चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से हुई तबाही के बाद प्रशासन ने भविष्य में ऐसे हालात रोकने की तैयारी शुरू कर दी है। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने नदी किनारे हुए निर्माणों की जांच के लिए मझगवां एसडीएम की अगुवाई में 5 सदस्यीय टीम बनाई है। टीम सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की गाइडलाइन के आधार पर जांच करेगी। नदी के बहाव में बाधक निर्माण होंगे चिन्हित टीम में नगर परिषद सीएमओ, नायब तहसीलदार, PWD और जल संसाधन विभाग के SDO और नगर परिषद के सब इंजीनियर शामिल हैं। टीम नदी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट डालने वाले सरकारी और निजी निर्माणों के साथ अवैध प्लाटिंग की भी जांच करेगी। हाई फ्लड लेवल भी किया जाएगा तय जांच के दौरान मंदाकिनी का हाई फ्लड लेवल भी तय किया जाएगा। 28-29 अगस्त की रात आई बाढ़ में आरोग्यधाम पर नदी का जलस्तर 145.76 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि निर्धारित हाई फ्लड लेवल 139.60 मीटर था। बाढ़ में हनुमानधारा ब्रिज भी बह गया था। पुराने भवनों और नए निर्माणों पर भी नजर प्रशासन नदी किनारे बने पुराने और कमजोर भवनों की पहचान करेगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में नदी का जलस्तर बढ़ने पर लोगों की सुरक्षा को देखते हुए नए और पुनर्निर्माण वाले भवनों की भी निगरानी की जाएगी। प्रभारी मंत्री दे चुके हैं अतिक्रमण हटाने का आश्वासन हाल ही में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी मंदाकिनी के प्रवाह क्षेत्र में बाधक सरकारी और निजी अतिक्रमण हटाने का आश्वासन दिया था। अब कलेक्टर की टीम के गठन से जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कलेक्टर ने कहा कि नदी के प्राकृतिक बहाव में बाधक इन्फ्रास्ट्रक्चर को चिन्हित कर नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

