचाव के असरदार तरीके
- तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा और जर्दे से पूरी तरह दूरी बना लें।
- शराब के सेवन से बचें या इसे सीमित करें।
- दिन में दो बार ब्रश करें और जीभ व मुंह के निचले हिस्से की अच्छे से सफाई रखें।
- अगर मुंह में कोई तीखा या नुकीला दांत बार-बार जीभ के नीचे छिल रहा हो, तो तुरंत डेंटिस्ट से उसे ठीक कराएं।
- हर छह महीने या साल में एक बार अपने मुंह की सामान्य डॉक्टरी जांच जरूर करवाएं।

